परिवहन क्षेत्र की बड़ी परियोजनाओं में सुस्त रफ्तार पर सरकार की कड़ी नजर
देशभर में चल रहे बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता के कल्याण से जुड़ी परिवहन परियोजनाएं तय समयसीमा के भीतर पूरी हों। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में यह बात सामने आई कि कई महत्वपूर्ण रेल और सड़क परियोजनाओं में बजट का उपयोग यानी फंड वितरण की गति काफी धीमी है। इस स्थिति से निपटने के लिए शीर्ष स्तर पर ठोस कदम उठाने की तैयारी कर ली गई है ताकि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा न आए।
विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचा किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। जब सड़कें, एक्सप्रेसवे और आधुनिक रेलवे लाइनें समय पर बनकर तैयार होती हैं, तो व्यापार को बढ़ावा मिलता है और आम नागरिकों का सफर भी सुगम होता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन इलाकों में काम संतोषजनक नहीं है, वहां जवाबदेही तय की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों से इस बारे में जवाब तलब किया जाएगा।
संबंधित खबरें
फंड वितरण में पिछड़ रही कई परियोजनाएं, तय हुआ नया फॉर्मूला
चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार ने विभिन्न परिवहन परियोजनाओं के लिए दो लाख पचपन हजार करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि का प्रावधान किया था। हालांकि, वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अभी तक कुल आवंटित राशि का केवल 38 प्रतिशत हिस्सा ही वितरित किया जा सका है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत वितरण दर से काफी पीछे है। कई प्रोजेक्ट्स में तो यह स्थिति है कि फंड का उपयोग तीस प्रतिशत से भी कम हो पाया है, जबकि कुछ जगहों पर यह पांच प्रतिशत से भी नीचे है।
इस गिरते ग्राफ को सुधारने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय ने निर्देश जारी किए हैं कि सभी संबंधित मंत्रालय और स्थानीय निकाय सीधे तौर पर जमीनी स्तर पर समीक्षा करें। इस बात पर जोर दिया गया है कि जिस स्तर पर समस्या उत्पन्न हो, उसका समाधान वहीं पर निकाला जाना चाहिए। किसी भी प्रोजेक्ट में अनावश्यक देरी या फाइलें अटकाने की प्रवृत्ति को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धीमी गति वाले प्रोजेक्ट्स से पैसा निकालकर उन योजनाओं में लगाया जाएगा, जिनकी फंड खपाने की क्षमता बेहतर है।
गुणवत्ता से समझौता किए बिना समय सीमा का कड़ाई से पालन
बुनियादी ढांचे के विकास में गति के साथ-साथ गुणवत्ता का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। सरकार ने सभी निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को हिदायत दी है कि वे तय नियमों, सुरक्षा मानकों और तकनीकी मापदंडों का पूरी निष्ठा से पालन करें। काम जल्दी पूरा करने के चक्कर में निर्माण की मजबूती और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। जिन परियोजनाओं को इस साल के अंत तक पूरा किया जाना है, उनके स्थलों का वरिष्ठ अधिकारी खुद दौरा करेंगे और प्रगति की सीधे निगरानी करेंगे।
उत्तर-दक्षिण हाई-स्पीड रेलवे और अन्य महत्वपूर्ण कॉरिडोर जैसी बड़ी योजनाओं के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं। इन प्रोजेक्ट्स में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं का तेजी से समाधान किया जा रहा है ताकि निर्माण कार्य में कोई रुकावट न आए। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परामर्शदाताओं का चयन करके तकनीकी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और सुचारू बनाया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी अड़चन का सामना न करना पड़े।
"बाधाओं को उसी स्तर पर हल किया जाना चाहिए जहां वे उत्पन्न होती हैं; किसी भी स्तर पर टालमटोल या अपनी जिम्मेदारी दूसरों पर डालने की प्रवृत्ति को पूरी तरह से रोका जाना चाहिए। जिन प्रोजेक्ट्स में काम सुस्त है, वहां के फंड को बेहतर कार्यक्षमता वाली योजनाओं में तुरंत पुनर्आवंटित किया जाए।" — प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश
राजमार्गों और शहरी परिवहन को मिल रही नई गति
सड़क परिवहन के क्षेत्र में भी देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे एक्सप्रेसवे और रिंग रोड प्रोजेक्ट्स पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चाहे वह उत्तर-दक्षिण एक्सप्रेसवे का विस्तार हो या फिर बड़े महानगरों के चारों ओर बनाए जा रहे रिंग रोड, हर जगह अड़चनों को दूर करने के लिए प्रशासनिक अमला मुस्तैद कर दिया गया है। स्थानीय निकायों और राज्य सरकारों के साथ तालमेल बिठाकर भूमि संबंधी विवादों को आपसी बातचीत और कानूनी दायरे में रहकर सुलझाया जा रहा है ताकि विकास कार्यों को गति मिलती रहे।
रेलवे नेटवर्क के विस्तार में भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आधुनिक तकनीकी मानकों को प्राथमिकता दी जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में साझा पुलों के निर्माण और क्रॉस-बोर्डिंग प्रोजेक्ट्स के लिए पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक और तकनीकी बातचीत को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार का यह समग्र दृष्टिकोण देश के परिवहन तंत्र को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों को और अधिक बल मिलेगा।







