होम/देश/INDIA गठबंधन की बैठक में उद्धव ठाकरे का कांग्रेस पर बड़ा हमला, कहा- 'एकला चलो' नीति से कमजोर हो रही विपक्ष की एकजुटता
देशपढ़ने में समय: 7 मिनट

INDIA गठबंधन की बैठक में उद्धव ठाकरे का कांग्रेस पर बड़ा हमला, कहा- 'एकला चलो' नीति से कमजोर हो रही विपक्ष की एकजुटता

दिल्ली में हुई INDIA गठबंधन की वर्चुअल बैठक में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस पार्टी की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग प्रदर्शन करने से विपक्ष का प्रभाव कम होता है और सभी दलों को साझा रूप से सड़क पर उतरना होगा। इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और चुनाव प्रक्रिया में सुधार की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•30 सितंबर 2026 • अपडेटेड•43
🌐Read in English →
शेयर करें:
INDIA गठबंधन की बैठक में उद्धव ठाकरे का कांग्रेस पर बड़ा हमला, कहा- 'एकला चलो' नीति से कमजोर हो रही विपक्ष की एकजुटता
📷 INDIA गठबंधन की बैठक में उद्धव ठाकरे का कांग्रेस पर बड़ा हमला, कहा- 'एकला चलो' नीति से कमजोर हो रही विपक्ष की एकजुटता — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस की 'एकला चलो' नीति पर जताई गहरी आपत्ति।
  • कहा कि गठबंधन के सभी दलों को अलग-अलग कार्यक्रम करने के बजाय साझा आंदोलन करना चाहिए।
  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की।
  • बैठक में चुनाव आयोग के कामकाज, एसआईआर प्रक्रिया और ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने का मुद्दा प्रमुखता से उठा।

दिल्ली में हुई INDIA गठबंधन की अहम बैठक

राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों के प्रमुख मोर्चे 'INDIA' गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश के मौजूदा राजनीतिक हालात और चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चर्चा हुई। इस वर्चुअल बैठक में देश के कई दिग्गज नेताओं ने हिस्सा लिया और आगामी रणनीतियों पर खुलकर अपने विचार रखे। बैठक का मुख्य फोकस चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों में कथित विसंगतियों और विपक्ष को एकजुट करने की रणनीति पर रहा।

इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान विभिन्न दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की वकालत की। हालांकि, बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने अपनी ही सहयोगी पार्टी कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए। ठाकरे के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और गठबंधन के भीतर समन्वय को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

विपक्षी दलों का यह जमावड़ा ऐसे समय में हुआ है जब देश में विभिन्न मुद्दों पर सियासी पारा लगातार चढ़ रहा है। गठबंधन के नेताओं का मानना है कि यदि सरकार को घेरना है तो बिखराव को रोकना होगा और एक मजबूत संयुक्त रणनीति के साथ जनता के बीच जाना होगा। इसी कड़ी में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर भी कई तीखे सवाल उठाए गए और आयोग के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका पर संदेह व्यक्त किया गया।

उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस की 'एकला चलो' नीति पर उठाए सवाल

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी की रणनीति पर तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गठबंधन के दलों को अकेले चलने की नीति से बचना चाहिए। ठाकरे ने विशेष रूप से महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां कांग्रेस पार्टी अकेले ही धरना और प्रदर्शन कर रही है, जो विपक्षी एकता के हित में बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि जब तक सभी दल मिलकर एक साझा मंच से हुंकार नहीं भरेंगे, तब तक जनता के बीच सही संदेश नहीं जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि हर दल को अपने व्यक्तिगत कार्यक्रमों को छोड़कर 'INDIA' गठबंधन के बैनर तले ही संयुक्त रूप से जमीन पर उतरना चाहिए। अलग-अलग प्रदर्शन करने से न केवल आंदोलनों की धार कमजोर होती है, बल्कि विपक्षी एकता की ताकत भी बिखर जाती है।

शिवसेना प्रमुख ने अपनी पार्टी के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि उनकी पार्टी आने वाली चार तारीख को चुनाव आयोग के खिलाफ महाराष्ट्र में एक बहुत बड़ा आंदोलन करने जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में पूरा गठबंधन इसी तरह एकजुट होकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की नीतियों का विरोध करेगा, तभी इसका असरदार और दूरगामी परिणाम देखने को मिलेगा।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखी नजर

इस बैठक में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को तुरंत उनके पद से हटाने की मांग कर डाली। खरगे ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज और फैसलों को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं, जिससे पूरी संस्था की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लग गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि चुनाव आयोग के अन्य आयुक्तों द्वारा पिछले दस महीनों में कई बार प्रक्रियागत मामलों पर आपत्तियां जताई गईं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह बेहद जरूरी है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और किसी भी अधिकारी की कार्यशैली पर जनता का भरोसा न डगमगाए। इसी आधार पर विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को जोर-शोर से उठाया है।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विपक्षी दल चुनाव आयोग के सामने अपनी इन मांगों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपेंगे। नेताओं का कहना था कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने के लिए निष्पक्ष चुनाव कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में उठे मतदाता सूची और ईवीएम के मुद्दे

दिल्ली में हुई इस वर्चुअल बैठक में केवल राजनीतिक रणनीति ही नहीं, बल्कि चुनावी सुधारों से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर भी लंबी चर्चा हुई। कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों ने मांग की कि आगामी चुनावों में एसआईआर (SIR) लागू करने से पहले पुरानी और पूरी तरह सत्यापित मतदाता सूचियों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न छूटे।

इसके साथ ही बैठक में एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम को लेकर पुरानी बहस को हवा दी गई। विपक्षी दलों के कई नेताओं ने मांग की कि भविष्य के चुनावों में ईवीएम के बजाय पारंपरिक बैलेट पेपर यानी मतपत्रों के जरिए मतदान कराया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर मतदाताओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा और किसी भी प्रकार की धांधली की आशंका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

विपक्षी गठबंधन ने इन सभी मुद्दों को लेकर देशव्यापी स्तर पर एक जन आंदोलन खड़ा करने का खाका तैयार करना शुरू कर दिया है। नेताओं का मानना है कि यदि इन गंभीर मामलों पर जनता को जागरूक नहीं किया गया तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर गहरा असर पड़ सकता है, जिसे सुधारना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

निष्कर्ष और आगे की राजनीतिक राह

INDIA गठबंधन की यह बैठक भले ही आपसी समन्वय और रणनीतिक असहमति के दौर से गुजर रही हो, लेकिन इसने आने वाले दिनों के राजनीतिक संघर्ष की दिशा तय कर दी है। एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे ने क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया है, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग के खिलाफ साझा मोर्चा खोलने का संकल्प भी लिया गया है।

"INDIA गठबंधन को एक बड़ा आंदोलन करना होगा। गठबंधन के बैनर के तले सबको एकजुट होकर जमीन पर उतरना होगा। लेकिन यह बिल्कुल ठीक नहीं है कि पार्टियां अलग-अलग अपने कार्यक्रम करें। महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी अकेले धरना प्रदर्शन कर रही है, यह ठीक नहीं है।" — उद्धव ठाकरे, प्रमुख, शिवसेना (UBT)

आने वाले हफ्तों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल उद्धव ठाकरे की इस सलाह को मानते हुए अपनी 'एकला चलो' नीति त्यागते हैं या नहीं। यदि विपक्ष वास्तव में एकजुट होकर सड़कों पर उतरता है, तो केंद्र सरकार के खिलाफ चल रहे राजनीतिक संघर्ष में एक नया मोड़ आ सकता है, जिसका सीधा असर आगामी चुनावी राज्यों की राजनीति पर पड़ना तय है.

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है।