उत्तर प्रदेश के जूनियर एडेड स्कूलों में शिक्षक भर्ती की सुगबुगाहट तेज
उत्तर प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। प्रदेश के सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में लंबे समय से अटकी और प्रतीक्षित शिक्षक भर्ती प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ रही है। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से मिली ताजा जानकारियों के अनुसार, राज्यभर के विभिन्न जिलों में जूनियर एडेड स्कूलों के लगभग 1800 रिक्त पदों पर भर्ती का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं, जिससे योग्य युवाओं को रोजगार पाने का एक और बड़ा अवसर मिलेगा।
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत मुख्य रूप से दो बड़े पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसमें प्रधानाध्यापक के लगभग 1500 पद और सहायक अध्यापक के करीब 300 पद शामिल हैं। शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इन पदों के लिए पिछले काफी समय से तैयारियां चल रही थीं, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से मामला अटका हुआ था। अब जैसे-जैसे जिलों से सटीक आंकड़े सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे बेरोजगार बीएड और डीएलएड पास युवाओं में उम्मीद की एक नई किरण जग गई है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बीते बृहस्पतिवार की देर शाम तक उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जनपदों से प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक के रिक्त पदों का आधिकारिक अधियाचन बेसिक शिक्षा विभाग को मिल चुका है। विभाग के पास सभी जिलों का कुल डेटा पहुंच जाने के बाद अब आगे की औपचारिकताएं पूरी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है ताकि बिना किसी विलंब के आगामी कदम उठाए जा सकें।
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सभी जिलों के बीएसए को दिए गए निर्देश, तलब किए गए जरूरी अभिलेख
भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग कोई भी कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहता है। इसी सिलसिले में राज्य के सभी जनपदों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को विशेष रूप से बेसिक शिक्षा निदेशालय तलब किया गया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों के स्कूलों में खाली पड़े पदों की पूरी और पुख्ता जानकारी के साथ निदेशालय पहुंचें।
मिली जानकारी के अनुसार, पांच से सात अक्तूबर के बीच प्रदेशभर के सभी बीएसए को अलग-अलग तीन दिनों में अपने सभी जरूरी अभिलेखों और दस्तावेजों के साथ उपस्थित होना है। जिन स्कूलों में रिक्त पद मौजूद हैं और जहां नई नियुक्तियां होनी हैं, उन सभी संस्थानों का पूरा कच्चा-चिट्ठा इन अधिकारियों के पास होगा। विभाग का मानना है कि जिला स्तर पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या डेटा में अंतर न रहे, इसलिए खुद उच्च अधिकारियों की देखरेख में सभी दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
इस पूरी कवायद के पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगे चलकर भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कानूनी या तकनीकी बाधा का सामना न करना पड़े। पिछले वर्षों के अनुभवों से सबक लेते हुए विभाग इस बार हर एक कदम बेहद सावधानी के साथ उठा रहा है, ताकि अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।
अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों की वास्तविक स्थिति और नियम
उत्तर प्रदेश में अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों की कुल संख्या वैसे तो 3046 है, लेकिन इनमें से कई स्कूल ऐसे हैं जिनकी स्थिति समय के साथ बदली है। आंकड़ों के अनुसार, इन कुल स्कूलों में से 946 विद्यालय ऐसे हैं जिन्हें उच्चीकृत किया जा चुका है। यही वजह है कि यह नई भर्ती प्रक्रिया प्रदेशभर के शेष बचे लगभग 2100 स्कूलों के लिए ही प्रभावी होगी और इसी के आधार पर चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
इस पूरी भर्ती को संचालित करने के लिए एक तय कानूनी और विधिक ढांचा तैयार किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल भर्ती अधिनियम-1978 के सातवें संशोधन-2019 के प्रावधानों के तहत ही इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कराया जाएगा। नियमों की स्पष्टता होने के कारण अभ्यर्थियों को भी यह भरोसा है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और नियमों के दायरे में रहकर संपन्न होगी।
शिक्षा जानकारों का मानना है कि नियमों का यह दायरा पारदर्शिता लाने में मदद करेगा और किसी भी तरह के विवाद की गुंजाइश को काफी हद तक कम कर देगा। सरकार और विभाग दोनों का यही प्रयास है कि योग्य उम्मीदवारों को उनकी योग्यता के आधार पर सही समय पर नियुक्ति मिल सके।
वर्ष 2021 के बाद खाली हुए पदों पर होगी नजर, कब तक आएगा ऑनलाइन पोर्टल
इस भर्ती प्रक्रिया की एक और खास बात यह है कि इसमें मुख्य रूप से वर्ष 2021 के बाद से खाली हुए पदों को शामिल किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में रिटायरमेंट या अन्य कारणों से जो पद रिक्त हुए थे, उन्हीं का पूरा विवरण जिलों से मांगा गया था। अपर शिक्षा निदेशक, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग, मनोज कुमार द्विवेदी ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया है कि लगभग सभी जनपदों से रिक्तियों का ब्योरा मिल चुका है।
"प्रदेश के लगभग सभी जनपदों से रिक्त पदों के विवरण आ चुके हैं। वर्ष-2021 के बाद जो पद रिक्त थे, उसके विवरण मंगाए गए हैं। तीन अलग-अलग दिनों में सभी बीएसए को समस्त अभिलेखों के साथ बुलाया गया है। इसके बाद पोर्टल आदि तैयार किया जाएगा, फिर उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग को ऑनलाइन भेज दिया जाएगा।" — मनोज कुमार द्विवेदी, अपर शिक्षा निदेशक, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग
शिक्षा निदेशक के इस बयान से साफ हो गया है कि जिला स्तर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से ही आगे की तमाम आवेदन प्रक्रिया और चयन से जुड़े कदम उठाए जाएंगे। पोर्टल का काम पूरा होते ही पूरे डेटा को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को ऑनलाइन माध्यम से अग्रसारित कर दिया जाएगा, जिसके बाद आयोग द्वारा परीक्षा और विज्ञापन से जुड़ा अगला शेड्यूल जारी किया जाएगा।
लाखों बीएड और डीएलएड पास युवाओं के लिए सुनहरा अवसर
उत्तर प्रदेश के उन तमाम युवाओं के लिए यह भर्ती एक बहुत बड़ा अवसर लेकर आई है जो पिछले कई सालों से शिक्षक बनने की राह देख रहे थे। विशेषकर जूनियर कक्षाओं के लिए अध्यापन की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों में इस खबर के बाद से काफी उत्साह देखा जा रहा है। प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक जैसे प्रतिष्ठित पदों पर होने वाली इस भर्ती के लिए प्रतिस्पर्धा काफी तगड़ी होने की उम्मीद है, क्योंकि लंबे समय से इस स्तर पर बड़ी नियुक्तियां देखने को नहीं मिली हैं।
जैसे ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को यह प्रस्ताव ऑनलाइन प्राप्त होगा, आयोग की तरफ से परीक्षा की तारीखों, योग्यताओं, आवेदन की अंतिम तिथियों और परीक्षा के पैटर्न को लेकर आधिकारिक सूचना जारी की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने सभी शैक्षणिक दस्तावेजों को दुरुस्त रखें और विभाग की आगामी आधिकारिक घोषणाओं पर अपनी पैनी नजर बनाए रखें ताकि वे समय रहते अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकें।



