बगदाद/वाशिंगटन: द फ्रीलान्स की विशेष ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन डेस्क। मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। इराक की धरती से अमेरिकी सेना की पूर्ण और अंतिम वापसी ने पिछले एक दशक से अधिक समय से चले आ रहे सैन्य समीकरणों को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। यह घटनाक्रम न केवल खाड़ी देशों की सुरक्षा वास्तुकला को प्रभावित करता है, बल्कि वैश्विक महाशक्तियों की बदलती प्राथमिकताओं की भी गवाही देता है।
12 साल लंबे ISIS-रोधी अभियान का अंत
साल 2014 में जब इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने इराक और सीरिया के बड़े भूभाग पर कब्जा कर लिया था, तब अमेरिकी नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का गठन किया गया था। इस 12 साल लंबे सैन्य अभियान के दौरान हजारों सैनिक, भारी मात्रा में युद्ध सामग्री और अरबों डॉलर झोंके गए। आज इस अध्याय का औपचारिक समापन हो चुका है। अमेरिकी सेना के आखिरी दस्तों ने भी इराकी अडों को पूरी तरह से खाली कर दिया है।
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डोनाल्ड ट्रंप का तीखा बयान: 'नरक की महंगी यात्रा'
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में तीखा बयान दिया है। ट्रंप ने इस सैन्य अभियान को सीधे तौर पर 'नरक की एक महंगी और बेकार यात्रा' करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स के खरबों डॉलर इस युद्ध में झोंक दिए गए, जिसका रणनीतिक रिटर्न लगभग शून्य रहा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी घरेलू राजनीति में विदेशी युद्धों से अलगाववाद (Isolationism) की भावना फिर से जोर पकड़ रही है।
इराकी सुरक्षा बलों के सामने खड़ी नई चुनौतियां
द फ्रीलान्स के सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी सेना के हटने के बाद इराकी सेना और सुरक्षा बलों के सामने एक भारी शून्य पैदा हो गया है। हालांकि इराकी सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि उसके सुरक्षा बल देश की संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं, लेकिन खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ISIS के स्लीपर सेल अभी भी देश के कुछ हिस्सों में सक्रिय हैं। अमेरिकी एयर कवर और इंटेलिजेंस सपोर्ट के बिना आतंकवाद से निपटना बगदाद के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।
भू-राजनीतिक समीकरणों पर दूरगामी असर
इस अमेरिकी वापसी से मध्य पूर्व में क्षेत्रीय ताकतों जैसे ईरान, तुर्की और खाड़ी देशों के बीच प्रभाव की नई जंग शुरू होने की पूरी संभावना है। अमेरिका के पीछे हटने से वैक्यूम बन रहा है, जिसे भरने के लिए अन्य क्षेत्रीय और वैश्विक खिलाड़ी सक्रिय हो गए हैं। आने वाले महीनों में इस भू-राजनीतिक बदलाव के गहरे परिणाम पूरी दुनिया को देखने को मिल सकते हैं।
'यह केवल सैनिकों की वापसी नहीं है, बल्कि मध्य पूर्व में पश्चिमी हस्तक्षेप के एक पूरे युग का अंत है, जिसके परिणाम आने वाले दशकों तक महसूस किए जाएंगे।' - वरिष्ठ रणनीतिक विश्लेषक








