बगदाद/वाशिंगटन: 'द फ्रीलान्स' की विशेष ग्राउंड इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट। वैश्विक कूटनीति के पटल पर पिछले कुछ घंटों में जो घटनाक्रम तेजी से बदले हैं, उन्होंने न सिर्फ पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया के सामरिक समीकरणों को हिला कर रख दिया है। ईराक की सरजमीं पर दो दशकों से अधिक समय से जमे अमेरिकी डेरे अब समेट लिए गए हैं। ईराक से अमेरिकी सेना की आखिरी टुकड़ी की आधिकारिक विदाई के साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'आईएसआईएस (ISIS) पर हमारी निर्णायक जीत' करार दिया है। हालांकि, जमीनी हकीकत और खुफिया रिपोर्टें इस बयान के पीछे की एक बेहद जटिल और सुलगती हुई कहानी की ओर इशारा करती हैं।
ईराक से वापसी और ISIS का सच: क्या सचमुच खत्म हुआ आतंक का साया?
साल 2003 के आक्रमण से शुरू हुआ अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप आखिरकार ढाई दशक बाद एक ऐसे मोड़ पर आ पहुंचा है, जहां पेंटागन ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि आतंकवादी संगठन आईएसआईएस की रीढ़ पूरी तरह तोड़ दी गई है, और अमेरिकी सैनिकों का मिशन पूरा हो चुका है। लेकिन बगदाद और इरबिल के जमीनी हालात कुछ और ही बयां करते हैं। स्थानीय सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी सैन्य vacuum (शून्यता) का फायदा उठाने के लिए क्षेत्रीय ताकतें सक्रिय हो चुकी हैं। भले ही औपचारिक युद्ध समाप्त हो गया हो, लेकिन ईराक की आंतरिक सुरक्षा अब भी एक नाजुक दौर से गुजर रही है।
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ईरान की शर्तें खारिज: 'ट्रंप स्ट्रेट' का नया समुद्री नक्शा और युद्ध के मंडराते बादल
पश्चिम एशिया में तनाव का दायरा अब ईराक की सीमाओं से निकलकर रणनीतिक जलमार्गों तक फैल गया है। वाशिंगटन ने ईरान की तमाम शर्तों को सिरे से खारिज करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के विकल्प के रूप में एक नए समुद्री नक्शे 'ट्रंप स्ट्रेट' को जारी कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए यह एक बेहद संवेदनशील मोड़ है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद इस क्षेत्र में एक बार फिर भीषण बमबारी और सैन्य टकराव के संकेत मिल रहे हैं। ऊर्जा आपूर्ति मार्गों पर नियंत्रण को लेकर यह शीत युद्ध अब एक खुले संघर्ष में बदलता दिख रहा है।
शी जिनपिंग को दो टूक: 'ईरान की मदद से बचें' और एशिया में अमेरिकी प्रभाव
इस पूरे भू-राजनीतिक ड्रामे में चीन की भूमिका सबसे अहम होती जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को खुले तौर पर चेतावनी दी है कि बीजिंग को ईरान की किसी भी प्रकार की मदद करने से बचना चाहिए। दूसरी ओर, शी जिनपिंग ने भी वाशिंगटन को स्पष्ट संदेश दिया है कि एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव और प्रभुत्व को चुनौती न दी जाए। विशेष तौर पर ताइवान और जापान के मामलों पर चीन की चिंताएं और तीखी हो गई हैं। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में महाशक्तियों की यह तनातनी आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकती है।
यूरोप के गलियारों में खटास: ब्रिटेन और आयरलैंड के रिश्तों में ट्रंप का दखल
अमेरिकी विदेश नीति का असर अब अटलांटिक पार यूरोपीय देशों के आपसी रिश्तों पर भी दिखने लगा है। राष्ट्रपति ट्रंप के एक विवादास्पद बयान के बाद ब्रिटेन और आयरलैंड के बीच पारंपरिक रिश्तों में अचानक खटास आ गई है। ट्रंप की तीखी टिप्पणियों ने आयरिश सागर के दोनों किनारों पर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है, जिससे यूरोपीय संघ (EU) के भीतर भी चिंता की लहर दौड़ गई है।
निष्कर्ष और भविष्य का असर
'द फ्रीलान्स' के विश्लेषण के मुताबिक, ईराक से सेना की वापसी भले ही अमेरिका के लिए एक घरेलू राजनीतिक जीत की तरह पेश की जा रही हो, लेकिन इसके वैश्विक परिणाम दूरगामी होंगे। पश्चिम एशिया में नया समुद्री नक्शा खींचना, चीन को सीधी चेतावनी देना और यूरोपीय कूटनीति में दखल देना इस बात का प्रमाण है कि ट्रंप प्रशासन एक बार फिर आक्रामक और अप्रत्याशित विदेश नीति की राह पर चल पड़ा है। आने वाले हफ्ते वैश्विक शांति और आर्थिक बाजारों के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं।








