उत्तराखंड में नशे के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम
देवभूमि उत्तराखंड में युवाओं को बर्बादी के दलदल से बचाने के लिए राज्य सरकार ने अब अपराधियों और नशा तस्करों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपना लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के बाद प्रदेश भर में 'ड्रग फ्री उत्तराखंड' अभियान को एक नए स्तर पर ले जाया गया है। पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने मिलकर राज्य के भीतर और पड़ोसी राज्यों तक फैले ड्रग्स के इस काले नेटवर्क की जड़ों पर वार करना शुरू कर दिया है। सरकार का यह प्रयास सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसे एक बड़े सामाजिक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसमें आम जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जमीनी स्तर पर जनता का सहयोग नहीं मिलता, तब तक अपराध और नशे के अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगाना कठिन होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए धामी सरकार ने एक ऐसी नीति तैयार की है, जिससे लोग खुद आगे आकर पुलिस और प्रशासन की मदद करें। राज्य में तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है और जनता को सीधे तौर पर इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है।
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नशा तस्करों की सूचना देने पर मिलेगा 2.40 लाख रुपये तक का बंपर इनाम
इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकार ने नशा तस्करों की पुख्ता जानकारी देने वाले नागरिकों के लिए भारी-भरकम इनामी योजना का ऐलान किया है। योजना के नियमों के अनुसार, तस्करों और अवैध पदार्थों के बड़े जखीरे की सटीक सूचना देने वाले मुखबिरों या आम नागरिकों को 20 हजार रुपये से लेकर 2.40 लाख रुपये तक का नकद इनाम दिया जाएगा। यह राशि सूचना की गंभीरता, जब्द किए गए अवैध पदार्थों की मात्रा और नेटवर्क के खुलासे के आधार पर तय की जाएगी।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। अक्सर लोग अपनी सुरक्षा को लेकर डरते हैं और अपराधियों के खिलाफ गवाही देने या सूचना देने से बचते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए प्रशासन ने पूरी सुरक्षा और गोपनीयता का भरोसा दिया है, ताकि लोग बिना किसी डर के आगे आ सकें और पुलिस को तस्करों के ठिकानों तक पहुंचा सकें।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संकल्प: 'नशामुक्त भारत' की तर्ज पर आगे बढ़ रहा उत्तराखंड
इस पूरे अभियान की रूपरेखा तैयार करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई बार स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार देवभूमि की युवा पीढ़ी को इस अभिशाप से बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'नशामुक्त भारत' के दृष्टिकोण से प्रेरणा लेते हुए उत्तराखंड सरकार ने इस दिशा में चौतरफा रणनीति बनाई है।
"प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नशामुक्त भारत अभियान से प्रेरणा लेते हुए हमारी सरकार उत्तराखंड को पूरी तरह नशामुक्त बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। देवभूमि की पवित्रता और हमारे युवाओं का भविष्य बचाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है, और इसके लिए तस्करों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई जारी रहेगी।" — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ड्रग्स के छोटे सप्लायरों से लेकर इस अवैध कारोबार के अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय सिंडिकेट के सरगनाओं तक सभी को कानून के कटघरे में लाया जाए। संपत्ति जब्तीकरण की कार्रवाई भी तेजी से की जा रही है ताकि अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों को कुर्क किया जा सके।
स्कूलों और कॉलेजों में विशेष निगरानी, हॉस्टल और पीजी पर भी पैनी नजर
सिर्फ तस्करों पर शिकंजा कसना ही नहीं, बल्कि युवाओं को इस लत से दूर रखने के लिए शिक्षण संस्थानों में भी विशेष जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। राज्य के सभी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नियमित तौर पर कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे शिक्षण संस्थानों के आसपास के इलाकों, हॉस्टल और पीजी (पेइंग गेस्ट) आवासों की नियमित निगरानी रखें।
नए प्रवेश लेने वाले छात्रों की गतिविधियों पर नजर रखने और उनकी काउंसलिंग करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। कई संस्थानों में काउंसलर तैनात किए गए हैं जो छात्रों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को पहचानकर समय रहते उन्हें सही दिशा दिखा सकें। यदि कोई छात्र गलत संगति में पड़ता है, तो उसके अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन को तुरंत सूचित कर उपचार की व्यवस्था करने को कहा गया है।
पुनर्वास केंद्रों का विस्तार और हेल्पलाइन नंबर 1933 का हो रहा प्रचार
जो युवा पहले ही नशे के दलदल में फंस चुके हैं, उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने के लिए सरकार ने पुनर्वास केंद्रों (Rehabilitation Centres) के नेटवर्क को और मजबूत किया है। इन केंद्रों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि नशे कीत लत छोड़ चुके युवाओं को समाज में दोबारा सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल सके।
आम जनता से अपील की गई है कि यदि उन्हें अपने आसपास किसी भी व्यक्ति द्वारा नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त या तस्करी की जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 पर संपर्क करें। सरकार का मानना है कि जनता और पुलिस के बीच यह समन्वय उत्तराखंड को जल्द ही एक पूरी तरह नशामुक्त राज्य बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।







