देश के कई हिस्सों में मानसून की विदाई के बाद भी जलभराव और गंदगी की समस्याएं आम नागरिकों के लिए जी का जंजाल बनी हुई हैं। हाल ही में सामने आए ताजा मामलों में स्थानीय नागरिकों का गुस्सा प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली के खिलाफ फूट पड़ा है। बारिश का मौसम भले ही थम गया हो, लेकिन इसके पीछे छोड़ी गई मुश्किलें अब महामारी का रूप लेती नजर आ रही हैं। खासकर निचली बस्तियों और कॉलोनियों में स्थिति बद से बदतर हो गई है, जहां सड़कों पर जलभराव और चारों तरफ बिखरा कचरा लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन गया है।
जलभराव और कचरे के अंबार से बढ़ी लोगों की मुश्किलें
बारिश के थमने के कई दिन बीत जाने के बाद भी रिहायशी इलाकों की सड़कों और गलियों से पानी की निकासी नहीं हो पाई है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढه पानी से भरे हुए हैं, जिनमें गंदा पानी सड़ रहा है। इस गंदे पानी से उठने वाली बदबू ने आसपास के घरों में रहना मुहाल कर दिया है। स्थिति यह है कि लोगों का पैदल चलना तक दूभर हो गया है। स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को इस गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव की इस गंभीर समस्या के पीछे सीवर लाइनों की सही से सफाई न होना और नालियों का जाम होना मुख्य वजह है। हल्की सी बारिश में ही पूरा इलाका तालाब में तब्दील हो जाता है। इसके बाद पानी हफ्तों तक नहीं निकलता है, जिससे वह सड़ने लगता है। नागरिकों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागों के चक्कर काटे और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन कागजी आश्वासनों के अलावा उन्हें जमीन पर कोई राहत नहीं मिली है।
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डेंगू और मच्छरजनित बीमारियों का मंडराता साया
स्थानीय स्तर पर फैली इस गंदगी और जलभराव का सबसे खतरनाक पहलू स्वास्थ्य पर पड़ने वाला इसका प्रतिकूल प्रभाव है। जमा हुए गंदे पानी में मच्छरों का तेजी से पनपना शुरू हो गया है। शाम ढलते ही मच्छरों का ऐसा आतंक शुरू होता है कि लोग अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद करने को मजबूर हो जाते हैं। निवासियों में इस बात का भारी डर है कि यदि समय रहते स्थिति पर काबू नहीं पाया गया, तो इलाके में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियां पैर पसार सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ठहरा हुआ पानी मच्छरों का प्रजनन केंद्र बन जाता है। इस मौसम में जरा सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में इलाके में बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया है, जो चिंता का विषय है। इसके बावजूद नगर निगम की ओर से अभी तक फॉगिंग या एंटी-لارवा दवाओं का छिड़काव नहीं कराया गया है, जिससे लोगों में रोष व्याप्त है।
प्रशासनिक उदासीनता पर भड़के स्थानीय निवासी
मूलभूत सुविधाओं से वंचित इन इलाकों के लोगों का सब्र अब जवाब देने लगा है। नागरिकों का कहना है कि जब चुनाव का समय आता है, तो बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं और विकास के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। वोट मांगने के समय राजनेता और जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े आश्वासन देते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई भी झांकने तक नहीं आता है। लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार स्थानीय पार्षदों और अधिकारियों को अपनी समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ टालमटोल रवैया ही मिला।
"हमारे मोहल्ले में बारिश के बाद से ही जलभराव और गंदगी की विकट समस्या बनी हुई है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन नगर निगम के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। अगर जल्द ही सफाई और दवा का छिड़काव नहीं हुआ, तो हमें बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा।" — स्थानीय निवासी, पीड़ित क्षेत्र
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल
नागरिकों का यह भी आरोप है कि शहर के विकास के नाम पर केवल कागजी कोरम पूरा किया जा रहा है। करोड़ों रुपये के बजट के दावे किए जाते हैं, लेकिन मोहल्लों की गलियों में आज भी लोग नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। नियमित रूप से सफाई न होना, कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों का समय पर न आना और नालियों की समय पर डी-सिल्टिंग न होना इस लाचारी के मुख्य कारण हैं। जनता का टैक्स का पैसा आखिर कहां जा रहा है, यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।
स्थानीय आरडब्ल्यूए और प्रबुद्ध नागरिकों ने अब एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। उनका कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में जल निकासी की मुकम्मल व्यवस्था नहीं की जाती है और पूरे इलाके में व्यापक स्तर पर सफाई अभियान नहीं चलाया जाता है, तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
निष्कर्ष और आगे की राह
किसी भी शहर के समग्र विकास के लिए केवल बड़ी इमारतें या चौड़ी सड़कें ही काफी नहीं हैं, बल्कि हर एक मोहल्ले और कॉलोनी में बुनियादी सुविधाओं का सुचारू रूप से चलना अनिवार्य है। जलभराव और गंदगी जैसी समस्याएं सीधे तौर पर आम आदमी के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ी हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह तात्कालिक तौर पर त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रभावित इलाकों से पानी की निकासी कराए, युद्धस्तर पर फॉगिंग और सफाई अभियान चलाए, और भविष्य के लिए एक ठोस ड्रेनेज प्लान तैयार करे ताकि हर साल बारिश के मौसम में जनता को इस प्रकार की त्रासदियों का सामना न करना पड़े।





