पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा कदम, सरकारी जमीनों की होगी डिजिटल मैपिंग
पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक बड़े अभियान की तैयारी चल रही है। राज्य प्रशासन ने सरकारी स्वामित्व वाली संपत्तियों और जमीनों पर हो रहे बेहिसाब अवैध कब्जों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरकार की ओर से यह तय किया गया है कि राज्यभर में फैली तमाम सरकारी जमीनों का एक मुकम्मल सर्वे कराया जाए। इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य मकसद यह स्पष्ट करना है कि किस इलाके में कितनी जमीन पर अवैध कब्जा है और कितनी संपत्ति प्रशासनिक नियंत्रण में सुरक्षित अवस्था में मौजूद है।
राज्य के भूमि और भूमि राजस्व विभाग के अंतर्गत आने वाले पश्चिम बंगाल भूमि अभिलेख और सर्वेक्षण निदेशालय को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी की कमान सौंपी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, कई दशकों से सरकारी महकमों की जमीनें बिना किसी देखरेख के सूनी पड़ी थीं। इन खाली पड़ी जमीनों का फायदा उठाकर स्थानीय स्तर पर लोगों और विभिन्न संस्थानों ने धीरे-धीरे अपने अवैध ठिकाने बना लिए। अब प्रशासन इन सभी जमीनों को कानूनी रूप से मुक्त कराने के लिए अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाने में जुट गया है।
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अतिक्रमण की पहचान के लिए अत्याधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल
इस मेगा सर्वे को पूरी तरह पारदर्शी, सटीक और त्रुटिहीन बनाने के लिए सरकार ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। सर्वेक्षण प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से जमीन के एक-एक इंच की पैमाइश सैटेलाइट मैपिंग के जरिए बेहद सटीकता से की जा सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि पारंपरिक तरीकों की तुलना में यह तकनीक मानवीय त्रुटियों की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म कर देगी।
विभाग की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि सर्वे का यह काम किसी आम प्रक्रिया की तरह नहीं होगा, बल्कि इसके लिए पेशेवर और विशेषज्ञ एजेंसियों की मदद ली जाएगी। पश्चिम बंगाल भूमि अभिलेख और सर्वेक्षण निदेशालय ने इस कार्य को पूरा करने के लिए पहले ही रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी टेंडर जारी कर दिया है। इस टेंडर प्रक्रिया के जरिए उन एक्सपर्ट एजेंसियों का चयन किया जाएगा जो तय समय सीमा के भीतर इस तकनीकी काम को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें।
नई भूमि नीति के जरिए बड़े निवेशकों को आकर्षित करने की तैयारी
इस बड़े पैमाने पर चलाए जाने वाले सर्वे के पीछे सरकार की आर्थिक नीतियां और भविष्य का विजन भी काम कर रहा है। राज्य सरकार आने वाले समय में एक नई और आधुनिक भूमि नीति के आधार पर बड़े औद्योगिक निवेश को पश्चिम बंगाल की तरफ आकर्षित करना चाहती है। जानकारों का कहना है कि जब तक बड़े निवेशकों को एक साथ बड़ी और विवादमुक्त जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाएगी, तब तक राज्य में इंडस्ट्रियल ग्रोथ की रफ्तार को मनमुताबिक आयाम नहीं दिए जा सकते।
राज्य के औद्योगिक विकास के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा सरकारी जमीनों पर फैला हुआ अतिक्रमण है। जब उद्योगपतियों को भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू होती है, तब कई जगहों पर अवैध कब्जों के कारण कानूनी पेंच फंस जाते हैं। इसी अड़चन को हमेशा के लिए दूर करने के उद्देश्य से सरकार ने पहले ही जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने का यह बीड़ा उठाया है। नई नीति के तहत निवेशकों को पारदर्शी तरीके से जमीन मुहैया कराने में यह सर्वे मील का पत्थर साबित होगा।
जमीन खाली कराने के बाद बाउंड्री और स्थायी पिलर लगाने की योजना
सिर्फ जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराना ही प्रशासन के लिए चुनौती नहीं है, बल्कि उस पर दोबारा अवैध कब्जा न हो, यह सुनिश्चित करना भी अधिकारियों के लिए बड़ी परीक्षा होगी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भूमि राजस्व विभाग ने एक पुख्ता रणनीति बनाई है। सर्वे पूरा होने और अवैध कब्जाधारियों को बेदखल करने के तुरंत बाद उस जमीन की सीमा पर स्थायी खंभे या पिलर खड़े किए जाएंगे। इसके अलावा महत्वपूर्ण जमीनों की फेंसिंग और बाउंड्री वॉल बनाने का काम भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
"सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज संपत्तियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाना अब बेहद जरूरी हो गया है। सर्वे के बाद हमारी जमीनें सुरक्षित रहेंगी और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए साफ-सुथरा बैंक तैयार हो सकेगा।" — वरिष्ठ भूमि विभाग अधिकारी, पश्चिम बंगाल सरकार
अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में कई ऐसी शिकायतें मिली थीं कि जमीन खाली कराने के कुछ महीनों बाद लोग फिर से वहां काबिज हो जाते थे। इस बार प्रशासनिक सख्ती का स्तर काफी ऊंचा रहने वाला है ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एक कड़ा संदेश दिया जा सके। पिलर लगाने से जमीन की हदबंदी बिल्कुल स्पष्ट हो जाएगी और आम जनता को भी यह पता चल जाएगा कि कौन सी संपत्ति सरकारी दायरे में आती है।
छह महीने के भीतर इस विशाल महा-अभियान को पूरा करने का लक्ष्य
इतनी बड़ी भौगोलिक और प्रशासनिक सीमा वाले राज्य में इस तरह के व्यापक सर्वे को अंजाम देना आसान काम नहीं है। इसके बावजूद पश्चिम बंगाल सरकार ने इसके लिए बेहद सख्त समय सीमा निर्धारित की है। विभागीय योजना के मुताबिक, इस पूरे सर्वे अभियान को आगामी छह महीने के भीतर हर हाल में पूरा कर लिया जाना है। तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट तैयार कर राज्य शासन को सौंप दी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की विधिवत कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरी कवायद से उन लोगों की मुश्किलें जरूर बढ़ने वाली हैं जिन्होंने वर्षों से सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा जमा रखा है। प्रशासन के इस कड़े रुख से साफ जाहिर होता है कि आने वाले दिनों में अवैध अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बड़े स्तर पर बुलडोजर और कानूनी कार्रवाई देखने को मिल सकती है। आम नागरिकों से भी अपील की जा रही है कि वे किसी भी तरह के अवैध कब्जे से दूर रहें, अन्यथा उन्हें भारी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।








