जब बॉलीवुड के दिग्गज कॉमेडियन महमूद के सामने पहुंचे थे राजीव गांधी
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे अनसुने किस्से दबे हैं, जो आज भी लोगों को हैरान और रोमांचित कर देते हैं। ऐसा ही एक वाकया देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जीवन से जुड़ा हुआ है। राजनीति के गलियारों में अपनी अलग पहचान बनाने वाले राजीव गांधी अपने युवा दिनों में बेहद हैंडसम और आकर्षक व्यक्तित्व के मालिक थे। एक समय ऐसा भी आया था जब फिल्मी दुनिया के एक बड़े कलाकार ने उन्हें अपनी फिल्म का मुख्य अभिनेता बनाने का मन बना लिया था और इसके लिए उन्हें बाकायदा साइनिंग अमाउंट भी दे दिया गया था।
यह कहानी उस दौर की है जब अमिताभ बच्चन फिल्मी दुनिया में अपने पैर जमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। उन्हीं दिनों अमिताभ और राजीव गांधी की गहरी दोस्ती थी। दोनों अक्सर एक-साथ वक्त बिताते थे और अपने सपनों की दुनिया बुनते थे। किसी काम के सिलसिले में अमिताभ अपने उसी दौर के मित्र राजीव गांधी को लेकर मशहूर हास्य अभिनेता महमूद के पास पहुंचे थे। उस मुलाकात ने इतिहास के पन्नों में एक बेहद मजेदार और दिलचस्प अध्याय जोड़ दिया, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
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महमूद की पारखी नजर और राजीव गांधी का गजब का आकर्षण
जब राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन महमूद के सामने पहुंचे, तो महमूद की नजर सबसे पहले राजीव गांधी पर पड़ी। राजीव की लंबी कद-काठी, सादगी भरा अंदाज और उनका शांत व आकर्षक चेहरा देखकर महमूद पूरी तरह से प्रभावित हो गए। उस समय महमूद फिल्म इंडस्ट्री में एक स्थापित नाम थे और उनकी फिल्मों में काम करने के लिए नए कलाकार तरसते थे। राजीव को देखते ही महमूद के भीतर का फिल्मकार जाग उठा और उन्होंने तुरंत एक बड़ा फैसला ले लिया।
महमूद ने अमिताभ बच्चन की तरफ देखा और फिर राजीव गांधी की ओर इशारा करते हुए अपने करीबियों से कहा कि यह लड़का बेहद स्मार्ट है। उनका मानना था कि इस युवा लड़के के अंदर वो तमाम खूबियां हैं जो एक बड़े पर्दे का स्टार बनने के लिए जरूरी होती हैं। महमूद ने यहां तक कह दिया कि यह शख्स आगे चलकर बड़े से बड़े कलाकारों को भी पीछे छोड़ सकता है। उनकी इस बात से कमरे में मौजूद हर शख्स हैरान रह गया क्योंकि तब तक राजीव गांधी का राजनीति या फिल्मों से कोई लेना-देना नहीं था।
जेब से निकाले 5000 रुपये और थमा दिया साइनिंग अमाउंट
बात सिर्फ तारीफ तक ही सीमित नहीं रही। महमूद अपने फैसले के इतने पक्के थे कि उन्होंने तुरंत अपनी जेब में हाथ डाला और पांच हजार रुपये निकालकर सीधे राजीव गांधी के हाथों में रख दिए। उस दौर में पांच हजार रुपये की रकम बहुत बड़ी हुआ करती थी और किसी नए कलाकार को बिना किसी स्क्रीन टेस्ट के सीधे साइनिंग अमाउंट दे देना महमूद के बेबाक अंदाज को साफ बयां करता है। उन्होंने अपने भाई अनवर से तुरंत कहा कि इस नए कलाकार से कहो कि वह परसों से शूटिंग के सेट पर पहुंच जाए।
महमूद के इस अप्रत्याशित कदम से वहां मौजूद सभी लोग अवाक रह गए। अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी दोनों ही समझ नहीं पा रहे थे कि अचानक यह क्या हो गया। दोनों दोस्त एक-दूसरे का मुंह देखने लगे। महमूद अपनी धुन में मग्न थे और उन्हें लग रहा था कि उन्हें अपनी फिल्म के लिए एक बेहतरीन और नया चेहरा मिल चुका है जो बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा सकता है।
जब खुला राज तो महमूद के उड़ गए होश
माहौल में कुछ पलों के लिए अजीब सी खामोशी छा गई, जिसे महमूद के भाई ने तोड़ा। उन्होंने महमूद के कान में फुसफुसाते हुए बताया कि भाई, आप जिसे साधारण स्ट्रगलिंग एक्टर समझ रहे हैं, वह देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सुपुत्र राजीव गांधी हैं। यह सुनते ही महमूद के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें अपनी इस बड़ी भूल का अहसास हुआ कि उन्होंने देश की सबसे ताकतवर राजनीतिक शख्सियत के बेटे को फिल्म का ऑफर दे दिया है और पैसे भी थमा दिए हैं।
अपनी इस गलती पर महमूद तुरंत सकपका गए और बिना एक पल गंवाए उन्होंने वे पांच हजार रुपये चुपचाप वापस अपनी जेब में रख लिए। इस पूरे घटनाक्रम को देखकर राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन अपनी हंसी रोक नहीं पाए और कमरे में ठहाके गूंज उठे। महमूद ने भी माहौल की नजाकत को भांपते हुए इस मजाक में अपनी हंसी मिला ली।
किस्मत के खेल और सिनेमा का दूसरा पहलू
भले ही राजीव गांधी ने कभी अभिनय की दुनिया में कदम नहीं रखा और उनका रास्ता देश की बागडोर संभालने की तरफ मुड़ गया, लेकिन उनके दोस्त अमिताभ बच्चन के लिए वह दौर बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ। महमूद ने उसी दौरान अमिताभ बच्चन की काबिलियत को पहचाना और उन्हें फिल्म 'बॉम्बे टू गोवा' में मुख्य भूमिका दिलाई। यह फिल्म अमिताभ के डूबते करियर के लिए एक संजीवनी साबित हुई और यहीं से बॉलीवुड को 'एंग्री यंग मैन' और सदी का महानायक मिल गया।
"अगर महमूद साहब की वह गलतफहमी कुछ देर और कायम रहती, तो शायद भारतीय राजनीति का इतिहास कुछ और होता और हमें एक प्रधानमंत्री की जगह एक नया फिल्मी सितारा मिल चुका होता। हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।" — फिल्मी इतिहासकार एवं समीक्षक
आज भी जब बॉलीवुड के गलियारों में इस अनसुने किस्से को याद किया जाता है, तो लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। यह इस बात का सबूत है कि किस तरह संयोग और किस्मत जिंदगी के हर मोड़ पर एक नया और दिलचस्प रास्ता तैयार करते हैं। राजीव गांधी की वह मुलाकात आज भी सिनेमा प्रेमियों के बीच एक बेहद यादगार और अनमोल कहानी बनी हुई है।







