गोरखपुर से शुरू हुआ युवाओं का कारवां अब राजधानी लखनऊ की ओर
देश के सबसे बड़े सूबे में इन दिनों युवाओं की नाराजगी और उनकी उम्मीदों का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, रोजगार के सीमित अवसर और सरकारी नौकरियों में आने वाली अड़चनों के खिलाफ युवाओं ने अब मुखर होना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में जस्टिस मोर्चा के बैनर तले निकाली जा रही विशेष यात्रा इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। ऐतिहासिक चौरी चौरा की पावन भूमि से आरंभ हुई यह मुहिम अपने तय सफर को पूरा करते हुए अब अंतिम चरण की तरफ बढ़ रही है। इस यात्रा का मुख्य मकसद उन तमाम सुलगते सवालों को सतह पर लाना है जिनसे आज की युवा पीढ़ी सीधा जूझ रही है।
बीते कई हफ्तों से यह कारवां प्रदेश के अलग-अलग ग्रामीण और शहरी इलाकों से गुजर रहा है। इस दौरान यात्रा में शामिल युवाओं ने केवल अपनी बात रखने के बजाय जमीनी स्तर पर जाकर आम छात्रों, बेरोजगार नौजवानों और स्थानीय नागरिकों की परेशानियों को सुना है। रास्ते में पड़ने वाले तमाम चौराहों, बाजारों और शिक्षण संस्थानों के इर्द-गिर्द छोटे-छोटे संवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। इन आयोजनों के जरिए युवाओं ने एक साझा मंच तैयार किया है जहां वे अपनी पढ़ाई, डिग्री की उपयोगिता और प्रतियोगी परीक्षाओं की लंबी खींचतान पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं।
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विभिन्न जिलों से गुजरते हुए जनसंवाद और नुक्कड़ सभाओं का दौर
अपनी तय यात्रा के दौरान यह कारवां जब एक खास जिले के विभिन्न पड़ावों से गुजरा, तो वहां का माहौल पूरी तरह से राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं से घिर गया। स्थानीय स्तर पर युवाओं की इस टोली का स्वागत भी हुआ और लोगों ने बढ़-चढ़कर अपनी समस्याएं साझा कीं। यात्रा के दौरान आने वाले प्रमुख बाजारों में नुक्कड़ सभाओं का आयोजन किया गया, जहां वक्ताओं ने देश की शिक्षा नीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। स्थानीय लोगों ने भी इन सभाओं में खुलकर हिस्सा लिया और बताया कि कैसे आज का पढ़ा-लिखा युवा रोजगार की तलाश में भटकने को मजबूर है।
इन नुक्कड़ सभाओं में मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने और समय पर परिणाम न आने से किस प्रकार युवाओं का मनोबल टूट रहा है। वक्ताओं का कहना था कि सरकारी संस्थानों की स्थिति सुधरने के बजाय लगातार कमजोर होती जा रही है, जिसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग के उन बच्चों पर पड़ रहा है जो महंगे संस्थानों में पढ़ाई का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर कस्बों तक युवाओं ने एक सुर में इन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की मांग उठाई है।
भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और समान अवसर की सबसे बड़ी मांग
आज के युवा वर्ग के सामने सबसे बड़ा संकट रोजगार का है और उससे भी बड़ा संकट उस रोजगार को पाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। जब कोई छात्र वर्षों तक कड़ी मेहनत करके किसी परीक्षा की तैयारी करता है और अंत में पेपर लीक या भ्रष्टाचार की भेंट उसकी मेहनत चढ़ जाती है, तो उसका मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से भारी नुकसान होता है। इस यात्रा के दौरान यही दर्द सबसे प्रमुखता से उभर कर सामने आया है। युवाओं की मांग है कि देश और प्रदेश स्तर पर होने वाली सभी भर्तियों में पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए ताकि हर योग्य उम्मीदवार को उसका हक मिल सके।
समान अवसर के सवाल को लेकर भी इस मुहिम में तीखी आवाज उठाई गई है। जानकारों का मानना है कि जब तक शिक्षा प्रणाली में सबको एक समान और उच्च गुणवत्ता वाली शुरुआती शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक उच्च स्तर पर मुकाबला करना पिछड़े और गरीब वर्ग के लिए असंभव बना रहेगा। यात्रा में शामिल प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि सरकार को नीतिगत स्तर पर ऐसे कड़े कदम उठाने होंगे जिससे अमीर और गरीब की खाई शिक्षा के क्षेत्र में कम हो सके और सबको आगे बढ़ने के बराबर मौके मिल सकें।
गांधी जयंती पर लखनऊ में होगा भव्य समापन और महापंचायत
यह लंबी यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर अग्रसर है। आयोजकों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा अभियान आगामी दो अक्टूबर यानी महात्मा गांधी की जयंती के पावन अवसर पर राजधानी लखनऊ में समाप्त होगा। लखनऊ के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के पास एक विशाल जनसुनवाई और सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस ऐतिहासिक स्थल पर देश भर के विभिन्न राज्यों से आने वाले छात्र आंदोलनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेंगे। इस महापंचायत में आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा और सरकार को एक मांग पत्र सौंपा जाएगा।
राजधानी में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन भी सतर्क है और युवा संगठनों में भी भारी उत्साह देखा जा रहा है। देश भर से आने वाले युवा अपनी-अपनी जगहों की समस्याओं का लेखा-जोखा इस मंच पर रखेंगे। जानकारों का मानना है कि यह आयोजन आने वाले समय में रोजगार और शिक्षा के मुद्दों पर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक दबाव बनाने का काम कर सकता है।
युवाओं का संकल्प: अधिकारों के लिए संघर्ष रहेगा जारी
इस पूरी यात्रा के दौरान जिन युवाओं और कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक करके इस मुहिम को आगे बढ़ाया है, उनका हौसला बुलंद है। उनका साफ कहना है कि यह केवल एक बार की यात्रा नहीं है, बल्कि यह एक लंबी वैचारिक और सामाजिक लड़ाई की शुरुआत है। जब तक देश के हर नौजवान को उसकी योग्यता के अनुसार उचित रोजगार और सम्मानजनक जीवन नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह संघर्ष किसी न किसी रूप में जारी रहेगा। स्थानीय नागरिकों का भी भरपूर समर्थन इस बात का गवाह है कि समाज के भीतर अब बदलाव की एक गहरी और मजबूत मांग सुलग रही है।
"हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष या दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था के खिलाफ है जो हमारी योग्यता और भविष्य को निगल रही है। शिक्षा और रोजगार हर नौजवान का मौलिक अधिकार है और इसे भीख में नहीं, हक के रूप में लिया जाएगा।" — छात्र प्रतिनिधि, जस्टिस मोर्चा
निष्कर्ष के तौर पर देखा जाए तो यह जेन जी कनेक्ट यात्रा केवल कुछ युवाओं का पैदल चलना मात्र नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज के उस सबसे बड़े वर्ग की सुलगती सुई है जो अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। आने वाले दिनों में लखनऊ में होने वाला यह महासम्मेलन तय करेगा कि नीति-निर्माता युवाओं की इन जायज मांगों पर कितना और कब तक गंभीर रुख अपनाते हैं।





