बिहार के सुपौल जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां कोसी नदी के उग्र रूप ने एक बार फिर जिंदगी को लीलने की कोशिश की है। नदी के तेज बहाव के बीच लकड़ी निकालने गए एक युवक के डूबने की खबर से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया और फौरन राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। हालांकि, घंटों बीत जाने के बाद भी युवक का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे परिजनों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
सुबह-सवेरे नदी किनारे उ उठी आपदा, लकड़ी खींचने के दौरान फिसला पैर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी दुर्घटना सुबह के वक्त हुई जब ग्रामीण अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे। नदी में बहकर आ रही लकड़ी को पकड़ने के चक्कर में एक स्थानीय युवक पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गया। चश्मदीदों के मुताबिक, पानी का बहाव इतना तेज था कि संभलने का मौका तक नहीं मिला और पलक झपकते ही युवक गहरे पानी में ओझल हो गया। नदी के इस खतरनाक रूप को देखकर आसपास मौजूद लोग सन्न रह गए और मदद के लिए चिल्लाने लगे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
घटना की जानकारी फैलते ही घटनास्थल पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। ठंड और सुबह के वक्त इस तरह के हादसों से इलाके में डर का माहौल बन गया है। कोसी नदी का यह इलाका पहले भी कई बार अपनी विभीषिका के लिए जाना जाता रहा है, जहां जरा सी लापरवाही भारी पड़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी में लकड़ी या अन्य सामग्रियां बहकर आती हैं, जिन्हें पकड़ने के फेर में अक्सर ग्रामीण अनजाने में बड़े खतरे मोल ले लेते हैं।
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लापता युवक की पहचान, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
हादसे का शिकार हुआ युवक स्थानीय इलाके का ही रहने वाला बताया जा रहा है, जो अपने परिवार का इकलौता सहारा था। इस दुर्घटना के बाद से घर में कोहराम मचा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के सदस्यों को अब तक यकीन नहीं हो रहा है कि सुबह-सवेरे हंसता-खेलता घर का चिराग इस तरह नदी की लहरों में खो गया। आसपास के पड़ोसी और रिश्तेदार शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे हैं, लेकिन किसी के पास भी इस दर्द का कोई मरहम नहीं है।
लापता युवक के एक छोटा बच्चा भी है, जिसके सिर से पिता का साया उठने की आशंका ने लोगों के दिलों को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की है और प्रशासनिक अधिकारियों से खोजबीन तेज करने की अपील की है ताकि जल्द से जल्द कोई ठोस सुराग हाथ लग सके।
प्रशासनिक अमला और गोताखोरों की टीम तलाश में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। फौरन हरकत में आते हुए पुलिस बल को मौके पर भेजा गया और स्थानीय गोताखोरों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। नदी का बहाव तेज होने के कारण गोताखोरों को भी तलाश अभियान चलाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। मोटरबोट और अन्य जरूरी उपकरणों की मदद से नदी के चप्पे-चप्पे को खंगाला जा रहा है, ताकि युवक का कुछ पता चल सके।
"घटना की जानकारी मिलते ही हमारी टीम मौके पर पहुंच गई थी। गोताखोरों की मदद से नदी में लगातार खोजबीन जारी है। पानी का बहाव तेज होने के कारण थोड़ी परेशानी आ रही है, लेकिन हम हरसंभव प्रयास कर रहे हैं कि जल्द से जल्द नतीजा सामने आए।"— स्थानीय पुलिस अधिकारी
प्रशासन की ओर से आसपास के अन्य थानों और नदी के निचले इलाकों के गांवों को भी सतर्क कर दिया गया है ताकि यदि बहकर शव या कोई अन्य संकेत मिलता है तो तुरंत सूचित किया जा सके। कोसी के इस विकराल रूप को देखकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं कि नदी किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते हैं।
कोसी नदी के खतरों और स्थानीय लोगों की मजबूरी
बिहार का कोसी इलाका हर साल बाढ़ और कटाव के साथ-साथ ऐसे हादसों का गवाह बनता रहता है। नदी के बहाव में बहकर आने वाली लकड़ी और अन्य चीजों को इकट्ठा करना कई गरीब परिवारों के लिए मजबूरी भी होती है, जिससे वे अपनी गुजर-बसर करते हैं। हालांकि, यह जान जोखिम में डालने वाला काम साबित होता है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार लोगों से अपील करता रहता है कि वे उफनती या तेज बहाव वाली नदियों के करीब न जाएं, लेकिन कई बार आर्थिक तंगी और हालात लोगों को ऐसा जोखिम उठाने पर मजबूर कर देते हैं।
इस ताज़ा हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि नदी के पास ज़रा सी असावधानी जानलेवा साबित हो सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन के रेस्क्यू अभियान में कब तक सफलता मिलती है और पीड़ित परिवार को इस अनहोनी से किस प्रकार राहत मिल पाती है।




