नई दिल्ली/लखनऊ — उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के भीतर चल रहा घमासान अब राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंच गया है। पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और दलित नेत्री ममता चौधरी के बीच हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस गरमागरम विवाद के बाद पार्टी आलाकमान ने अजय राय को तुरंत दिल्ली तलब कर लिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी खुद इस पूरे मामले में दखल दे रहे हैं और दोनों पक्षों से बात कर रहे हैं। इस विवाद ने राज्य इकाई में चल रही अंदरूनी खींचतान को एक बार फिर से बेनकाब कर दिया है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पार्टी कार्यालय में 'कौन अध्यक्ष' के सवाल को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। ममता चौधरी और अजय राय के समर्थकों के बीच तीखी झड़प हुई और बात हाथापाई तक पहुंच गई। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ जिसमें तीखी बयानबाजी साफ सुनी जा सकती है। ममता चौधरी ने अजय राय के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि उनके साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। इस घटना के बाद से ही उत्तर प्रदेश कांग्रेस के भीतर दलित नेताओं और सवर्ण नेतृत्व के बीच की खाई गहरी होती दिखाई दे रही है।
पाँच सदस्यों की टीम करेगी पूरे मामले की जांच
विवाद के तूल पकड़ने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने मामले की गंभीरता को समझते हुए एक बड़ी कार्रवाई की है। ममता चौधरी और अजय राय के बीच हुए इस पंगे की गहराई से जांच के लिए पांच सदस्यों की एक विशेष टीम का गठन किया गया है। यह जांच समिति दोनों पक्षों से मिलकर सारे तथ्य जुटाएगी और अपनी रिपोर्ट सीधे केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेगी। पार्टी का मानना है कि इस तरह की अनुशासनात्मक घटनाएं आगामी राजनीतिक रणनीतियों को नुकसान पहुंचा रही हैं। जांच टीम के सदस्यों को जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि समय रहते डैमेज कंट्रोल किया जा सके।
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के साथ चल रहे गठबंधन और आंतरिक बयानबाजी ने स्थिति को और उलझा दिया है। कांग्रेस कार्यालय में हुई मारपीट की घटना पर पार्टी नेताओं का कहना है कि कार्यकर्ता कभी-कभी जोश में आकर गलती कर बैठते हैं। सपा के साथ गठबंधन को लेकर भी पार्टी के भीतर अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। नेताओं का साफ कहना है कि सपा के साथ गठबंधन किसी भी कीमत पर आत्मसमर्पण जैसा नहीं होगा और कांग्रेस अपनी जमीन मजबूत करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। लेकिन इन बयानों के बीच आपसी कलह ने पार्टी की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं।
क्या कांग्रेस छोड़कर दूसरे दल में शामिल होंगे अजय राय?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या अजय राय कांग्रेस पार्टी का हाथ छोड़ सकते हैं। उनके करीबी सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के संकेतों के मुताबिक अजय राय मौजूदा हालात से काफी नाराज चल रहे हैं। प्रदेश इकाई में लगातार घटते दखल और दलित नेता के साथ हुए विवाद के बाद से उनके पार्टी छोड़ने के कयासों को हवा मिल गई है। हालांकि अजय राय की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है लेकिन उनके तेवर से साफ है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक भूचाल आ सकता है।
जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच इस विवाद को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की गुटबाजी से पार्टी का जनाधार कमजोर होता है और जनता के बीच गलत संदेश जाता है। कांग्रेस के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है क्योंकि पार्टी उत्तर प्रदेश में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में नेताओं की आपसी खींचतान और बगावत के सुर पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं।
दिल्ली दरबार में तय होगा अजय राय का अगला राजनीतिक कदम
अब सबकी निगाहें दिल्ली में राहुल गांधी और अजय राय के बीच होने वाली बैठक पर टिकी हुई हैं। इस बैठक के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि अजय राय कांग्रेस पार्टी में बने रहेंगे या फिर कोई नया राजनीतिक रास्ता चुनेंगे। ममता चौधरी विवाद के बाद दलित समुदाय में भी नाराजगी का माहौल है जिसे शांत करना कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई नया अपडेट आएगा, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।







