नई दिल्ली की सड़कों पर रफ्तार को पंख देने के दावे के साथ शुरू हुआ बारापुल्ला फेज-3 परियोजना का महत्वाकांक्षी गलियारा अपने उद्घाटन के पहले ही दिन दावों और वादों के बीच उलझता नजर आया। 'द फ्रीलान्स' की टीम जब ज़मीनी हकीकत टटोलने मौके पर पहुँची, तो नजारा प्रशासनिक दावों के बिल्कुल उलट था। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा उद्घाटन किए जाने के अगले ही दिन इस बहुप्रतीक्षित फ्लाईओवर पर वाहनों का पहिया इस तरह थमा कि 15 मिनट का सामान्य सफर तय करने में लोगों को डेढ़ से दो घंटे का समय लग गया।
शुरुआती दिन और 4 किलोमीटर लंबा जाम
जैसे ही सूरज चढ़ा, वैसे ही बारापुल्ला फेज-3 पर वाहनों का रेला उमड़ पड़ा। स्थिति यह हो गई कि फ्लाईओवर पर लगभग 3 से 4 किलोमीटर लंबा महा-जाम लग गया। गाड़ियां रेंग-रेंग कर आगे बढ़ रही थीं। हालांकि अधिकारियों ने जाम से निपटने के लिए कॉरिडोर की दूसरी लेन भी खोल दी थी, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों को किसी प्रकार की राहत मिलती नहीं दिखी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अब यातायात पुलिस क्लोवरलीफ को बंद करने जैसी आपातकालीन योजनाओं पर विचार कर रही है ताकि ट्रैफिक के इस दबाव को कम किया जा सके।
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डीएनडी पर दबाव घटा, लेकिन नए गलियारे पर बढ़ी मुसीबत
हमारी ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इस नए फेज-3 के शुरू होने से नोएडा और मयूर विहार की तरफ से आने वाले वाहनों के लिए डीएनडी (Delhi-Noida Direct) फ्लाईवे पर निश्चित रूप से दबाव कुछ कम हुआ है। सुबह के वक्त जहां भारी जाम ने रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया था, वहीं शाम ढलते-ढलते ट्रैफिक की तस्वीर में कुछ बदलाव जरूर देखा गया। इसके बावजूद, फ्लाईओवर के डिजाइन, निकास बिंदुओं (Exit Points) और क्षमता से अधिक वाहनों के एक साथ आ जाने के कारण ट्रैफिक बॉटलनेक की गंभीर समस्या लगातार बनी हुई है।
यात्रियों का गुस्सा और प्रशासनिक तैयारियां
उद्घाटन की भव्यता के तुरंत बाद जमीनी स्तर पर फैली इस अव्यवस्था ने दैनिक यात्रियों को गुस्से में ला खड़ा किया है। सोशल मीडिया पर भी रफ्तार पर लगे इस 'ब्रेक' के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि बिना मुकम्मल ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लानिंग के इतनी बड़ी परियोजना को खोल देना जल्दबाजी का नतीजा है।
भविष्य का असर और सुधार की गुंजाइश
यह परियोजना दक्षिण दिल्ली और पूर्वी दिल्ली के बीच की दूरी को कम करने के लिए बेहद अहम है, लेकिन यदि शुरुआती दिनों की तरह ही ट्रैफिक प्रबंधन लाचार रहा, तो यह समय बचाने के बजाय लोगों के लिए रोजाना की मानसिक प्रताड़ना बन जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन को तुरंत प्रभाव से फीडर सड़कों और जंक्शनों पर पुलिस बल की तैनाती बढ़ानी होगी और क्लोवरलीफ डिजाइन में तकनीकी सुधार करने होंगे ताकि इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर का असली लाभ जनता तक पहुंच सके।








