कोलकाता/नई दिल्ली: 'द फ्रीलान्स' की विशेष ऑन-द-ग्राउंड पड़ताल के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी से उठने वाला मौसमी तंत्र एक बार फिर भारतीय उपमहाद्वीप के बड़े हिस्से पर कहर बरपाने की तैयारी में है। पिछले कुछ घंटों से बंगाल की खाड़ी में सक्रिय साइक्लोनिक हवाओं ने मौसम वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है। हमारी टीम द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, इस चक्रवातीय गतिविधि का असर उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल समेत देश के कम से कम 22 से 25 राज्यों में साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।
समुद्र में सुलगता नया चक्रवातीय तंत्र
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के शुरुआती संकेतों और हमारे मैदानी इनपुट बताते हैं कि बंगाल की खाड़ी के गर्म पानी ने एक मजबूत साइक्लोनिक सर्कुलेशन को जन्म दिया है। यह तंत्र तेजी से उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। हवा की रफ्तार 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा आंकी गई है, जो अपने साथ भारी मानसूनी नमी लेकर आ रही है। समुद्र की इस हलचल ने तटीय इलाकों से लेकर मैदानी राज्यों तक खतरे की घंटी बजा दी है।
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दुर्गा पूजा से पहले पश्चिम बंगाल में बदला मिजाज
पूर्वी भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सव 'दुर्गा पूजा' की तैयारियां इस समय अपने चरम पर हैं, लेकिन बंगाल की खाड़ी से उठ रहे इस सिस्टम ने पंडाल निर्माताओं और आयोजकों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पर्व के ठीक मुहाने पर राज्य के कई जिलों में झमाझम बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। कोलकाता और आसपास के तटीय जिलों में आसमान पर काले बादलों का डेरा है और प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर आ गया है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में कमजोर पड़ता सिस्टम, फिर भी जोखिम बरकरार
हमारी फील्ड रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में बंगाल की खाड़ी से आया यह तंत्र अब थोड़ा कमजोर पड़ता दिख रहा है, जिसके चलते बारिश के दायरे में कुछ कमी आने का अनुमान है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि तंत्र के कमजोर होने के बावजूद इसका असर पूरी तरह टला नहीं है। अचानक होने वाली बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) ग्रामीण इलाकों और किसानों के लिए अभी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
देशभर में 25 राज्यों तक फैला तबाही का दायरा
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से लेकर दक्षिण और पूर्वोत्तर के राज्यों तक, इस मौसमी उथल-पुथल का दायरा बेहद व्यापक है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 25 राज्यों में इस चक्रवातीय प्रभाव के कारण छिटपुट से लेकर भारी बारिश का तांडव देखने को मिल सकता है। यातायात, कृषि और सामान्य जनजीवन पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
भविष्य का असर और प्रशासनिक तैयारियां
'द फ्रीलान्स' की इस पड़ताल का निष्कर्ष यह है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में बंगाल की खाड़ी में बनने वाले ऐसे अचानक और तीव्र चक्रवात मानसून के विदाई सत्र को बेहद खतरनाक बना रहे हैं। आपदा प्रबंधन इकाइयों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। हमारी टीम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे-जैसे नए अपडेट सामने आएंगे, हम आपको जमीनी हकीकत से रूबरू कराते रहेंगे।








