बंगाल की खाड़ी में बना नया वेदर सिस्टम, तटीय इलाकों में बढ़ाई चिंता
देश के कई हिस्सों में मानसून की विदाई का समय नजदीक आ रहा है, लेकिन बंगाल की खाड़ी में बना नया मौसम तंत्र एक बार फिर जोरदार बारिश का संकेत दे रहा है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ कम दबाव का क्षेत्र अब तेजी से मजबूत हो रहा है। इसके असर से देश के पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान भारी बारिश का नया दौर शुरू होने की पूरी संभावना है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साफ किया है कि इस चक्रवाती गतिविधि के कारण हवा की रफ्तार काफी तेज रहेगी और तटीय क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
समुद्र के ऊपर बन रही इस मौसमी हलचल का असर केवल तटीय राज्यों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका दायरा उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक फैलने का अनुमान है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सिस्टम के प्रभाव से नमी वाली हवाएं लगातार देश के अंदरूनी हिस्सों की तरफ बढ़ रही हैं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी और बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा होंगी।
अंडमान सागर और उससे लगे पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में हवाओं का रुख तेजी से बदल रहा है। यहां हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इसके अलावा पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के पास हवा की गति 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक होने का अनुमान जताया गया है, जो कि नौवहन और मछुआरों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
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उत्तर प्रदेश में बदलेगा मौसम का मिजाज, इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
बंगाल की खाड़ी में बन रहे इस शक्तिशाली वेदर सिस्टम का सीधा असर उत्तर प्रदेश के मौसम पर भी देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 24 सितंबर के बाद पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में अचानक मौसम करवट लेगा। कई इलाकों में झमाझम बारिश के साथ आकाशीय बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने के आसार हैं।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभागों को भी संभावित बारिश के मद्देनजर सतर्क कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समय अच्छी बारिश होती है, तो यह फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, हालांकि अत्यधिक भारी बारिश से जलभराव की समस्या भी पैदा हो सकती है।
राज्य के जिन प्रमुख जिलों में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है, उनमें आगरा, अलीगढ़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, कानपुर, उन्नाव, लखनऊ, गोंडा, बहराइच, सीतापुर, हरदोई, मिर्जापुर, वाराणसी, देवरिया, बलिया, आंबेडकर नगर, अयोध्या और बाराबंकी शामिल हैं। इन सभी जगहों पर स्थानीय प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटों पर हाई अलर्ट, मछुआरों के लिए सख्त चेतावनी
कम दबाव के इस क्षेत्र के 23 सितंबर के आसपास दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट के पास पहुंचने की प्रबल संभावना है। इसके प्रभाव से ओडिशा के कई हिस्सों में बहुत भारी बारिश और विनाशकारी हवाएं चल सकती हैं। राज्य सरकारों ने संभावित आपदा से निपटने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना तैयार की जा रही है।
"समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों और तेज हवाओं को देखते हुए किसी भी प्रकार की लापरवाही भारी पड़ सकती है। हमने तटीय इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है।"— आपदा प्रबंधन अधिकारी, ओडिशा
मौसम विभाग की सख्त चेतावनी के बाद उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों के पास मछुआरों के समुद्र में जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने अपील की है कि कोई भी मछुआर समुदाय का व्यक्ति अगले कुछ दिनों तक गहरे समुद्र में न उतरे ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
महाराष्ट्र में भी फिर सक्रिय होगा मानसून, विदर्भ और मराठवाड़ा में बरसेंगे बदरा
आईएमडी के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, सितंबर महीने के अंतिम सप्ताह यानी 25 से 28 सितंबर के बीच महाराष्ट्र के कई हिस्सों में एक बार फिर मानसूनी बारिश का दौर लौट सकता है। खासकर विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र में कुछ स्थानों पर तेज से बहुत तेज बारिश होने की पूरी संभावना है। राज्य के अन्य जिलों में भी छिटपुट से लेकर मध्यम बारिश हो सकती है।
महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से कम हुई बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई थी, लेकिन इस नए सिस्टम से फसलों को जीवनदान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, शहरी क्षेत्रों में जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से निपटने के लिए स्थानीय निकायों को भी अपनी तैयारी दुरुस्त रखने को कहा गया है ताकि आम जनता को असुविधा का सामना न करना पड़े।
राजस्थान से मानसून की विदाई शुरू, शुष्क हवाओं ने पकड़ी रफ्तार
एक तरफ जहां देश के कई हिस्सों में बारिश का नया दौर शुरू हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया विधिवत शुरू हो चुकी है। आमतौर पर पश्चिमी राजस्थान से मानसून के लौटने की सामान्य तिथि 17 सितंबर मानी जाती है, लेकिन इस बार इसमें हल्की देरी देखने को मिली है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान के ऊपर एक विपरीत चक्रवातीय परिसंचरण विकसित हो गया है, जिसके कारण पिछले कई दिनों से इस क्षेत्र में मौसम पूरी तरह शुष्क बना हुआ है। उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों और वायुमंडलीय नमी में आई भारी कमी से यह साफ हो गया है कि देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से से मानसून अब विदा हो रहा है और सर्दियों के आने से पहले मौसम में बदलाव का दौर शुरू हो चुका है।









