मातोश्री पहुंचे दिशा सालियान के पिता, भेजा 500 करोड़ का मानहानि नोटिस
दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व प्रबंधक दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर से महाराष्ट्र की सियासत के केंद्र में आ गया है। दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान शनिवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे के आवास 'मातोश्री' पहुंचे। उन्होंने शिवसेना (UBT) के युवा नेता और विधायक आदित्य ठाकरे को 500 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस सौंपा है।
शिवसेना (UBT) के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार, मातोश्री पर पहुंचे सतीश सालियान से ठाकरे के वकीलों ने कानूनी नोटिस स्वीकार किया। इस घटना के बाद से राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है और दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी का दौर तेज हो गया है।
सतीश सालियान ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि विधायक आदित्य ठाकरे ने सार्वजनिक रूप से उनकी और उनके परिवार की मानहानि की है, जिसके चलते उन्हें यह कानूनी कदम उठाना पड़ा है। हालांकि, इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और राजनीतिक दलों आमने-सामने आ गए हैं।
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संजय राउत का बड़ा हमला: 'नितेश राणे और बीजेपी कर रही है कठपुतली का खेल'
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता संजय राउत ने तीखा हमला बोला है। राउत ने सीधे तौर पर बीजेपी नेता नारायण राणे के परिवार, विशेषकर महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में सक्रिय नेताओं पर निशाना साधा है। संजय राउत का आरोप है कि दिशा सालियान के पिता को कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए 'कठपुतली' की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
संजय राउत ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, 'आप दूसरों के हाथों की कठपुतली बनकर हमारे परिवार और नेताओं के ऊपर कीचड़ उछालने का काम कर रहे हैं। सतीश सालियान को कोई और नियंत्रित कर रहा है और इसके पीछे नितेश राणे जैसे नेताओं का हाथ है जो बेवजह इस मामले को तूल दे रहे हैं।'
राउत ने आगे दावा किया कि छह साल पहले खुद सतीश सालियान ने यह स्वीकार किया था कि उनकी बेटी की मौत कोई हत्या नहीं बल्कि एक दुर्घटना थी। ऐसे में अब अचानक इतने साल बाद इस मामले को दोबारा उठाना राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।
"दिशा सालियान के पिता को कुछ लोग मोहरा बना रहे हैं। ठाकरे परिवार के खिलाफ यह एक प्रायोजित चरित्र हनन अभियान है, जिसे जनता सब समझती है।" — संजय राउत, राज्यसभा सांसद, शिवसेना (UBT)
आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे का कड़ा रुख
इस पूरे मामले में आदित्य ठाकरे ने इसी सप्ताह की शुरुआत में अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने मीडिया के सामने कहा था कि दिशा सालियान की मौत के मामले से उनका दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है और वह अपने जीवन में कभी भी दिशा से नहीं मिले थे। आदित्य ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया।
वहीं, पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी इस पर कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि उनके परिवार को निशाना बनाकर जो 'चरित्र हनन' का अभियान चलाया जा रहा है, यदि वह नहीं रुका तो वे कानूनी मोर्चे पर कड़ा जवाब देंगे और दोषियों को बेनकाब करेंगे।
पार्टी का मानना है कि आगामी राजनीतिक समीकरणों और चुनावों को ध्यान में रखते हुए विपक्षी दल इस पुराने और बंद हो चुके मामले को फिर से जिंदा करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि ठाकरे परिवार की छवि को धूमिल किया जा सके।
क्या है दिशा सालियान की मौत का पूरा मामला?
बता दें कि दिशा सालियान ने बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की टैलेंट मैनेजर के रूप में काम किया था। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक आवासीय इमारत की 12वीं मंजिल से कथित तौर पर गिरने से उनकी संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई थी। इस घटना ने उस समय पूरे देश का ध्यान खींचा था।
इसके ठीक एक सप्ताह बाद, यानी 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने बांद्रा स्थित अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे। इन दोनों घटनाओं के समय में बहुत कम अंतर होने के कारण सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में दोनों मौतों के बीच किसी प्रकार का संबंध होने की अटकलें लगाई जाने लगी थीं।
मुंबई पुलिस और बाद में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने इस मामले की गहन छानबीन की थी। पुलिस ने अपनी शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या या दुर्घटना से जुड़ा मामला बताया था, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते यह मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है। हाल ही में सीबीआई द्वारा इस मामले में कुछ नए घटनाक्रम सामने आने के बाद यह विवाद फिर से ताजा हो गया है।
राजनीतिक नफा-नुकसान और आगे की राह
महाराष्ट्र की राजनीति में दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत का मामला हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। जब भी चुनाव नजदीक आते हैं या राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ता है, इस तरह के पुराने मामले सतह पर आ जाते हैं। एक तरफ जहां महाविकास आघाडी (MVA) इसे राजनीतिक प्रतिशोध और चरित्र हनन बता रही है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष के नेता इस मामले में निष्पक्ष जांच और दूध का दूध, पानी का पानी होने की मांग कर रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि सतीश सालियान द्वारा भेजे गए मानहानि नोटिस और संजय राउत के बयानों के बाद बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है। कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर यह लड़ाई आने वाले दिनों में और अधिक तीखी होने की पूरी संभावना है, जिससे राज्य का सियासी पारा गर्मा गया है।



