रायपुर के पॉपुलर आउटलेट पर उठे गंभीर सवाल
देशभर में फास्ट फूड के शौकीनों के बीच बेहद लोकप्रिय ब्रांड डोमिनोज एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। मामला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का है, जहां एक नामी आउटलेट पर खान-पान की शुद्धता और धार्मिक-आस्था से जुड़े नियमों की अनदेखी करने का बड़ा आरोप लगा है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो ने खाद्य सुरक्षा और आउटलेट प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के सामने आने के बाद से ही शहर के वेज खाने वाले ग्राहकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोग लगातार खाद्य सुरक्षा विभाग से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
वायरल वीडियो में साफ तौर पर दिखाया गया है कि कैसे एक ही रसोई और एक ही ओवन का इस्तेमाल शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के पिज्जा तैयार करने के लिए किया जा रहा है। भारत जैसे देश में, जहां करोड़ों लोग धार्मिक या व्यक्तिगत कारणों से पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी भोजन का ही सेवन करते हैं, वहां इस तरह की लापरवाही को एक बहुत बड़ी चूक माना जा रहा है। ग्राहकों का कहना है कि यह न केवल उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ है, बल्कि स्वास्थ्य और स्वच्छता के मानकों का भी खुला उल्लंघन है।
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क्या है पूरा मामला और कैसे सामने आई सच्चाई?
यह पूरी घटना रायपुर के व्यस्त भाठागांव इलाके की है, जो रिंग रोड के पास स्थित है। स्थानीय निवासी मृणाल पाठक अपने कुछ दोस्तों के साथ वीकेंड पर इस डोमिनोज आउटलेट पर पिज्जा खाने गए थे। उन्होंने अपने और अपने दोस्तों के लिए विशेष रूप से 'वेज फार्महाउस पिज्जा' का ऑर्डर दिया था। शाकाहारी होने के कारण वे और उनके साथी इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त रहना चाहते थे कि उनका भोजन पूरी तरह शुद्धता के साथ तैयार हो रहा है।
ऑर्डर देने के बाद जब मृणाल की नजर किचन की तरफ गई और उन्होंने ओवन की कार्यप्रणाली को देखा, तो वे हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि जिस ओवन में उनका वेज पिज्जा बेक किया जा रहा था, ठीक उसी ओवन में नॉनवेज पिज्जा भी रखे जा रहे थे। इस नजारे को देखते ही ग्राहक के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत अपनी टेबल पर जाकर इंतजार करने के बजाय सीधे तौर पर किचन काउंटर पर जाकर कर्मचारियों से इस बारे में सवाल पूछना शुरू कर दिया।
कर्मचारियों की अजीबोगरीब सफाई और ग्राहकों का विरोध
जब मृणाल पाठक और उनके दोस्तों ने आउटलेट के कर्मचारियों से इस बात का कड़ा विरोध जताया, तो कर्मचारियों का रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। अपनी गलती मानने के बजाय कर्मचारी अजीबोगरीब तर्क देते नजर आए। उन्होंने दावा किया कि ओवन में अंदर की ट्रे अलग होती हैं या तापमान से सब ठीक रहता है, लेकिन वे ग्राहकों को इस बात का कोई ठोस और वैज्ञानिक प्रमाण नहीं दे पाए कि इससे क्रॉस-कंटामिनेश (अशुद्धता का मिलना) कैसे रुकता है।
कर्मचारियों की इस लीपापोती से ग्राहक बिल्कुल संतुष्ट नहीं हुए। उनका मानना था कि शाकाहारी भोजन खाने वाले लोगों के लिए मांसाहारी तत्वों का स्पर्श होना भी बहुत बड़ी बात है। इसके बाद ग्राहकों ने आउटलेट के अंदर ही पूरे हालात का वीडियो अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया। वीडियो रिकॉर्ड होते देख आउटलेट के भीतर कुछ पलों के लिए अफरा-तफरी का माहौल भी बन गया। ग्राहक वीडियो में साफ तौर पर यह कहते नजर आ रहे हैं कि कैसे लोगों के भरोसे का खुलेआम सौदा किया जा रहा है।
सोशल मीडिया के जरिए मंत्रियों और अधिकारियों तक पहुंची बात
आउटलेट पर उचित जवाब न मिलने के बाद मृणाल पाठक ने चुप बैठने के बजाय कानूनी और प्रशासनिक रास्ते का सहारा लेने का फैसला किया। उन्होंने आउटलेट से बाहर आकर बनाए गए इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अपलोड कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और सीधे डोमिनोज के राष्ट्रीय मुख्यालय (हेड ऑफिस) को टैग कर दिया।
"हमने शुद्ध शाकाहारी पिज्जा ऑर्डर किया था, लेकिन जब किचन में देखा तो वेज और नॉनवेज एक ही जगह पकाए जा रहे थे। यह हमारी आस्था और सेहत दोनों के साथ खिलवाड़ है। हमने इसकी आधिकारिक शिकायत स्वास्थ्य मंत्री और खाद्य विभाग से की है।" — मृणाल पाठक, शिकायतकर्ता ग्राहक
वीडियो वायरल होते ही इंटरनेट पर बहस छिड़ गई। लोगों ने इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर ने लिखा कि बड़े ब्रांड्स ग्राहकों के विश्वास का फायदा उठाकर इस तरह की मनमानी करते हैं और उन्हें लगता है कि कोई सवाल नहीं पूछेगा। मामले के तूल पकड़ने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि खाद्य विभाग इस मामले में क्या और कितनी सख्त कार्रवाई करता है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य और जनभावनाओं से जुड़ा हुआ है।
खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों पर बड़ा सवाल
यह घटना केवल एक आउटलेट की लापरवाही नहीं है, बल्कि यह पूरे फूड सर्विस सेक्टर में पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। बड़े फूड ब्रांड्स अपने विज्ञापनों में साफ-सफाई और शुद्धता के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत अक्सर इससे कोसों दूर होती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के अनुसार भी शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के भंडारण और प्रसंस्करण में क्रॉस-कंटामिनेश रोकने के कड़े निर्देश हैं।
यदि इस मामले में खाद्य विभाग की टीम जांच करने पहुंचती है और आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित आउटलेट पर भारी जुर्माना लगने के साथ-साथ उसका लाइसेंस भी खतरे में पड़ सकता है। उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि हर ग्राहक को यह जानने का पूरा हक है कि उनका खाना किन परिस्थितियों में और किस प्रकार तैयार किया जा रहा है। इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए अब जनता भी ज्यादा जागरूक हो रही है और वे ऐसे मामलों को खुलकर सामने ला रहे हैं।






