चेन्नई में आयोजित 20वें रोजगार मेले में उमड़ी युवाओं की भीड़
देशभर में युवाओं को सरकारी नौकरियों से जोड़ने के अभियान के तहत चेन्नई में 20वें रोजगार मेले का भव्य आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और नवनियुक्त सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ उनके परिजनों को भी हार्दिक बधाई दी। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी नौकरी पाना आज भी देश के लाखों युवाओं की एक बहुत बड़ी आकांक्षा होती है, जो उनकी मेहनत और लगन का परिणाम है।
इस राष्ट्रव्यापी रोजगार मेले के माध्यम से देश भर में कुल 51,000 से अधिक नए अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए हैं। इस विशेष पहल के शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 12.75 लाख युवाओं को देश की सरकारी सेवा में शामिल होने का अवसर मिल चुका है। चेन्नई के इस कार्यक्रम में न केवल चयनित युवाओं के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी, बल्कि उनके माता-पिता और परिवार के सदस्यों में भी एक अलग ही गर्व का माहौल देखने को मिला, जिन्होंने इस पूरी भर्ती प्रक्रिया के दौरान उनका लगातार साथ दिया था।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने अपने निजी जीवन के संघर्षों और अनुभवों को भी साझा किया। एक साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले डॉ. पेम्मासानी ने डॉक्टर बनने, फिर एक उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाने और अंत में जनसेवा के क्षेत्र में जनप्रतिनिधि बनने तक के अपने सफर का जिक्र किया। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में हमेशा सीखते रहना चाहिए, नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में अपनी दृढ़ता को कम नहीं होने देना चाहिए।
संबंधित खबरें
सरकारी सेवा के मानवीय पहलुओं और संवेदनशीलता पर विशेष जोर
डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने अपने संबोधन के दौरान प्रशासनिक कार्यों के मानवीय पक्ष को बहुत गहराई से समझाया। उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों को आगाह किया कि वे केवल रूटीन के प्रशासनिक कामों में उलझकर अपने मुख्य उद्देश्य यानी जनता की सेवा की भावना को कमजोर न होने दें। उन्होंने बहुत ही सारगर्भित बात कहते हुए समझाया कि एक सरकारी कर्मचारी के लिए कोई भी फाइल महज कागजी कार्रवाई या एक सामान्य प्रशासनिक काम हो सकती है, लेकिन जिस आम नागरिक से वह फाइल जुड़ी होती है, उसके लिए वह उसके जीवन के किसी अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू या समस्या का समाधान होती है।
मंत्री ने कर्मचारियों से यह भी आग्रह किया कि वे केवल इसलिए किसी पुरानी प्रक्रिया का आँख मूंदकर पालन न करते रहें क्योंकि लंबे समय से उसका पालन किया जाता रहा है। उन्होंने मौजूदा कार्यप्रणालियों पर तार्किक सवाल उठाने, तथ्यों का बारीकी से सत्यापन करने और पूरी ईमानदारी के साथ फैसले लेने की नसीहत दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिर्फ इसलिए कि भीड़ या अन्य लोग कोई गलत काम कर रहे हैं, वह काम सही नहीं हो जाता। सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता ही एक अच्छे लोक सेवक की असली पहचान होती है।
"सिर्फ इसलिए कि 100 लोग गलत काम करते हैं, वह सही काम नहीं हो जाता। सरकारी कर्मचारियों को हमेशा सत्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ जनसेवा करनी चाहिए।" — डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी, केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री
इसके साथ ही, उन्होंने नए कर्मचारियों को आधुनिक दौर की तकनीकों का पूरा इस्तेमाल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में एआई उपकरणों और डिजिटल शिक्षण संसाधनों की मदद से अपने काम को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने अनुभवी सहकर्मियों से मार्गदर्शन लेने में भी किसी प्रकार की झिझक न रखने की बात कही।
बदलते भारत की तस्वीर: मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से लेकर रक्षा निर्यात तक
देश के समग्र विकास पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद से भारत में आए अभूतपूर्व बदलावों का खुलकर जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार शासन प्रणाली, बुनियादी ढांचे, आधुनिक तकनीक और सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में क्रांतिकारी सुधार हुए हैं। भारत आज हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है और वैश्विक पटल पर अपनी एक मजबूत स्थिति दर्ज करा रहा है।
टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का उदाहरण देते हुए डॉ. पेम्मासानी ने बताया कि देश का मोबाइल विनिर्माण पारितंत्र जो वर्ष 2014-15 में मात्र दो इकाइयों तक सीमित था, वह आज बढ़कर लगभग 300 इकाइयों के विशाल नेटवर्क में तब्दील हो चुका है। इसके परिणामस्वरूप देश में मोबाइल फोन के घरेलू उत्पादन में बेजोड़ वृद्धि दर्ज की गई है। इसी तरह, बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के मोर्चे पर राष्ट्रीय राजमार्गों के नेटवर्क का जाल पूरे देश में तेजी से फैला है, जिससे यातायात सुगम हुआ है।
भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि रेलवे के विद्युतीकरण का कार्य रिकॉर्ड गति से पूरा किया जा रहा है। इसके अलावा, आधुनिक वंदे भारत ट्रेनों के संचालन और देश भर के रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास से यात्रियों के सफर करने का अनुभव पूरी तरह बदल गया है। उन्होंने गर्व के साथ यह भी बताया कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन में भी भारत ने ऐतिहासिक छलांग लगाई है। देश का रक्षा निर्यात जो वर्ष 2013-14 में केवल 600 करोड़ रुपये के आसपास था, वह बढ़कर वर्ष 2025-26 में लगभग 30,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को छू रहा है, जो 'मेक इन इंडिया' की सफलता का प्रमाण है।
नई संस्कृतियों और कार्य परिवेश को अपनाने की सलाह
देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात होने वाले नए कर्मचारियों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि उन्हें नई जगहों, अलग भाषाओं, विभिन्न संस्कृतियों और नए कार्य परिवेश के प्रति हमेशा एक खुले मन से तैयार रहना चाहिए। जब कोई युवा अपनी परिचित दुनिया से बाहर निकलकर किसी अपरिचित परिवेश में काम करता है, तो वह अनुभव उसके भीतर आत्मविश्वास को मजबूत करने के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विविधता को गहराई से समझने में भी मददगार साबित होता है।
उन्होंने युवा कर्मचारियों का आह्वान किया कि वे अपने कार्यक्षेत्र में आम नागरिकों के सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों की पहचान करें। इसके बाद प्रौद्योगिकी, नवाचार (इनोवेशन) और उद्यमिता के जरिए उन समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तलाशने का प्रयास करें। एक युवा सोच देश की किसी भी जटिल समस्या को सुलझाने में सबसे बड़ी ताकत बन सकती है, बशर्ते उसे सही दिशा और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाए।
वर्ष 2047 के विकसित भारत के विजन के साथ आगे बढ़ने का आह्वान
अपने संबोधन के समापन चरण में डॉ. पेम्मासानी ने नवनियुक्त कर्मचारियों को जीवनभर याद रखने योग्य तीन बहुत ही महत्वपूर्ण सूत्र दिए। उन्होंने कहा कि हर कर्मचारी को अपने पूरे सेवाकाल के दौरान हमेशा तीन बातों को याद रखना चाहिए—पहला, देश का आम नागरिक; दूसरा, उनके अपने परिवार; और तीसरा, उनका अपना युवा रूप। ये तीनों ही बातें उन्हें हमेशा जमीन से जोड़े रखेंगी और जनता के प्रति उनकी जवाबदेही को कभी कम नहीं होने देंगी।
मंत्री ने देश की आजादी के सौ साल पूरे होने के वर्ष यानी 2047 के 'विकसित भारत' के विजन का जिक्र करते हुए युवाओं से आत्ममंथन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हर कर्मचारी को नियमित रूप से खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या वे देश, अपने परिवारों और उन नागरिकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरे उतर रहे हैं, जिन्होंने उन पर इतना भरोसा जताया है। अंत में, उन्होंने सभी नवनियुक्त कर्मचारियों के उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्र निर्माण में उनकी सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।



