देशभर में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और SIR प्रक्रिया को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण और राहत भरी घोषणा की है। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों से नाम कटने की शिकायतों के बाद, आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि जिन योग्य मतदाताओं के नाम गलती से या अन्य कारणों से सूची से बाहर हो गए हैं, वे अब बेहद आसानी से अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं।
कैसे करें दोबारा आवेदन? प्रक्रिया हुई आसान
भारतीय निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार, यदि किसी योग्य नागरिक का नाम मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट श्रेणी के तहत मतदाता सूची से हटा दिया गया है, तो वे निराश न हों। ऐसे मतदाता ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से या अपने क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के जरिए नए सिरे से फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं। इसके अलावा, जैसे ही युवा 18 वर्ष की आयु पूरी करते हैं, वे भी इसी फॉर्म के जरिए मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) की आधिकारिक वेबसाइट पर इससे जुड़ी तमाम जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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विशेष अभियान चलाकर BLO करेंगे घर-घर संपर्क
निर्वाचन आयोग ने देश के उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) को विशेष निर्देश जारी किए हैं, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग के निर्देशानुसार, अगले एक महीने के दौरान BLO को हर हफ्ते औसतन 20 से 25 ऐसे मतदाताओं के घर जाना होगा, जिनके नाम सूची से गायब हैं। इस विशेष और व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य मतदाता मताधिकार से वंचित न रहे।
विवाद और पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि हाल ही में देश के कई हिस्सों में मतदाता सूची के संशोधन, SIR प्रक्रिया और फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों और सार्वजनिक मंचों पर तीखी बहस छिड़ी हुई थी। कई रिपोर्ट्स में मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम कटने के दावे किए गए थे, जिसके बाद यह मामला देश भर में चर्चा का विषय बन गया। इसी पृष्ठभूमि में निर्वाचन आयोग का यह नया निर्देश उन लाखों मतदाताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो सूची से नाम कटने को लेकर परेशान थे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मीडिया रिपोर्ट्स में वायरल इस प्रक्रिया के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह विषय व्यापक राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना हुआ है। जानकारी साभार: निर्वाचन आयोग / संबंधित मीडिया रिपोर्ट्स।







