FASTag बदलने का पुराना और थकाऊ झंझट अब हुआ इतिहास
सड़क पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई (NHAI) ने फास्टैग इस्तेमाल करने वाले करोड़ों वाहन स्वामियों के लिए एक क्रांतिकारी सुविधा की शुरुआत की है। अभी तक देश में यह नियम था कि यदि किसी वाहन चालक को अपने फास्टैग से जुड़े बैंक या इश्यूअर को बदलना होता था, तो उसे काफी लंबी और कागजी कार्रवाई से गुजरना पड़ता था। वाहन चालकों को नया फास्टैग खरीदने के लिए पैसे खर्च करने होते थे और साथ ही कार की विंडस्क्रीन पर चिपके पुराने फास्टैग को हटाना भी अनिवार्य होता था। यह प्रक्रिया न केवल समय लेने वाली थी, बल्कि वाहन स्वामियों के लिए काफी परेशानी का सबब भी बनती थी।
अब इस पूरे झंझट को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान इस नई सुविधा का औपचारिक ऐलान किया गया था। एनएचएआई की इस नई सर्विस को 'वनटैग' (OneTag) नाम दिया गया है, जो फास्टैग पोर्टेबिलिटी का काम करती है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब किसी भी वाहन चालक को बैंक बदलने के लिए अपने वाहन पर नया फास्टैग स्टीकर लगवाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। यह प्रक्रिया ठीक उसी तरह काम करेगी जैसे मोबाइल यूजर अपने नंबर को बदले बिना टेलीकॉम ऑपरेटर बदल लेते हैं।
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क्या है 'OneTag' सर्विस और यह कैसे करती है काम?
टेक्नोलॉजी के इस दौर में अब सफर को और अधिक सुगम बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। 'वनटैग' सेवा मूल रूप से फास्टैग पोर्टेबिलिटी का एक आधुनिक रूप है। इसके तहत वाहन मालिक बिना किसी भौतिक बदलाव के अपने मौजूदा फास्टैग स्टिकर को ही चालू रखते हुए उसके पीछे काम करने वाले बैंक को बदल सकते हैं। यानी नंबर वही रहेगा, गाड़ी पर स्टीकर भी वही पुराना चिपका रहेगा, लेकिन टोल प्लाजा पर कटने वाला पैसा आपके नए बैंक खाते से डिडक्ट होने लगेगा।
इस पूरी प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और सुरक्षित बनाया गया है ताकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी या तकनीकी खामी की कोई गुंजाइश न बचे। एनएचएआई का मानना है कि इस सेवा से देश भर के लाखों वाहन चालकों का समय बचेगा और टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों तथा तकनीकी बाधाओं से भी निजात मिलेगी। वाहन मालिकों को अब अलग-अलग बैंकों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे अपने स्मार्टफोन के जरिए ही घर बैठे इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम दे सकेंगे।
"वनटैग सेवा के आने से हमारे देश के ट्रांसपोर्ट सेक्टर और टोल कलेक्शन सिस्टम में एक बड़ा बदलाव आएगा। अब नागरिकों को बार-बार टैग बदलने और पुराने को हटाने की झंझट से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी, जिससे उनका सफर और अधिक आसान और सुगम होगा।" — सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, आधिकारिक बयान
राजमार्गयात्रा ऐप के जरिए ऐसे करें अपने फास्टैग की पोर्टेबिलिटी
यदि आप भी अपने मौजूदा फास्टैग को किसी दूसरे बैंक में पोर्ट करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको बेहद आसान डिजिटल चरणों का पालन करना होगा। यह पूरी प्रक्रिया सरकार के आधिकारिक 'राजमार्गयात्रा' मोबाइल ऐप के माध्यम से संचालित की जा रही है। आइए जानते हैं कि इस प्रक्रिया को स्टेप-बाय-स्टेप कैसे पूरा किया जा सकता है:
- सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में 'राजमार्गयात्रा' ऐप डाउनलोड करें और उसमें लॉग इन करें।
- ऐप के डैशबोर्ड पर जाकर अपने वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें।
- इसके बाद सिस्टम यह जांच करेगा कि आपका वाहन फास्टैग पोर्टेबिलिटी के लिए पात्र है या नहीं।
- पात्रता पुख्ता होने के बाद आपके मौजूदा फास्टैग बैंक की तरफ से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक 6 अंकों का ओटीपी (वेरिफिकेशन कोड) भेजा जाएगा।
- ओटीपी दर्ज करने के बाद आपको अपनी पसंद का नया फास्टैग इश्यूअर या बैंक चुनना होगा।
- नए बैंक के साथ ग्राहक सत्यापन (कस्टमर वेरिफिकेशन) और वॉलेट ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपका फास्टैग सफलतापूर्वक पोर्ट हो जाएगा।
इस पूरी डिजिटल प्रक्रिया के पूरा होने के बाद आपके वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से जुड़ी फास्टैग आईडी में कोई छेड़छाड़ या बदलाव नहीं किया जाएगा। आप अपनी गाड़ी पर पहले से लगे पुराने फास्टैग का ही इस्तेमाल बेझिझक कर सकेंगे, बस आपके टोल भुगतान नए बैंक खाते से लिंक हो जाएंगे।
दोबारा पोर्टेबिलिटी के नियम और 6 महीने का कूलिंग पीरियड
आम जनता के मन में यह सवाल जरूर आ सकता है कि क्या इस तरह बैंक बदलने के बाद क्या फास्टैग को फिर से किसी अन्य बैंक में पोर्ट किया जा सकता है? इसका उत्तर हां है, लेकिन इसके लिए कुछ खास नियमों का पालन करना अनिवार्य किया गया है। एनएचएआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, एक बार फास्टैग पोर्टेबिलिटी की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद पुराना बैंक या इश्यूअर आपके मौजूदा फास्टैग वॉलेट को हमेशा के लिए बंद कर देगा। इस दौरान पुराने वॉलेट में जो भी शेष राशि (बैलेंस) बची होगी, उसे नियमानुसार वाहन मालिक के खाते में रिफंड कर दिया जाएगा।
रिफंड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फास्टैग पर 6 महीने का कूलिंग पीरियड लागू हो जाएगा। इस तयशुदा 6 महीने की अवधि के दौरान आप अपने फास्टैग को किसी दूसरे बैंक में दोबारा पोर्ट नहीं कर पाएंगे। अगली पोर्टेबिलिटी प्रक्रिया केवल तभी संभव होगी जब यह 6 महीने की समयावधि पूरी हो जाएगी। इस नियम को सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है ताकि बार-बार बैंक बदलने की प्रक्रिया का दुरुपयोग न हो सके.
किन-किन बैंकों में उपलब्ध है यह सुविधा और क्या होंगे इसके बड़े फायदे?
फिलहाल एनएचएआई की इस वनटैग और पोर्टेबिलिटी सुविधा का लाभ देश के चुनिंदा और प्रमुख बैंकों के माध्यम से ही उठाया जा सकता है। राजमार्गयात्रा ऐप पर दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्तमान में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), एयरटेल पेमेंट बैंक, एक्सिस बैंक, सिटी यूनियन बैंक, फेडरल बैंक, एचडीएफसी बैंक (HDFC), इंडसइंड बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, करूर वैश्य बैंक और आईसीआईसीआई बैंक (ICICI) के जरिए यह पोर्टेबिलिटी की जा रही है। आने वाले समय में अन्य बैंकों के भी इस नेटवर्क से जुड़ने की पूरी संभावना है।
एनएचएआई का यह भी कहना है कि इस नई व्यवस्था से न सिर्फ आम जनता का जीवन आसान होगा, बल्कि संपूर्ण फास्टैग इकोसिस्टम में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। बार-बार नए फास्टैग बनाने और उन्हें डिस्पैच करने की जरूरत कम होने से प्लास्टिक कचरे में कमी आएगी और सरकार का टैग प्रोडक्शन खर्च भी घटेगा। यह डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और बड़ा और ठोस कदम साबित हो रहा है।




