फिजी में एचआईवी का प्रकोप: क्यों लगानी पड़ी आपातकाल की गुहार
दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित खूबसूरत द्वीप देश फिजी इन दिनों एक बहुत बड़ी स्वास्थ्य चुनौती से जूझ रहा है। यहां एचआईवी संक्रमण इतनी तेजी से फैला है कि सरकार को मजबूरन राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करना पड़ा है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने दुनिया को चेतावनी दी है कि यह द्वीप राष्ट्र वर्तमान में वैश्विक स्तर पर एचआईवी के सबसे गंभीर और तीव्र प्रकोपों में से एक का सामना कर रहा है। स्थिति इतनी डरावनी हो चुकी है कि देश में अनुमानित तौर पर हर 60 वयस्कों में से कम से कम एक व्यक्ति इस खतरनाक वायरस से संक्रमित पाया गया है।
संयुक्त राष्ट्र एचआईवी/एड्स कार्यक्रम (यूएनएआईडी) की रिपोर्ट के अनुसार, फिजी जैसे छोटे से देश में पिछले 15 वर्षों के भीतर एचआईवी के नए मामलों में बारह गुना की驚ने वाली वृद्धि हुई है। महज 10 लाख से कम आबादी वाले इस देश के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते कड़े और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह संकट और भी विकराल रूप धारण कर सकता है, जिससे पूरी आबादी खतरे में पड़ सकती है।
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साल 2025 के आंकड़े डराने वाले: हजारों नए मामले और बच्चों पर मंडराता खतरा
आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति की गंभीरता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अकेले साल 2025 के दौरान, 10 लाख से भी कम आबादी वाले इस देश में एचआईवी के 2,000 से अधिक नए मामले सामने आए। इसके साथ ही, देश में कुल 9,000 के करीब लोग ऐसे हैं जो एचआईवी के साथ जी रहे हैं। पांच साल पहले तक यह संक्रमण दर 167 लोगों में से 1 व्यक्ति की थी, जो अब बढ़कर सीधे 60 में से 1 वयस्क तक पहुंच चुकी है।
सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाली बात यह है कि इस संक्रमण की चपेट में अबोध बच्चे भी आ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 50 गर्भवती महिलाओं में से 1 महिला एचआईवी पॉजिटिव पाई गई है। कई नवजात शिशु अपनी संक्रमित माताओं के कारण इस वायरस के साथ जन्म ले रहे हैं। साल 2025 में ही 59 ऐसे मासूम बच्चों की पहचान की गई, जिन्हें अपनी मां से यह संक्रमण मिला था। इनमें से 18 बच्चों की तो संक्रमण से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण अपने जीवन का पहला जन्मदिन देखने से पहले ही मौत हो गई।
"फिजी में एचआईवी संक्रमण की दर अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। हम बिना किसी भेदभाव के जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं ताकि लोग डर की वजह से छुपने के बजाय खुलकर आगे आएं और समय पर अपनी जांच व इलाज करवा सकें।" — एंटोनियो लालाबलावु, स्वास्थ्य मंत्री, फिजी
ड्रग्स तस्करी और सुई साझा करना बना सबसे बड़ा विलेन
आखिर फिजी जैसे शांत देश में एचआईवी इतनी तेजी से क्यों फैल रहा है? इस सवाल के जवाब में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस खतरनाक स्थिति के पीछे एक मुख्य वजह इंजेक्शन के माध्यम से ली जाने वाली नशीली दवाओं का बढ़ता हुआ प्रचलन है। फिजी और प्रशांत महासागर के अन्य द्वीपीय देश पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों के लिए एक प्रमुख पारगमन बिंदु (ट्रांजिट पॉइंट) बनते जा रहे हैं।
इस अवैध तस्करी के कारण स्थानीय समुदायों में सस्ती और खतरनाक नशीली दवाओं की भारी खेप आसानी से उपलब्ध हो रही है। नशे के आदी लोग अक्सर एक ही सुई (सिरिंज) को आपस में साझा करते हैं, जिससे शरीर के अंदर खून के जरिए यह वायरस एक से दूसरे व्यक्ति में बहुत तेजी से फैल जाता है। इसके अलावा, सामाजिक कलंक और स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियादी सीमाओं के कारण भी लोग अपनी जांच करवाने से कतराते हैं, जिससे यह बीमारी और छुपकर तेजी से पैर पसार रही है।
अस्पताल और जांच का दायरा सीमित: केवल इतने लोग करा रहे हैं इलाज
यूएनएआईडी की रिपोर्ट्स बताती हैं कि फिजी में स्वास्थ्य प्रणाली के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों तक पहुंच बनाना है। देश में एचआईवी से पीड़ित कुल लोगों में से केवल 39 प्रतिशत लोग ही ऐसे हैं जो अपनी इस स्थिति के बारे में जानते हैं। बाकी के 60 प्रतिशत से अधिक लोग तो यह जानते ही नहीं कि वे इस जानलेवा वायरस से संक्रमित हैं। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केवल 22 प्रतिशत मरीज ही एंटीरेट्रोवायरल (एआरवी) उपचार प्राप्त कर पा रहे हैं।
जागरूकता की भारी कमी और समाज के डर की वजह से लोग अपनी बीमारी को छुपाकर रखते हैं। जब तक वे अस्पताल पहुंचते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। देश का मौजूदा स्वास्थ्य ढांचा इस भारी-भरकम प्रकोप से निपटने में कई मोर्चों पर कमजोर साबित हो रहा है, जिसके कारण सरकार को अब कड़े आपातकालीन कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ा है।
सरकार का मास्टरप्लान: मुफ्त जांच, नई सुइयां और सख्त नियम
इस राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने के लिए फिजी सरकार ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकार ने अपने मुफ्त एचआईवी परीक्षण और उपचार कार्यक्रमों का दायरा बड़े पैमाने पर बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ ही, नशीली दवाओं का सेवन करने वाले लोगों को साफ और सुरक्षित सुइयां उपलब्ध कराने के लिए 'नुकसान कम करने वाले उपाय' (harm reduction measures) लागू किए जा रहे हैं।
देश में उच्च जोखिम वाले समूहों के बीच संक्रमण को रोकने के लिए प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PrEP) के उपयोग को भी काफी बढ़ावा दिया जा रहा है। फिजी के स्वास्थ्य मंत्री ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि यह पूरा अभियान पूरी तरह निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के चलाया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा करना और मरीजों को डर के माहौल से बाहर निकालकर समय पर जांच और इलाज के लिए प्रेरित करना है।




