आसमान में उड़ता एक यात्री विमान अचानक करीब 17 हजार फीट नीचे आ जाए, विमान में बैठे पैसेंजर आंखें बंद कर प्रेयर करने लगें और लगे कि अंत समय आ गया है। तभी कॉकपिट का दरवाजा खुलता है, अंदर एक बहादुर पायलट लहूलुहान होता है और दूसरा उस पर हमला कर रहा होता है। विमान में चीख-पुकार मच जाती है। कुछ यात्री अपनी जान जोखिम में डालकर कॉकपिट में घुसते हैं और हमलावर को काबू करते हैं। यह किसी हॉलीवुड एक्शन फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में असल में ऐसा ही वाकया हुआ।
भारतीय कप्तान स्मित मछार पर को-पायलट हमाम अल-हमामी ने हमला किया और विमान को तबाही की तरफ ले जाने की कोशिश की। हालांकि, स्थिति को संभाल लिया गया और विमान की सुरक्षित लैंडिंग हुई। लेकिन इस हैरान करने वाली घटना के सामने आते ही इंटरनेट की दुनिया में एक अलग ही भूचाल आ गया। सोशल मीडिया पर एक वर्ग ने दावा करना शुरू कर दिया कि यह घटना असल में हुई ही नहीं, बल्कि यह इजरायल की खुफिया एजेंसी या प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा रचा गया कोई नाटक या 'फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन' है।
सोशल मीडिया पर 'बीबीवुड' और साजिश के दावे
कुछ यूजर्स ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को उनके निकनेम 'बीबी' से जोड़ते हुए इस पूरी घटना को 'बीबीवुड' (Bibiwood) का प्रोडक्शन करार दिया। फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर ऐसे दर्जनों पोस्ट और कमेंट्स बाढ़ की तरह आने लगे, जिनमें यह दावा किया गया कि गाजा युद्ध से ध्यान भटकाने या सहानुभूति बटोरने के लिए यह कहानी गढ़ी गई है। 'कॉम्बैट एंटीसेमिटिज्म मूवमेंट' (CAM) के रिसर्च सेंटर के अनुसार, विमान के डिस्ट्रेस सिग्नल भेजने के सिर्फ 67 मिनट के भीतर ही पहला साजिश वाला पोस्ट ऑनलाइन आ गया था।
महज 12 घंटे के भीतर ऐसे करीब 3,000 नफरत भरे और भ्रामक पोस्ट सामने आए, जिन्हें लाखों-करोड़ों व्यूज और लाइक्स मिले। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेजी से पोस्ट का आना यह साबित करता है कि इसके पीछे सुनियोजित बॉट नेटवर्क का हाथ था, जो जानबूझकर फेक नैरेटिव सेट कर रहे थे ताकि लोगों की भावनाओं को भड़काया जा सके।
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विशेषज्ञों की राय और फेक न्यूज का जाल
एआई और डिजिटल मीडिया के जानकारों का कहना है कि जब भी कोई ऐसी घटना होती है जिसे आम लोग आसानी से समझ नहीं पाते, तो कुछ उग्रवादी तत्व पुरानी पूर्वाग्रहों और साजिश के सिद्धांतों का सहारा लेते हैं। इस मामले में भी यहूदियों और इजरायल को निशाना बनाकर आसान बलि का बकरा बनाया गया। इंटरनेट कंपनियों की 'फ्री-स्पीच' नीतियों के कारण इस तरह के बोट-संचालित दुष्प्रचार को रोकने में मुश्किलें आ रही हैं, जो आज के डिजिटल युग में एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो साभार: संबंधित सोशल मीडिया हैंडल / क्रिएटर।




