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जर्मनी में क्यों तेजी से पैर पसार रही है धुर-दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी? जानिए सफलता के पीछे का सच

जर्मनी की राजनीति में धुर-दक्षिणपंथी पार्टी 'ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' यानी AfD लगातार मजबूत हो रही है। चुनाव-दर-चुनाव बेहतर प्रदर्शन कर रही इस पार्टी की लोकप्रियता के पीछे आम नागरिकों का बढ़ता असंतोष और कड़े आप्रवासन मुद्दे मुख्य वजह हैं।
The Freelance ब्यूरो
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20 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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जर्मनी में क्यों तेजी से पैर पसार रही है धुर-दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी? जानिए सफलता के पीछे का सच
📷 जर्मनी में क्यों तेजी से पैर पसार रही है धुर-दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी? जानिए सफलता के पीछे का सच — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • जर्मनी की राजनीति में धुर-दक्षिणपंथी पार्टी AfD का लगातार मजबूत होना चिंता का विषय बनता जा रहा है।
  • बढ़ती महंगाई, आर्थिक सुस्ती और आप्रवासन नीतियों से नाराज मतदाता अब इस पार्टी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
  • पारंपरिक राजनीतिक दलों से मोहभंग होने के कारण ग्रामीण इलाकों और कामकाजी वर्ग में पार्टी का आधार तेजी से बढ़ा है।
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जर्मनी की राजनीति में क्या है एएफडी (AfD) का बढ़ता प्रभाव?

यूरोप के सबसे ताकतवर और आर्थिक रूप से संपन्न देशों में शुमार जर्मनी इन दिनों एक बड़े राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। यहां की राजनीति में लंबे समय से दो-तीन मुख्य दलों का दबदबा रहा है, लेकिन पिछले कुछ सालों में एक नए राजनीतिक दल ने पारंपरिक दलों की नींद उड़ा दी है। इस दल का नाम 'ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (Alternative für Deutschland) यानी AfD है। यह एक धुर-दक्षिणपंथी राजनीतिक दल है, जो चुनाव-दर-चुनाव अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाता जा रहा है।

शुरुआती दौर में इस पार्टी को हाशिए का दल माना जाता था और मुख्यधारा की राजनीति में इसे कोई खास तवज्जो नहीं दी जाती थी। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। जर्मन संसद (बुंडस्टाग) से लेकर स्थानीय निकायों और प्रांतीय चुनावों तक, AfD ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उभार रातों-रात नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे समाज के एक बड़े हिस्से का वह गहरा असंतोष है जो पारंपरिक सरकारों की नीतियों से त्रस्त हो चुका है।

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आप्रवासन नीति और शरणार्थी संकट: पार्टी का सबसे बड़ा हथियार

एएफडी के इस सियासी उभार के पीछे सबसे बड़ा मुद्दा आप्रवासन (Immigration) और शरणार्थियों से जुड़ा हुआ है। साल 2015 के बाद से जर्मनी में पश्चिम एशिया और अफ्रीकी देशों से बड़ी संख्या में शरणार्थियों ने शरण ली है। शुरुआती दौर में तत्कालीन सरकार ने इनका स्वागत किया था, लेकिन धीरे-धीरे इसके सामाजिक और आर्थिक परिणाम सामने आने लगे। अपराध की घटनाओं में वृद्धि, आवास की कमी और कल्याणकारी योजनाओं पर बढ़ते दबाव ने आम जर्मन नागरिकों की चिंता बढ़ा दी।

एएफडी ने इसी मुद्दे को अपनी राजनीति का मुख्य आधार बनाया। पार्टी ने खुलकर खुली सीमाओं की नीति का विरोध किया और देश की सुरक्षा तथा संस्कृति को बचाने का नारा दिया। जनता के बीच यह संदेश देने में पार्टी सफल रही कि पारंपरिक दल देश की मूल संस्कृति और सुरक्षा के साथ समझौता कर रहे हैं। यही कारण है कि जिन इलाकों में शरणार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ी, वहां एएफडी का समर्थन भी उतनी ही तेजी से बढ़ा।

पारंपरिक राजनीतिक दलों से मोहभंग और जनता का गुस्सा

जर्मनी में क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स (CDU/CSU) और सोशल डेमोक्रेट्स (SPD) जैसे दल दशकों से सत्ता संभालते आए हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश की आर्थिक स्थिति में सुस्ती आई है। ऊर्जा संकट, आसमान छूती महंगाई और बुनियादी ढांचे के चरमराने से आम जनता का इन बड़े दलों से भरोसा उठने लगा है। कोरोना महामारी और उसके बाद रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते जर्मनी की अर्थव्यवस्था को जो झटके लगे, उसने मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है।

जनता का यह गुस्सा और निराशा अब विरोध के वोटों में बदल रही है। मतदाता अब बदलाव चाहते हैं और उन्हें एएफडी ही एकमात्र ऐसा विकल्प नजर आता है जो मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ खुलकर बोलता है। पार्टी के नेता अक्सर सत्ताधारी दलों पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि वे आम जर्मन नागरिकों के हितों को ताक पर रखकर नीतियां बना रहे हैं। यह नैरेटिव फैक्ट्री मजदूरों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण इलाकों के लोगों के बीच बहुत तेजी से लोकप्रिय हुआ है।

"आज जर्मनी का मतदाता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। महंगाई और सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार पूरी तरह विफल रही है, और यही वजह है कि लोग पारंपरिक पार्टियों को छोड़कर एएफडी की तरफ देख रहे हैं।"— राजनीतिक विशेषज्ञ, बर्लिन

पूर्वी जर्मनी में पार्टी की पकड़ सबसे ज्यादा मजबूत क्यों है?

यदि एएफडी के भौगोलिक आधार को देखें, तो यह स्पष्ट होता है कि पूर्वी जर्मनी के राज्यों में इस पार्टी को सबसे ज्यादा समर्थन मिल रहा है। इसके ऐतिहासिक और सामाजिक कारण हैं। जर्मनी के एकीकरण के तीन दशक बाद भी पूर्वी और पश्चिमी हिस्से के विकास में एक बड़ा अंतर बना हुआ है। पूर्वी जर्मनी के कई इलाकों में लोगों को लगता है कि पश्चिम के मुकाबले उनकी उपेक्षा की जा रही है, वहां नौकरियां कम हैं और आय के साधन सीमित हैं।

इस क्षेत्र के लोगों में पश्चिमी राजनीतिक दलों के प्रति पहले से ही एक अविश्वास का भाव रहा है। एएफडी ने इस क्षेत्र की नब्ज को बहुत अच्छे से पकड़ा और स्थानीय मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। परिणाम यह है कि आज पूर्वी जर्मनी के कई जिलों और नगर पालिकाओं में एएफडी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है। यहां तक कि कई स्थानीय चुनावों में पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करके सभी को चौंका दिया है।

जर्मन लोकतंत्र और समाज के लिए इसके क्या हैं दूरगामी मायने?

एएफडी के इस तरह लगातार मजबूत होने से जर्मन राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। देश के अन्य सभी प्रमुख दलों ने मिलकर एक 'फायरवॉल' (Cordon Sanitaire) बनाई है, जिसके तहत वे किसी भी स्तर पर एएफडी के साथ गठबंधन न करने की कसम खा चुके हैं। उनका तर्क है कि यह पार्टी चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा देती है और जर्मनी के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा है।

दूसरी ओर, एएफडी के नेता और उनके समर्थक इसे लोकतंत्र का गला घोटना करार देते हैं। उनका कहना है कि करोड़ों मतदाताओं द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को सत्ता से दूर रखना लोकतांत्रिक जनादेश का अपमान है। आने वाले चुनावों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या मुख्यधारा के दल इस दक्षिणपंथी लहर को रोक पाने में कामयाब होते हैं, या फिर जर्मनी की राजनीति का यह नया ध्रुवीकरण देश के भविष्य की दिशा पूरी तरह बदल देगा।

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