होम/राजनीति/गोबरधन योजना से बदलेगी देश के ऊर्जा सेक्टर की तस्वीर: 2036 तक CBG उत्पादकों को मिलेगी बड़ी राहत, तय हुई 100% खरीद की गारंटी
राजनीतिपढ़ने में समय: 6 मिनट

गोबरधन योजना से बदलेगी देश के ऊर्जा सेक्टर की तस्वीर: 2036 तक CBG उत्पादकों को मिलेगी बड़ी राहत, तय हुई 100% खरीद की गारंटी

केंद्र सरकार की गोवर्धन योजना देश के ऊर्जा परिदृश्य में बड़ा बदलाव लाने जा रही है। इसके तहत साल 2036 तक कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादकों को बायोमास और बायोगैस की सौ फीसदी खरीद की गारंटी दी गई है, जिससे रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को नया impulso मिलेगा।
The Freelance ब्यूरो
TheFreelance ब्यूरो
20 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
गोबरधन योजना से बदलेगी देश के ऊर्जा सेक्टर की तस्वीर: 2036 तक CBG उत्पादकों को मिलेगी बड़ी राहत, तय हुई 100% खरीद की गारंटी
📷 गोबरधन योजना से बदलेगी देश के ऊर्जा सेक्टर की तस्वीर: 2036 तक CBG उत्पादकों को मिलेगी बड़ी राहत, तय हुई 100% खरीद की गारंटी — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • गोवर्धन योजना के तहत साल 2036 तक सीबीजी उत्पादकों को बायोमास की शत-प्रतिशत खरीद की गारंटी दी गई है।
  • इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य देश में रिन्यूएबल एनर्जी के उत्पादन को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
  • सरकार के इस कदम से ग्रीन एनर्जी सेक्टर में निवेश बढ़ेगा और प्रदूषण को कम करने में भी खासी मदद मिलेगी।
प्रायोजित • SPONSOREDVoterAction Campaign Suite
VoterAction - कागज़ पर नहीं, ऐप पर लड़े जाते हैं चुनाव | अभियान की पूरी कमान

गोवर्धन योजना और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी

भारत सरकार देश में हरित ऊर्जा यानी ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए लगातार बड़े और कड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में 'गोवर्धन' योजना के तहत एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है, जो आने वाले समय में देश के ऊर्जा क्षेत्र की पूरी तस्वीर बदलकर रख सकता है। सरकार ने यह तय किया है कि देश में कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन करने वाले उद्योगों और उत्पादकों को आने वाले कई सालों तक बाजार की अनिश्चितताओं से बचाया जाएगा। इसके तहत साल 2036 तक सीबीजी उत्पादकों को उनके द्वारा उत्पादित बायोगैस और बायोमास की सौ फीसदी खरीद की गारंटी दी जा रही है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश जीवाश्म ईंधन यानी फॉसिल फ्यूल्स पर अपनी निर्भरता को लगातार कम करने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार का यह कदम न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने की भी क्षमता रखता है। कृषि अपशिष्ट और गोबर जैसे बेकार समझे जाने वाले पदार्थों से ऊर्जा का उत्पादन कर देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ा रहा है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

सीबीजी उत्पादकों को मिलेगी अनिश्चितता से राहत

अब तक बायोगैस और सीबीजी उत्पादन से जुड़े निवेशकों और उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके उत्पाद की खपत और बाजार की उपलब्धता को लेकर होती थी। कई बार सही खरीदार न मिलने की वजह से इस क्षेत्र से जुड़े छोटे और मध्यम दर्जे के उद्यमी हतोत्साहित हो जाते थे। लेकिन सरकार की इस नई नीति के बाद अब उत्पादकों को बाजार खोजने की चिंता से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। जब उत्पादकों को यह पक्का भरोसा होगा कि उनका पूरा माल एक तय कीमत पर बिकेगा, तो वे इस सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए आगे आएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि खरीद की यह गारंटी इस सेक्टर के लिए किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और देश के अलग-अलग हिस्सों में नए बायोगैस प्लांट लगाने की होड़ सी मच जाएगी। सरकार की इस योजना से न सिर्फ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि कचरे के प्रबंधन की समस्या से भी काफी हद तक निजात मिलेगी, जो आज के समय में महानगरों और ग्रामीण इलाकों दोनों के लिए बड़ी सिरदर्द बनी हुई है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

गोवर्धन योजना सिर्फ ऊर्जा उत्पादन का जरिया नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करने का एक बेहतरीन माध्यम भी है। गांवों में पशुओं का गोबर और खेतों में बचा हुआ भूसा या पराली जैसी चीजें अक्सर किसानों के लिए परेशानी का सबब बन जाती हैं। कई बार किसान मजबूरी में पराली जला देते हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। अब इस योजना के तहत किसानों से यही बेकार समझी जाने वाली चीजें एक तय कीमत पर खरीदी जाएंगी।

इससे किसानों को उनकी अतिरिक्त उपज और पशुधन से होने वाले कचरे से भी सीधी आमदनी होगी। ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे क्योंकि हर प्लांट के संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर कामगारों, ड्राइवरों और तकनीकी सहायकों की जरूरत पड़ेगी। इस प्रकार, यह योजना 'वेस्ट टू वेल्थ' यानी कचरे से कंचन बनाने के प्रधानमंत्री के सपने को धरातल पर उतारने में मील का पत्थर साबित हो रही है।

पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण पर लगाम

देश की राजधानी समेत कई बड़े शहर आज प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। जीवाश्म ईंधन के जलने से निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को लगातार खराब कर रहा है। ऐसे में कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) एक बेहतरीन और स्वच्छ विकल्प के रूप में उभर रही है। सीबीजी का इस्तेमाल वाहनों में ईंधन के रूप में और घरेलू तथा औद्योगिक कार्यों में गैस के रूप में किया जा सकता है। यह पेट्रोल और डीजल की तुलना में काफी हद तक पर्यावरण के अनुकूल है।

सरकार की इस नीति का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जब देश में बायोगैस का बड़े पैमाने पर उत्पादन और इस्तेमाल शुरू होगा, तो कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साल 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का जो लक्ष्य रखा है, उसे हासिल करने में यह योजना बेहद मददगार साबित होगी। प्रदूषण मुक्त हवा और स्वच्छ ईंधन की दिशा में यह देश का एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।

भविष्य की राह और साल 2036 का विजन

साल 2036 तक के लिए तय किए गए इस लक्ष्य के पीछे सरकार की एक लंबी और सोची-समझी रणनीति काम कर रही है। देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी का हिस्सा कुल ऊर्जा बास्केट में लगातार बढ़ाना बेहद जरूरी है। सोलर और विंड एनर्जी के साथ-साथ बायो-एनर्जी देश की ऊर्जा सुरक्षा को एक नया आयाम दे रही है। आने वाले समय में सरकार इस क्षेत्र से जुड़ी तकनीकी और वित्तीय बाधाओं को दूर करने के लिए और भी कई बड़े कदम उठा सकती है।

"गोवर्धन योजना और सीबीजी के प्रोत्साहन से देश के ऊर्जा परिदृश्य में एक नया सवेरा आ रहा है। जब उत्पादकों को उनके माल की सौ फीसदी खरीद की गारंटी मिलेगी, तो निवेश स्वतः ही बढ़ेगा और भारत स्वच्छ ईंधन के मामले में ग्लोबल लीडर बनकर उभरेगा।" — ऊर्जा विशेषज्ञ

निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि सरकार का यह फैसला देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को एक साथ साधने में सफल साबित होगा। आने वाले दशक में भारत बायो-एनर्जी के क्षेत्र में दुनिया के लिए एक मिसाल पेश कर सकता है, बशर्ते इस नीति को जमीनी स्तर पर उतनी ही ईमानदारी से लागू किया जाए जितनी योजना बनाई गई है।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
विज्ञापन एवं अनुशंसित सामग्री • RECOMMENDED