नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश समेत देश के करीब 15 राज्यों में अचानक मौसम ने करवट ले ली है। आसमान में छाए घने बादलों और ठंडी हवाओं के बीच मौसम विभाग ने भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी दी है। उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में सीजन की पहली बर्फबारी शुरू हो चुकी है, जिसका सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर पड़ रहा है। लगातार गिरते तापमान के साथ अब सुबह और शाम के समय सिहरन महसूस होने लगी है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से यह बदलाव आया है, जो अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही बना रह सकता है।
हरियाणा के चार जिलों में ओलावृष्टि का विशेष अलर्ट जारी किया गया है जहां अगले दो दिनों तक तेज आंधी के साथ बारिश की पूरी संभावना है। खेतों में अभी धान और अन्य खरीफ फसलों की कटाई का काम चल रहा है या फसलें खुले में रखी हैं। अचानक हुई इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा पैदा हो गया है। कई जगहों पर खेतों में पानी भर गया है और ओले गिरने से फसलें जमीन पर बिछ गई हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि अगर मौसम ने जल्द सुधार नहीं दिखाया तो उनकी साल भर की मेहनत बर्बाद हो जाएगी।
उत्तराखंड और पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी का कहर
उत्तराखंड के देहरादून और नैनीताल समेत कई पहाड़ी जिलों में मौसम विभाग ने 15 और 16 अक्टूबर के लिए भारी बारिश और बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है। चारधाम यात्रा पर जाने वाले यात्रियों और तीर्थयात्रियों को भी सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। पर्वतीय अंचलों में तापमान तेजी से नीचे लुढ़क रहा है, जिससे स्थानीय जनजीवन प्रभावित होने लगा है। प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन टीमों को पूरी तरह से मुस्तैद कर दिया है। पर्यटकों को भी खराब मौसम के दौरान ऊंचाई वाले इलाकों में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
मौसम की इस मार से सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण इलाकों और खेती-किसानी से जुड़े परिवारों को उठाना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के मेरठ और आसपास के जिलों में ओलावृष्टि के तुरंत बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने गांवों में जाकर फसलों के नुकसान का जायजा लेना शुरू कर दिया है। सरकार की ओर से यह निर्देश दिए गए हैं कि ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों की फसलों का त्वरित सर्वे कराया जाए ताकि उन्हें समय पर उचित मुआवजा मिल सके। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए अतिरिक्त राहत पैकेज की घोषणा की है।
फसल सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी कटी हुई फसलों को तुरंत सुरक्षित स्थानों या ढके हुए गोदामों में पहुंचा दें। खुले आसमान के नीचे रखी मंडियों की उपज को तिरपाल से ढंकने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि बारिश और ओलों से नुकसान को कम किया जा सके। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु में हो रहे इस तेज बदलाव का असर आने वाली रबी की फसलों पर भी पड़ सकता है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्रों के संपर्क में रहें और मौसम की हर अपडेट पर कड़ी नजर रखें।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि इस अचानक आई आफत से आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी ब्रेक लग गया है। कई जगहों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हो गई है। बिजली आपूर्ति भी कई इलाकों में बाधित हुई है जिसे ठीक करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। आने वाले दिनों में तापमान में और अधिक गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे पूरी तरह से ठंड का मौसम आधिकारिक तौर पर शुरू हो जाएगा। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे बदलते मौसम में अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें और सफर के दौरान सतर्क रहें।
तापमान में बदलाव और आगामी दिनों का पूर्वानुमान
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव अक्टूबर के महीने में सामान्य से थोड़ा अलग है, जो ग्लोबल वार्मिंग और पश्चिमी विक्षोभ के बदलते पैटर्न की ओर इशारा करता है। अगले 48 घंटों तक कई राज्यों में आकाशीय बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की आशंका बनी हुई है। उत्तर भारत के लोगों को अब अपने गर्म कपड़े बाहर निकालने का समय आ गया है। प्रशासन और आपदा राहत बल किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।



