भारत बन रहा ग्लोबल सेमीकंडक्टर पावरहाउस, दुनिया भर की कंपनियों का बड़ा दांव
भारत सरकार की दूरदर्शी नीतियों और कुशल स्थानीय प्रतिभा के दम पर देश अब वैश्विक चिप निर्माण उद्योग का एक नया केंद्र बनता जा रहा है। 'सेमीकॉन इंडिया 2026' कार्यक्रम के दौरान दुनिया भर की दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनियों ने भारत में भारी-भरकम निवेश करने और अपने कारोबार का विस्तार करने को लेकर गहरी दिलचस्पी दिखाई है। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि भारत तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच देश की साख लगातार मजबूत हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रहे बदलावों के बीच भारत दुनिया के लिए एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभर रहा है। केंद्र सरकार के प्रयासों और राज्यों के सक्रिय सहयोग से देश में एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। इस सम्मेलन में दुनिया के 52 देशों से 600 से अधिक कंपनियों और 40 हजार से ज्यादा उद्योग जगत के दिग्गजों और आगंतुकों ने हिस्सा लिया, जो इस बात का प्रमाण है कि भारत में तकनीकी विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
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सेमीकॉन 2.0 योजना और 12 अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश प्रस्ताव
देश में चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने 'सेमीकॉन 2.0' योजना का ऐलान किया है जिसके तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस दौरान उम्मीद जताई है कि देश में लगभग 12 अरब अमेरिकी डॉलर के नए निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरेंगे। वैश्विक चिप उद्योग की कई बड़ी कंपनियों ने भारत में अपने कार्यालय खोल लिए हैं और स्थानीय स्तर पर उत्पादन इकाइयां स्थापित करने का काम भी तेजी से शुरू हो चुका है।
इस कड़ी में एप्लाइड मैटेरियल्स ने 48,000 करोड़ रुपये और लैम रिसर्च ने 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा, एएसएमएल (ASML) जैसी दुनिया की प्रमुख कंपनी ने भी भारत में अपना नया कार्यालय खोल लिया है। इन बड़े निवेशों से देश के युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में भी एक नया दौर शुरू होगा।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की बड़ी पहल: गुजरात और असम में चिप प्लांट
भारत की प्रमुख औद्योगिक कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने सेमीकंडक्टर सेक्टर में सबसे बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने गुजरात के धोलेरा और पूर्वोत्तर राज्य असम में अपनी अत्याधुनिक इकाइयों के लिए कुल 1.18 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश किया है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स देश के पहले 300-मिलीमीटर सेमीकंडक्टर फैब का मुख्य ग्राहक बन गया है, जिसकी उत्पादन क्षमता प्रति माह 50,000 वेफर्स की होगी।
यह पहल भारत को घरेलू स्तर पर चिप निर्माण के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस जैसे कई उद्योगों को अब स्थानीय स्तर पर ही हाई-टेक चिप्स मिल सकेंगी, जिससे विदेशी आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी और देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी सुरक्षित रहेगा।
विकसित भारत का रोडमैप: राज्यों के साथ वित्त मंत्रालय का दो दिवसीय मंथन
एक तरफ जहां तकनीकी मोर्चे पर देश में बड़े काम हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश की आर्थिक नीतियों को गति देने के लिए वित्त मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ-साथ देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इस मंथन का मुख्य उद्देश्य 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच नीतिगत प्राथमिकताओं को बेहतर तालमेल के साथ आगे बढ़ाना था।
बैठक के दौरान आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने स्पष्ट किया कि देश के सर्वांगीण विकास के लिए केवल सरकारी बजट ही पर्याप्त नहीं हो सकता। इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी और वित्तपोषण बेहद अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों को मिलकर ऐसी नीतियां बनानी होंगी जो उद्योगपतियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करें और कारोबार करना आसान बनाएं।
निजी निवेश और पूंजीगत व्यय पर जोर: मुख्य आर्थिक सलाहकार के सुझाव
सम्मेलन में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने अपने संबोधन में कहा कि 'विकसित भारत' का सपना तभी पूरा हो सकता है जब देश के सभी राज्य आर्थिक रूप से मजबूत और विकसित हों। उन्होंने राज्यों के लिए विशेष रूप से निजी निवेश का अनुकूल माहौल तैयार करने, निवेश की गुणवत्ता में सुधार करने और अपने पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) को लगातार बढ़ाने को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया।
नागेश्वरन ने जोर देकर कहा कि राज्यों को वित्तीय अनुशासन अपनाते हुए वर्ष 2031-32 तक अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का कम से कम 3 प्रतिशत हिस्सा पूंजीगत व्यय के रूप में खर्च करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने बैंकिंग सेक्टर की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के लिए बैंकों द्वारा वित्तपोषण के नए और सुगम स्रोत तैयार किए जा रहे हैं।
"विकसित भारत के निर्माण के लिए केंद्र और राज्यों की गहरी साझेदारी सबसे अहम है। अकेले सरकारी बजट से यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता, इसमें निजी क्षेत्र का वित्तपोषण भी बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।" — अनुराधा ठाकुर, सचिव, आर्थिक मामलों का विभाग
निष्कर्ष: सहयोगात्मक संघवाद और तकनीक से तय होगी देश की तकदीर
सेमीकंडक्टर उद्योग में हो रहे ऐतिहासिक निवेश और राज्यों के साथ वित्त मंत्रालय की यह उच्चस्तरीय बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांत पर चलते हुए जब केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करती हैं, तो जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं।
आने वाले वर्षों में जब ये तमाम सेमीकंडक्टर प्लांट पूरी क्षमता के साथ उत्पादन शुरू कर देंगे, तब भारत दुनिया के चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जो वैश्विक चिप बाजार को नियंत्रित करते हैं। इसके साथ ही, राज्यों में बढ़ते पूंजीगत व्यय और निजी निवेश से देश के हर कोने में विकास की बयार बहेगी, जिससे करोड़ों नागरिकों का जीवन स्तर बेहतर होगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को एक मजबूत और ठोस आधार मिलेगा।




