इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजधानी इन दिनों किसी युद्ध के मैदान जैसी शक्ल अख्तियार कर चुकी है। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के एक अदद आह्वान से पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार किस कदर थर्राई हुई है, इसकी बानगी इस्लामाबाद की सड़कों पर साफ देखी जा सकती है। शहर को सील कर दिया गया है और चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल के साथ अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। हमारी ऑन-द-ग्राउंड पड़ताल बताती है कि यह खौफ किसी बाहरी आक्रमण का नहीं, बल्कि अपने ही मुल्क के एक लोकप्रिय जननेता और उनके समर्थकों का है।
कंटेनर्स से पटी सड़कें और कीलों से घिरा शहर
राजधानी इस्लामाबाद की ओर आने वाले तमाम रास्तों और आंतरिक मार्गों को सैकड़ों भारी-भरकम शिपिंग कंटेनर्स लगाकर पूरी तरह बंद कर दिया गया है। हालात ऐसे हैं कि इस शहर को अब 'कंटेनर सिटी' कहा जाने लगा है। सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सड़कों पर लंबी कतारों में कीलें तक बिछा दी हैं। जगह-जगह पुलिस छावनी जैसे नजारे हैं, जहां से गुजरने वाले आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहबाज सरकार का यह सख्त लॉकडाउन इस बात की गवाही देता है कि सरकार इमरान खान के समर्थकों के सैलाब से कितनी सहमी हुई है।
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राजनयिक उथल-पुथल और सिंधु जल संधि का विवाद
एक तरफ जहां आंतरिक मोर्चे पर सरकार इमरान के डर से लॉकडाउन लागू करने पर मजबूर है, वहीं अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर भी पाकिस्तान की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पहली बार एक भारतीय दल के पाकिस्तान दौरे ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। क्या यह दोनों देशों के बीच रिश्तों की बर्फ पिघलने की शुरुआत है या इसके पीछे कोई और भू-राजनीतिक वजह है? इसके साथ ही, सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर पाकिस्तानी मंत्री द्वारा शहबाज शरीफ के भाषण को 'ऐतिहासिक' बताए जाने पर सोशल मीडिया से लेकर कूटनीतिक हलकों तक में तीखी प्रतिक्रियाएं और ट्रोलिंग देखने को मिली है, जो सरकार की कमजोर होती राजनीतिक पकड़ को उजागर करती है।
निजी जीवन के विवादों के बीच राजनीतिक उबाल
इन तमाम सियासी और प्रशासनिक उठापटक के बीच, इमरान खान के खिलाफ निजी मोर्चे पर भी बयानबाजी का दौर थम नहीं रहा है। उनकी पूर्व पत्नी रेहम खान द्वारा इमरान खान पर लगाए गए गंभीर व्यक्तिगत और राजनीतिक आरोप एक बार फिर पाकिस्तानी मीडिया की सुर्खियों में छाए हुए हैं। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इन तमाम आरोपों के बावजूद इमरान खान की लोकप्रियता पर कोई खास असर नहीं पड़ा है, और यही वजह है कि सरकार उनके समर्थकों की रैली को कुचलने के लिए हर संभव हथकंडा अपना रही है।
भविष्य का असर और राजनीतिक अस्थिरता
द फ्रीलान्स की इस विशेष रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि पाकिस्तान इस समय चौतरफा संकट से गुजर रहा है। एक तरफ आर्थिक बदहाली और अंतरराष्ट्रीय दबाव है, तो दूसरी तरफ इमरान खान का बढ़ता राजनीतिक दबाव शहबाज सरकार को तानाशाही कदम उठाने के लिए मजबूर कर रहा है। 'कंटेनर सिटी' बना इस्लामाबाद इस बात का पुख्ता सुबूत है कि पाकिस्तान में लोकतंत्र आज भी बैरिकेड्स और कंटेनर्स के पीछे कैद है। आने वाले दिनों में यह टकराव और गहरा सकता है, जिससे देश की स्थिरता पर लंबे समय तक असर पड़ना तय है।








