सिद्धिमा से करीना बनने तक की दिलचस्प कहानी
बॉलीवुड की 'बेबो' यानी करीना कपूर खान हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित कपूर खानदान की पांचवीं पीढ़ी की उन चुनिंदा कलाकारों में से हैं, जिन्होंने पिछले ढाई दशकों से अपने अभिनय का जादू बिखेरा हुआ है। पर्दे पर करीना का बिंदास अंदाज हो, या फिर निजी जीवन में उनके बेबाक फैसले, वह हमेशा से चर्चा के केंद्र में रही हैं। उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जिनके बारे में उनके आम प्रशंसक कम ही जानते हैं।
करीना का जन्म 21 सितंबर 1980 को रणधीर कपूर और बबीता के घर हुआ था। हिंदी सिनेमा के महान शोमैन और उनके दादा राज कपूर ने बड़े प्यार से उनका नाम 'सिद्धिमा' रखा था। हालांकि, बाद में उनकी मां बबीता ने इस नाम को बदलकर 'करीना' कर दिया, जो आज पूरी दुनिया में एक ब्रांड बन चुका है। कपूर खानदान की इस लाडली ने अपने परिवार की फिल्मी विरासत को बेहद शानदार तरीके से आगे बढ़ाया है।
बचपन से ही फिल्मी माहौल में पली-बढ़ी करीना के लिए अभिनय की दुनिया में आना कोई अछूती बात नहीं थी। घर में दादा राज कपूर, पिता रणधीर कपूर, चाचा ऋषि कपूर और रणधीर कपूर जैसे दिग्गज कलाकारों को देखकर उन्होंने बहुत कम उम्र में ही अभिनय की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था। हालांकि, उनके सफर की शुरुआत उतनी आसान नहीं थी जितनी बाहर से दिखाई देती है।
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'कहो ना प्यार है' से डेब्यू का अधूरा सपना
करीना कपूर के फिल्मों में आने की कहानी भी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। निर्देशक राकेश रोशन अपनी बहुचर्चित फिल्म 'कहो ना प्यार है' से अपने बेटे ऋतिक रोशन और करीना कपूर को एक साथ लॉन्च करने वाले थे। करीना ने इस फिल्म की शूटिंग भी शुरू कर दी थी और कुछ हिस्से शूट भी हो चुके थे। लेकिन कुछ दिनों बाद ही करीना की मां बबीता और निर्देशक राकेश रोशन के बीच फिल्म की स्क्रिप्ट और एक्ट्रेस के रोल को लेकर मतभेद पैदा हो गए।
बबीता को ऐसा लगा कि फिल्म में पूरा स्पेस और फोकस सिर्फ ऋतिक रोशन पर है, जबकि करीना के किरदार को बहुत सीमित कर दिया गया है। अपनी बेटी के करियर को लेकर बबीता काफी सतर्क थीं और वह नहीं चाहती थीं कि करीना की पहली फिल्म में उनका प्रभाव कमजोर पड़े। इस रचनात्मक असहमति के चलते करीना ने इस सुपरहिट फिल्म से किनारा कर लिया और ऋतिक के अपोजिट अमीषा पटेल को कास्ट किया गया।
यह फैसला करीना के शुरुआती करियर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। जहां एक तरफ 'कहो ना प्यार है' बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर साबित हुई, वहीं करीना को अपने असली डेब्यू के लिए कुछ और महीनों का इंतजार करना पड़ा। हालांकि, इस शुरुआती झटके ने उन्हें अभिनय के प्रति और अधिक गंभीर बना दिया।
अभिषेक बच्चन के साथ 'रिफ्यूजी' से की सिनेमाई शुरुआत
साल 2000 में आखिरकार करीना कपूर ने जेपी दत्ता की फिल्म 'रिफ्यूजी' से बड़े पर्दे पर कदम रखा। इस फिल्म में उनके साथ अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक बच्चन ने भी अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। फिल्म में दोनों की जोड़ी को सराहा गया, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई और फ्लॉप साबित हुई।
बावजूद इसके, करीना के काम को समीक्षकों ने नोटिस किया। उनकी आंखों की गहराई और स्क्रीन प्रेजेंस ने बता दिया था कि वह लंबी रेस का घोड़ा हैं। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 'देव', 'ओंकारा', 'तलाश', 'कभी खुशी कभी गम', 'चमेली', 'जब वी मेट' और 'बजरंगी भाईजान' जैसी बेहतरीन फिल्मों में अपनी वर्सेटाइल एक्टिंग का लोहा मनवाया।
"सिनेमा मेरा जीवन रहा है और मैंने हर किरदार में अपनी पूरी ईमानदारी झोंकी है। दर्शकों का प्यार ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है।" — करीना कपूर खान, अभिनेत्री
निजी जिंदगी के उतार-चढ़ाव और सैफ से निकाह
करीना कपूर का व्यक्तिगत जीवन भी मीडिया की सुर्खियों में रहा है। साल 2004 में फिल्म 'फिदा' के सेट पर उनकी नजदीकियां अभिनेता शाहिद कपूर से बढ़ीं। दोनों ने अपने रिश्ते को कभी छुपाया नहीं और खुलकर अपने प्यार का इजहार किया। एक समय ऐसा था जब दोनों की शादी की खबरें भी उड़ने लगी थीं, लेकिन लंबे समय तक डेट करने के बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए।
इसके बाद फिल्म 'टशन' की शूटिंग के दौरान करीना की मुलाकात खुद से 10 साल बड़े अभिनेता सैफ अली खान से हुई। सेट पर शुरू हुई यह दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। तमाम चर्चाओं और उम्र के फासले को दरकिनार करते हुए, इस जोड़े ने 16 अक्टूबर 2012 को शादी कर ली। शादी के बाद भी करीना ने अपने काम से समझौता नहीं किया और लगातार चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं चुनती रहीं।
साल 2016 में उन्होंने अपने पहले बेटे तैमूर अली खान का स्वागत किया। तैमूर के नाम को लेकर सोशल मीडिया पर एक समय काफी विवाद भी हुआ था, लेकिन इस जोड़े ने हमेशा अपनी शर्तों पर जिंदगी जी। इसके बाद साल 2021 में उनके दूसरे बेटे जहांगीर का जन्म हुआ।
ओटीटी पर डेब्यू और नए दौर की करीना
बदते वक्त के साथ करीना कपूर ने खुद को पूरी तरह से बदला है। अपने फिल्मी सफर के 25वें साल के करीब पहुंचते-चाहते उन्होंने सुजॉय घोष की फिल्म 'जाने जान' के जरिए ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कदम रखा। इस थ्रिलर फिल्म में उनके अभिनय की जमकर तारीफ हुई। इसके बाद 'द क्रू' जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने यह साबित कर दिया कि आज भी वह बॉक्स ऑफिस पर अपने दम पर फिल्में खींचने का माद्दा रखती हैं।
करीना कपूर खान का यह सफर इस बात की मिसाल है कि कैसे एक स्टारकिड ने अपनी मेहनत, अनुशासन और बेहतरीन निर्णयों के दम पर हिंदी सिनेमा में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है। उनके जीवन के ये अनसुने पहलू आज भी उनके फैंस को प्रेरित करते हैं।








