लखनऊ में सजा ज्योतिष और अध्यात्म का बड़ा दरबार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय प्राचीन संस्कृति, सनातन परंपरा और विज्ञान के अद्भुत समन्वय का एक अनूठा नजारा देखने को मिला। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षा गृह में दो दिवसीय राष्ट्रीय धर्म ज्योतिष सम्मेलन का समापन हुआ। इस भव्य आयोजन में देश के कोने-कोने से आए ज्योतिषविदों, वास्तु विशेषज्ञों, हीलिंग एक्सपर्ट्स और आध्यात्मिक गुरुओं ने हिस्सा लिया और भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से अपने विचार रखे। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आधुनिक युग में प्राचीन सनातन ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आम जनमानस तक पहुंचाना था ताकि लोग अपनी जड़ों से जुड़े रहें।
आयोजन के दौरान प्रेक्षा गृह का पूरा माहौल पूरी तरह से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आया। मां अष्टभुजी राष्ट्रीय धर्म ज्योतिष केंद्र के बैनर तले आयोजित इस सम्मेलन में ज्योतिष की केवल पारंपरिक शाखाओं पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि समकालीन जीवनशैली में इनकी प्रासंगिकता और उपयोगिता पर भी गंभीर मंथन किया गया। कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले विद्वानों ने एक स्वर में माना कि आज के भागदौड़ भरे और तनावपूर्ण जीवन में मानसिक शांति और आत्मिक बल प्राप्त करने के लिए ज्योतिष और अध्यात्म का मार्ग बेहद कारगर साबित हो सकता है।
दो दिनों तक चले इस महाकुंभ में विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित शोधकर्ताओं और ज्योतिष शास्त्रियों ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान न केवल गंभीर वैचारिक सत्र हुए, बल्कि भारतीय संस्कृति की छटा बिखेरने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। भरतनाट्यम और शास्त्रीय संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद हर शख्स का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन रतन शर्मा और गर्गी ने बेहद सधे हुए अंदाज में किया, जिससे पूरा आयोजन दर्शकों के लिए एक यादगार अनुभव बन गया।
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वैदिक ज्योतिष से लेकर टैरो और हीलिंग साइंसेज पर मंथन
सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन ज्योतिष की अलग-अलग विधाओं और उनके व्यावहारिक इस्तेमाल पर विशेषज्ञों ने खुलकर बातचीत की। कार्यक्रम में प्रेडिक्टिव एस्ट्रोलॉजी, वैदिक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, अंक शास्त्र, टैरो रीडिंग, फेस रीडिंग, हस्तरेखा विज्ञान, एनर्जी हीलिंग और रेकी जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे ये सभी विधाएं विज्ञान और प्रकृति के नियमों पर आधारित हैं और मानव जीवन पर इनका गहरा प्रभाव पड़ता है.
विशेषज्ञों ने आम जनता के मन में ज्योतिष और इससे जुड़े अंधविश्वासों को लेकर उठने वाले सवालों के वैज्ञानिक और तार्किक जवाब भी दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्योतिष कोई जादू-टोना नहीं बल्कि गणित, खगोल शास्त्र और ऊर्जा संतुलन का एक मिला-जुला रूप है। वास्तु शास्त्र के जानकारों ने घर और दफ्तर की बनावट में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखने के आसान और प्रभावी उपाय साझा किए। वहीं, हीलिंग साइंसेज और रेकी विशेषज्ञों ने मानसिक तनाव को कम करने और शरीर की आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने की तकनीकें सिखाईं।
कार्यक्रम के दौरान एक विशेष आकर्षण का केंद्र अंक शास्त्र और टैरो रीडिंग के स्टॉल और सत्र रहे, जहां युवाओं ने खासी दिलचस्पी दिखाई। आज की युवा पीढ़ी जो विज्ञान और तर्क को सर्वोपरि मानती है, उसने भी इन प्राचीन विधाओं के पीछे छिपे गणितीय और तार्किक पहलुओं को समझा। विशेषज्ञों ने बताया कि किस तरह जन्मकुंडली और ग्रहों की चाल का अध्ययन करके व्यक्ति अपने जीवन की दिशा को बेहतर बना सकता है और आने वाली चुनौतियों के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार कर सकता है।
युवाओं को आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना बेहद जरूरी: ब्रजेश पाठक
सम्मेलन के समापन समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक आयोजनों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि हम अपनी युवा पीढ़ी को उनकी सांस्कृतिक जड़ों और महान ऐतिहासिक परंपराओं से परिचित कराएं। पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण से दूर रहकर अपनी प्राचीन धरोहर पर गर्व करने का समय आ गया है।
"भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराएं हमारे जीवन का आधार हैं। ऐसे आयोजन हमारी प्राचीन संस्कृति और ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम करते हैं। आज के युवाओं को धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि वे जीवन के हर मोड़ पर मजबूत और नैतिक बने रहें।" — ब्रजेश पाठक, उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
उपमुख्यमंत्री ने आयोजकों की इस पहल की भूरी-भरी प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन समाज को एक सकारात्मक दिशा देते हैं। उन्होंने बल दिया कि जब युवा अपनी परंपराओं से जुड़ते हैं तो उनमें राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और मानवीय मूल्यों की भावना स्वतः जागृत होती है। सरकार भी ऐसे आयोजनों का हमेशा समर्थन करती है जो समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का काम करते हैं।
ज्योतिष को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का महाअभियान
मुख्य आयोजक डॉ. रजनी अवस्थी ने सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस दो दिवसीय आयोजन का मूल मकसद ज्योतिष को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के साथ मजबूती से जोड़ना था। उन्होंने कहा कि आज के समय में ज्योतिष को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं, जिन्हें दूर करना और युवा पीढ़ी को इसका सही और वैज्ञानिक ज्ञान कराना बेहद जरूरी था। इस सम्मेलन के माध्यम से हमने युवाओं को ज्योतिष की अलग-अलग विधाओं की सही जानकारी देने और उन्हें जीवन का सही रास्ता दिखाने का प्रयास किया है।
डॉ. अवस्थी ने बताया कि सम्मेलन में देश भर से आए ज्योतिष विशेषज्ञों ने अपने लंबे शोध और अनुभवों के निचोड़ को साझा किया, जिससे आने वाले समय में शोधार्थियों और इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवाओं को बहुत मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के इन शोध पत्रों और अनुभवों को एक दस्तावेज के रूप में संरक्षित किया जाएगा ताकि भविष्य में अध्ययन करने वालों को प्रामाणिक सामग्री मिल सके। आयोजन समिति ने आने वाले वर्षों में इस तरह के सम्मेलनों को और भी बड़े पैमाने पर आयोजित करने का संकल्प लिया है।
इस भव्य आयोजन का मूल संदेश 'ज्ञान से जागरण, धर्म से संस्कार, ज्योतिष से मार्गदर्शन और अध्यात्म से विश्व कल्याण' तय किया गया था, जो सम्मेलन के हर सत्र में स्पष्ट रूप से झलकता रहा। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि ज्ञान और विज्ञान का उद्देश्य मानवता की भलाई होना चाहिए और अध्यात्म ही वह माध्यम है जो पूरे विश्व को एक सूत्र में पिरो सकता है।
दिग्गजों और समाजसेवियों की मौजूदगी ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा
इस ऐतिहासिक सम्मेलन में राजनीति, कला, समाज सेवा और ज्योतिष जगत की कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान समाजसेविका नम्रता पाठक, पूर्व एमएलसी अरविंद त्रिपाठी और प्रसिद्ध अभिनेता एवं निर्देशक अखिलेश श्रीवास्तव विशेष रूप से उपस्थित रहे। इन सभी गणमान्य अतिथियों ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए ऐसे आयोजनों को बेहद जरूरी बताया।
विशेषज्ञों और अतिथियों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जिस तरह से आज के दौर में लोग भौतिकतावाद की अंधी दौड़ में अपनी मानसिक शांति खो रहे हैं, वहां अध्यात्म और ज्योतिष उन्हें पुनः संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा दे सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी सम्मानित विशेषज्ञों और अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस सफल आयोजन ने राजधानी लखनऊ में एक नया वैचारिक और आध्यात्मिक इतिहास रच दिया है, जिसकी गूंज लंबे समय तक बनी रहेगी।




