मेरठ के आसमान में गूंजी भारतीय वायुसेना के विमानों की गर्जना
उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और क्रांति की भूमि कहे जाने वाले मेरठ में इन दिनों देश की सैन्य ताकत का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। भारतीय वायु सेना के प्रसिद्ध सूर्यकिरण विमानों ने शहर के आसमान में लगातार दूसरे दिन भी ऐसे हैरतअंगेज और दिल दहला देने वाले करतब दिखाए कि हर देखने वाला दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गया। इस भव्य एयर शो को देखने के लिए मेरठ और आसपास के जिलों से हजारों की संख्या में आम लोग पहुंचे थे। आसमान में कलाबाजी दिखाते इन विमानों की गड़गड़ाहट ने पूरे शहर में एक अलग ही जोश और देशभक्ति का माहौल पैदा कर दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस ऐतिहासिक क्षण को अपने कैमरे में कैद करने को बेताब दिखा।
इस एयर शो की सबसे खास बात यह रही कि इसमें केवल फाइटर जेट्स की उड़ान ही नहीं थी, बल्कि यह नए और बदलते भारत की उस सैन्य क्षमता का प्रतीक बन गया, जो आज दुनिया के सामने सीना तानकर खड़ी है। मेरठ की धरती पर पहली बार इस तरह का एयर शो आयोजित होने से स्थानीय लोगों में गजब का उत्साह देखा गया। वायु सेना के जांबाज पायलटों ने जिस सटीकता और अनुशासन के साथ आसमान में आसमान छूते हुए करतब दिखाए, उसने देश के रक्षा बलों की अदम्य इच्छाशक्ति और उच्च स्तरीय ट्रेनिंग की एक बेहतरीन मिसाल पेश की।
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रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ का कड़ा संदेश: नया भारत आंख दिखाने पर देता है जवाब
इस शानदार एयर शो के दौरान केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी विशेष रूप से मौजूद रहे। विमानों की गड़गड़ाहट और आसमान में बन रहे सफेद धुएं के पैटर्न के बीच उन्होंने 'दैनिक जागरण' से खास बातचीत की। देश की सुरक्षा और रणनीतिक बदलावों पर बात करते हुए उन्होंने एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत हमेशा से शांति, अहिंसा और सद्भाव में विश्वास रखने वाला देश रहा है और यह भगवान बुद्ध का देश है। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि कोई देश हमारी संप्रभुता को चुनौती दे और हम चुपचाप देखते रहें।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि अगर कोई देश भारत को आंख दिखाने की कोशिश करेगा, तो यह नया भारत अब शिव तांडव करना भी अच्छी तरह जानता है। उनका यह बयान मौजूदा भू-राजनीतिक हालात और भारत की आक्रामक रक्षा नीति को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का भारत अपनी सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करता है। हमारी सेनाएं हर मोर्चे पर दुश्मन को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद और सक्षम हैं।
ऑपरेशन सिंदूर और स्वदेशी हथियारों की ताकत
देश की सैन्य क्षमताओं का जिक्र करते हुए केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान देश ने अपनी स्वदेशी रक्षा प्रणालियों और हथियारों की ताकत का लोहा पूरी दुनिया को मनवाया। भारत ने साबित कर दिया कि वह अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अब विदेशी ताकतों पर निर्भर रहने वाला देश नहीं है। स्वदेशी तकनीक से बने हथियारों और मिसाइलों ने दुश्मन देश पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।
"शांति और सद्भाव में विश्वास रखने वाला हमारा बुद्ध का देश है, लेकिन कोई आंख दिखाएगा तो अब शिव तांडव भी करना जानता है, यह नया भारत है। आज हमारे सशस्त्र बलों का पराक्रम और स्वदेशी रक्षा प्रणालियां दुनिया को हमारी नई सैन्य ताकत का परिचय करा रही हैं।" — संजय सेठ, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री
उन्होंने पुराने समय और आज के दौर की तुलना करते हुए कहा कि एक समय था जब देश अपनी रक्षा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर था। लेकिन आज मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश के भीतर ही अत्याधुनिक हथियार, तोपें और विमान तैयार किए जा रहे हैं। इससे न केवल हमारी सेनाओं की मारक क्षमता बढ़ी है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी एक नई मजबूती मिली है।
रक्षा आयात से निर्यात तक का सफर: आंकड़े बयां कर रहे हैं बदलाव की कहानी
संजय सेठ ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कांग्रेस के शासनकाल और आज के दौर में देश की रक्षा नीति में जमीन-आसमान का फर्क आ चुका है। पहले जहां भारत अपनी रक्षा जरूरतों का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता था, वहीं आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। वर्तमान में भारत अपने द्वारा विकसित किए गए रक्षा उपकरणों का 65 प्रतिशत हिस्सा दुनिया के 102 से अधिक देशों को निर्यात कर रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रक्षा उद्योग अब वैश्विक मानकों पर खरा उतर रहा है।
उन्होंने रक्षा बजट और रक्षा उत्पादन के आंकड़ों पर रोशनी डालते हुए बताया कि पहले जहां देश का रक्षा बजट महज 46 हजार करोड़ रुपये के आसपास होता था, वहीं आज इसे बढ़ाकर एक लाख 78 हजार करोड़ रुपये से अधिक कर दिया गया है। इसके अलावा, जो देश कभी कुछ सौ करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और एक्सपोर्ट करता था, वह आज लगभग 36 हजार करोड़ रुपये के रक्षा उत्पाद दुनिया भर के देशों को बेच रहा है। यह परिवर्तन भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है।
मेरठ में रक्षा उत्पादन इकाइयों की स्थापना की मांग और स्थानीय विकास
मेरठ के स्थानीय विकास और सैन्य महत्व पर बात करते हुए रक्षा राज्य मंत्री ने राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकान्त बाजपेयी की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉ. बाजपेयी हर जनहित के मुद्दे पर बेहद सक्रिय रहते हैं और मेरठ के विकास के लिए हमेशा दिल्ली तक आवाज उठाते हैं। चाहे सड़क मार्ग हो, रेल नेटवर्क हो या फिर आधुनिक परिवहन प्रणाली, मेरठ ने हर क्षेत्र में तरक्की की है। शहर में नमो भारत रैपिड रेल की रफ्तार ने लोगों का सफर आसान कर दिया है और अब सूर्यकिरण एयर शो ने आसमान में भी शहर का नाम रोशन कर दिया है।
बैठक और मुलाकातों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि मेरठ में रक्षा उत्पादन इकाइयों (डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स) की स्थापना को लेकर डॉ. लक्ष्मीकान्त बाजपेयी पहले ही रक्षा मंत्री और उनसे मुलाकात कर चुके हैं। मेरठ और आसपास के क्षेत्र में रक्षा उत्पादन इकाइयां लगने से न केवल स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि देश की रक्षा तैयारियां भी और अधिक मजबूत होंगी। मेरठ के लोगों का हवाई उड़ान और आधुनिक उद्योगों का यह सपना अब जल्द ही हकीकत में बदलता हुआ नजर आ रहा है।




