नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पाने का सपना देख रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने नीट पीजी काउंसलिंग 2026 के पहले दौर की पंजीकरण प्रक्रिया आधिकारिक वेबसाइट mcc.nic.in पर शुरू कर दी है। जो छात्र इस परीक्षा में पास हुए हैं, वे अब काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तारीख 21 अक्टूबर तय की गई है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान छात्रों को अपने सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखने होंगे ताकि रजिस्ट्रेशन में कोई परेशानी न आए।
काउंसलिंग का यह पहला दौर उन सभी युवाओं के लिए बहुत अहम है जो डॉक्टर बनने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी यानी एमसीसी ने इस साल की काउंसलिंग प्रक्रिया में कुछ बड़े बदलाव भी किए हैं। छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार पहली बार फ्रीज और फ्लोट जैसे विकल्प दिए गए हैं। इन विकल्पों की मदद से छात्र अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स को लेकर ज्यादा लचीले फैसले ले सकेंगे। जानकारों का मानना है कि इन नए नियमों से सीट आवंटन की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी बनेगी।
मल्टी-राउंड काउंसलिंग और रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया
नीट पीजी काउंसलिंग के इस पहले दौर में हिस्सा लेने के लिए छात्रों को सबसे पहले एमसीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां उन्हें अपना नया रजिस्ट्रेशन करना होगा और अपने लॉगिन विवरण दर्ज करने होंगे। इसके बाद अपनी पसंद के मेडिकल कॉलेज और कोर्स की सूची भरनी होगी। वेबसाइट पर पूरा शेड्यूल विस्तार से दिया गया है ताकि छात्रों को तारीखों को लेकर किसी तरह का भ्रम न हो। विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को च्वाइस फिलिंग करते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए ताकि बाद में पछताना न पड़े।
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद काउंसलिंग के विभिन्न राउंड चलाए जाएंगे। हर राउंड के बाद सीट का आवंटन किया जाएगा। जिन छात्रों को पहली सूची में मनपसंद कॉलेज नहीं मिलेगा, वे अगले दौर की काउंसलिंग का इंतजार कर सकते हैं। एमसीसी ने साफ कर दिया है कि तय समय सीमा के भीतर ही सारी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। अगर कोई छात्र समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाता है, तो उसे पहले दौर में मौका नहीं मिलेगा। इसलिए समय रहते सभी जरूरी काम पूरे कर लेना ही समझदारी है.
पहली बार जुड़े फ्रीज-फ्लोट के नए विकल्प
इस साल की काउंसलिंग प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत नए विकल्पों का जुड़ना है। एमसीसी ने पहली बार छात्रों को फ्रीज और फ्लोट का विकल्प दिया है। अगर किसी छात्र को उसकी पसंद की सीट मिल जाती है और वह उसी कॉलेज में पढ़ना चाहता है, तो वह सीट को फ्रीज कर सकता है। वहीं, अगर कोई छात्र सीट मिलने के बाद भी बेहतर विकल्प की तलाश जारी रखना चाहता है, तो वह फ्लोट विकल्प का चुनाव कर सकता है। यह व्यवस्था इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी कोर्स की काउंसलिंग की तर्ज पर शुरू की गई है।
मैदान पर उतरी हमारी टीम ने पाया कि देश भर के मेडिकल छात्रों और उनके अभिभावकों में इन नए बदलावों को लेकर काफी चर्चा है। कई छात्र इन नए विकल्पों को लेकर थोड़े असमंजस में भी हैं। इसे दूर करने के लिए एमसीसी ने अपनी वेबसाइट पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। छात्र और उनके परिवार वाले इन निर्देशों को पढ़कर अपनी शंकाओं का समाधान कर सकते हैं। काउंसलिंग का यह पूरा चक्र आने वाले हफ्तों में तेजी से आगे बढ़ेगा और मेडिकल सीटों पर दाखिला पाने की दौड़ अपने चरम पर होगी।
छात्रों के लिए जरूरी तारीखें और एहतियाती कदम
पंजीकरण शुरू होने के साथ ही छात्रों को अपनी कागजी कार्रवाई पूरी करने की सलाह दी जाती है। अंक पत्र, डिग्री प्रमाण पत्र, और पहचान पत्र जैसे तमाम दस्तावेज स्कैन करके अपने पास तैयार रखने चाहिए। किसी भी गलती से बचने के लिए फॉर्म जमा करने से पहले उसे दो बार जांच लेना बेहद जरूरी है। 21 अक्टूबर की समय सीमा नजदीक आते ही वेबसाइट पर लोड बढ़ सकता है, इसलिए अंतिम दिन का इंतजार किए बिना समय से पहले ही अपना पंजीकरण पूरा कर लें।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि इस साल की नीट पीजी काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और नए सुधारों के साथ आगे बढ़ रही है। प्रशासन ने भी किसी भी तकनीकी बाधा से निपटने के पुख्ता इंतजाम किए हैं। जैसे-जैसे काउंसलिंग के अगले चरण सामने आएंगे, हमारी टीम हर अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें और किसी भी अफवाह से दूर रहें।












