पश्चिम एशिया (West Asia) में इजरायल, ईरान और लेबनान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। इस संकट का भारत पर पड़ने वाले बहुआयामी प्रभावों का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 'ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स' (GoM) की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में भारत की सुरक्षा, रणनीतिक हितों और वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर ठोस योजना तैयार की जाएगी।
[मुख्य अपडेट] रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पश्चिम एशिया संकट पर मंत्रियों के समूह (GoM) की बैठक का नेतृत्व करेंगे। इस बैठक में विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों के भी शामिल होने की संभावना है। चर्चा का मुख्य फोकस युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सुरक्षा और तेल आपूर्ति सुनिश्चित करना होगा।
[विस्तृत विवरण] बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की जाएगी: 1. भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा: पश्चिम एशिया में लाखों भारतीय रहते हैं और काम करते हैं। युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित निकालने (Evacuation) की रणनीति पर विचार होगा। 2. आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain): लाल सागर में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री व्यापारिक मार्गों पर पड़ रहे असर और माल ढुलाई की बढ़ती लागत पर मंथन किया जाएगा। 3. ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के लिए काफी हद तक इस क्षेत्र पर निर्भर है। तेल की कीमतों में उछाल को रोकने और वैकल्पिक इंतजामों पर चर्चा की जाएगी।
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[पृष्ठभूमि] इजरायल और हिजबुल्लाह/ईरान के बीच बढ़ते सीधे टकराव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। भारत ने हमेशा से ही बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की वकालत की है। हालांकि, हालिया मिसाइल हमलों और जमीनी कार्रवाई ने नई दिल्ली की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के सामरिक और आर्थिक हितों के लिए बेहद संवेदनशील है।
[प्रभाव] इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद सरकार नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर सकती है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के रुख और घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के उपायों पर भी इसका सीधा असर दिखेगा। सुरक्षा एजेंसियां और दूतावास अलर्ट मोड पर हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।



