पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी शहर पेशावर से इस वक्त एक बहुत ही बुरी और दर्दनाक खबर सामने आ रही है। यहां एक स्थानीय स्कूल की पुरानी और जर्जर छत अचानक से भरभरा कर नीचे गिर गई। इस हादसे के वक्त स्कूल के कमरे में पढ़ाई चल रही थी और कई मासूम बच्चे अंदर बैठे थे। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक इस भयानक हादसे में अब तक 18 स्कूली बच्चों और एक शिक्षक की जान जा चुकी है। इसके अलावा करीब 40 से ज्यादा छात्र गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और राहत बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंच गया। प्रशासन के नुमाइंदों ने तुरंत स्थानीय लोगों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया। मलबे के नीचे दबे बच्चों को निकालने के लिए क्रेन और दूसरे जरूरी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि कई बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है ताकि जख्मी बच्चों का समय पर और सही इलाज किया जा सके।
प्रशासन की लापरवाही और जर्जर इमारतें
इस बड़े हादसे के बाद इलाके के लोगों में स्थानीय प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्कूल भवन लंबे समय से बहुत जर्जर हालत में था। स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग को कई बार इस बारे में शिकायत दी गई थी कि इमारत कभी भी गिर सकती है। इसके बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया और न ही इसकी मरम्मत कराई गई। जनता का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था जो उसने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया।
इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे पेशावर शहर में शोक की लहर दौड़ गई है और हर आंख नम है। जिन परिवारों ने अपने छोटे बच्चों को इस हादसे में खोया है उनका रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक मलबे के नीचे अभी भी कुछ और बच्चों के दबे होने की आशंका बनी हुई है। इसलिए बचाव दल दिन-रात पूरी ताकत के साथ राहत कार्यों को आगे बढ़ा रहा है ताकि जल्द से जल्द सभी को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
सेना का घेरा और राजनीतिक हलचल
इस हादसे के साथ ही इलाके में सुरक्षा बलों की हलचल भी अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है। खबरों के मुताबिक घटनास्थल और उसके आसपास के इलाकों को सुरक्षा बलों ने अपने घेरे में ले लिया है। इस पूरे मामले को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में भी बयानबाजी और आरोपों का दौर शुरू हो चुका है। विपक्षी दल सरकार और स्थानीय प्रशासन की नाकामी को खुलकर सामने ला रहे हैं और इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
आम जनता का कहना है कि अगर सरकार समय रहते सरकारी और निजी स्कूलों की इमारतों की जांच करवा लेती तो इतनी जानें नहीं जातीं। देश में बुनियादी शिक्षा ढांचे की बदहाली एक बार फिर इन मासूम बच्चों की जान जाने के बाद खुलकर सामने आ गई है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर गरीब और आम परिवारों के बच्चे कब तक इस तरह की व्यवस्था की भेंट चढ़ते रहेंगे।
अस्पतालों में मचा कोहराम और अपनों की तलाश
पेशावर के मुख्य अस्पतालों के बाहर इस समय सैकड़ों की संख्या में परेशान मां-बाप और रिश्तेदार जमा हैं। हर कोई अपने जिगर के टुकड़े की सलामती की खबर सुनने के लिए अस्पताल के चक्कर काट रहा है। कई माता-पिता अपने बच्चों के शव देखकर बेसुध हो चुके हैं और उनके आंसुओं से पूरा माहौल गमगीन हो गया है। डॉक्टरों की टीम घायलों के इलाज में जुटी है लेकिन गंभीर रूप से घायल कई बच्चों की हालत अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है।
द फ्रीलान्स की टीम इस मामले की पल-पल की जमीनी जानकारी पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रशासन की तरफ से अभी तक मृतकों के परिवारों को किसी बड़े मुआवजे का ऐलान नहीं किया गया है लेकिन जनता में गुस्से को देखते हुए जल्द ही किसी बड़े एक्शन की उम्मीद है। स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त आपराधिक मामले दर्ज किए जाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न दोहराई जा सके।



