नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — पोप लियो को लंग कैंसर होने की बात सामने आने के बाद से दुनिया भर के मेडिकल एक्सपर्ट्स और आम लोग हैरान हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जो लोग कभी स्मोकिंग नहीं करते हैं, उन्हें भी लंग्स का कैंसर कैसे हो जाता है। बीबीसी और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गंभीर बीमारी के पीछे केवल सिगरेट या तंबाकू ही एकमात्र वजह नहीं होती है। डॉक्टरों का कहना है कि आज के समय में हमारे आसपास मौजूद हवा की खराब क्वालिटी और प्रदूषण भी इसके लिए बहुत हद तक जिम्मेदार हैं। इस मामले में पोप लियो को आज सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती होना है, जिसके बाद उनके इलाज की आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
आम तौर पर लोग यही सोचते हैं कि फेफड़ों का कैंसर केवल उन्हीं लोगों को होता है जो बहुत ज्यादा धूम्रपान करते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस इससे अलग तस्वीर पेश करता है और साफ कहता है कि नॉन-स्मोकर्स में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। न्यूज18 हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर सही समय पर इस बीमारी का पता चल जाए तो सर्जरी और इलाज के जरिए मरीज की जान बचाई जा सकती है। जानी-मानी अभिनेत्री शर्मिला टैगोर का उदाहरण हमारे सामने है, जिन्हें स्टेज-जीरो में ही लंग्स कैंसर का पता चल गया था और वह बिल्कुल ठीक हो गईं। इसलिए समय रहते लक्षणों की पहचान करना और डॉक्टर से जांच करवाना बेहद जरूरी हो जाता है ताकि बीमारी को शुरुआत में ही रोका जा सके।
लंग नोड्यूल क्या होता है और यह कितना खतरनाक है?
जब किसी इंसान के फेफड़ों में छोटी सी गांठ या धब्बा दिखाई देता है, तो मेडिकल की भाषा में उसे लंग नोड्यूल कहा जाता है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, हर लंग नोड्यूल कैंसर नहीं होता है, लेकिन इनमें से कुछ गांठें समय के साथ खतरनाक रूप ले सकती हैं। डॉक्टर सीटी स्कैन और अन्य जांच के जरिए यह पता लगाते हैं कि यह नोड्यूल साधारण इन्फेक्शन की वजह से है या इसमें कैंसर के शुरुआती लक्षण छिपे हैं। पोप लियो के मामले में भी डॉक्टर्स ने पूरी जांच के बाद सर्जरी का फैसला लिया है ताकि समय रहते खतरे को पूरी तरह से टाला जा सके।
फेफड़ों की इस गंभीर बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानना आम इंसान के लिए बहुत जरूरी है ताकि समय रहते अस्पताल पहुंचा जा सके। अगर किसी को लगातार सूखी खांसी आ रही है, सांस लेने में दिक्कत हो रही है या सीने में बिना किसी वजह के दर्द रहता है, तो उसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा कई बार बलगम के साथ खून आना या आवाज में अचानक बदलाव होना भी बड़े खतरे का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत किसी अच्छे चेस्ट सर्जन या ऑन्कोलॉजिस्ट से मिलकर पूरी मेडिकल जांच करवानी चाहिए।
आम लोगों को ऐसी बीमारी हो जाए तो क्या करना चाहिए?
अगर किसी आम इंसान को लंग्स कैंसर या फेफड़ों से जुड़ी कोई गंभीर गांठ डिटेक्ट हो जाती है, तो उसे सबसे पहले घबराने के बजाय सही डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। आज के समय में मेडिकल तकनीक इतनी आगे बढ़ चुकी है कि शुरुआती चरणों में कैंसर का इलाज पूरी तरह संभव है। डॉक्टर मरीज की उम्र, कैंसर के स्टेज और उसकी शारीरिक क्षमता को देखकर सर्जरी, कीमोथेरेपी या टार्गेटेड थेरेपी का विकल्प चुनते हैं। समय पर मिलने वाला सही इलाज मरीज की जिंदगी बचा सकता है और उसे एक स्वस्थ जीवन दे सकता है।
बढ़ता प्रदूषण, धूल-मिट्टी, फैक्ट्रियों का धुआं और घरों के अंदर इस्तेमाल होने वाले हानिकारक केमिकल भी हमारे फेफड़ों को अंदर से कमजोर कर रहे हैं। यही वजह है कि आज के दौर में सिर्फ स्मोकर्स ही नहीं बल्कि युवा और बुजुर्ग भी फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि सभी को साल में कम से कम एक बार अपना हेल्थ चेकअप जरूर करवाना चाहिए ताकि किसी भी बड़ी बीमारी की आहट समय से पहले पकड़ी जा सके।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल और निष्कर्ष
पोप लियो की सर्जरी और उनके स्वास्थ्य को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, जो यह याद दिलाता है कि बीमारी किसी को भी अपनी चपेट में ले सकती है। हमारी ग्राउंड पड़ताल और डॉक्टरों से बातचीत के बाद यह साफ है कि लाइफस्टाइल में सुधार और नियमित जांच ही इस बीमारी से बचने का सबसे बड़ा हथियार है। किसी भी तरह के असामान्य लक्षण दिखने पर डॉक्टर के पास जाने में बिल्कुल देरी न करें, क्योंकि सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।






