नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — वेटिकन से आई एक बड़ी खबर ने पूरी दुनिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम लोगों को चौंका दिया है। पोप लियो को लंग कैंसर यानी फेफड़ों का कैंसर होने की पुष्टि हुई है, जिसके इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है। इस खबर के सामने आते ही सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जो लोग कभी धूम्रपान नहीं करते, उन्हें भी फेफड़ों का कैंसर कैसे हो सकता है। मेडिकल साइंस के जानकारों का कहना है कि सिगरेट न पीने वाले लोग भी इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं क्योंकि इसके पीछे कई अन्य छिपे हुए कारण होते हैं।
आम तौर पर लोग यही सोचते हैं कि फेफड़ों का कैंसर केवल उन्हीं लोगों को होता है जो लगातार सिगरेट या बीड़ी पीते हैं। लेकिन डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के आंकड़े बताते हैं कि कुल लंग कैंसर के मामलों में एक बड़ा हिस्सा ऐसे मरीजों का होता है जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में कभी तंबाकू को हाथ तक नहीं लगाया होता है। इस श्रेणी में महिलाएं और बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। हमारे देश में जानी-मानी अभिनेत्री शर्मिला टैगोर को भी 'स्टेज-जीरो' में इस बीमारी का पता चल गया था, जिससे समय पर इलाज मिलने के कारण उनकी जान बच गई थी।
धूम्रपान न करने वालों को क्यों घेरता है लंग कैंसर?
जब एक गैर-धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को लंग कैंसर होता है, तो इसके पीछे मुख्य वजहें पूरी तरह से अलग होती हैं। सबसे बड़ा कारण हमारे आसपास की प्रदूषित हवा और जहरीला धुआं है जिसे हम हर दिन सांस के जरिए अपने अंदर लेते हैं। इसके अलावा घरों के अंदर जलने वाले कोयले या लकड़ी का धुआं, पुराना रेडॉन गैस का असर और कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण यानी परिवार में पहले किसी को यह बीमारी होना भी शामिल है। शरीर के भीतर होने वाले कुछ खास जीन बदलाव भी इस घातक बीमारी का कारण बन जाते हैं जिसे डॉक्टर जेनेटिक म्यूटेशन कहते हैं।
फेफड़ों में किसी तरह की गांठ या लंग नोड्यूल बनने पर मरीज को बहुत सतर्क होने की जरूरत होती है। हालांकि हर लंग नोड्यूल कैंसर नहीं होता है, लेकिन समय रहते इसकी जांच कराना बेहद जरूरी होता है। सीटी स्कैन या एक्स-रे के जरिए डॉक्टर इस बात का पता लगाते हैं कि गांठ खतरनाक है या सामान्य है। पोप लियो के मामले में भी शुरुआती जांच के बाद ही सर्जरी का फैसला लिया गया है ताकि बीमारी को आगे फैलने से रोका जा सके। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में अब शुरुआती चरणों में ही कैंसर का पता लगाने की तकनीक काफी विकसित हो चुकी है।
शुरुआती लक्षणों को पहचानकर कैसे बचाएं अपनी जान?
लंग कैंसर के शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग अक्सर उन्हें आम सर्दी, खांसी या जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर किसी को लगातार कई हफ्तों तक खांसी बनी रहती है, खांसी के साथ खून आता है, सीने में लगातार दर्द रहता है या बिना किसी वजह के वजन तेजी से कम होने लगता है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। इसके अलावा सांस फूलना और हमेशा थकान महसूस होना भी इसके अहम संकेत हो सकते हैं। समय रहते यदि इन लक्षणों की पहचान कर ली जाए तो कैंसर का इलाज बहुत आसानी से किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि जिन लोगों के परिवार में फेफड़ों की बीमारी का इतिहास रहा है, उन्हें साल में एक बार अपना पूरा मेडिकल चेकअप जरूर कराना चाहिए। स्मोकिंग न करने वाले लोगों को भी यह समझना होगा कि वायु प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क का इस्तेमाल करना और साफ हवा में रहना बहुत जरूरी है। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड पड़ताल में डॉक्टरों ने साफ कहा है कि बीमारी चाहे जो भी हो, यदि सही समय पर उसकी पहचान हो जाए तो मरीज को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
सर्जरी और आधुनिक इलाज से कितनी उम्मीद ब बची है?
पोप लियो के इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी का रास्ता चुना है ताकि प्रभावित हिस्से को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला जा सके। आज के समय में कैंसर की सर्जरी और कीमोथेरेपी की तकनीक इतनी एडवांस हो गई है कि मरीज पहले से कहीं ज्यादा तेजी से रिकवर करते हैं। आम लोगों को भी यह समझना चाहिए कि यदि किसी अपने में ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत बड़े अस्पताल के स्पेशलिस्ट डॉक्टर से संपर्क करें। किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय केवल प्रामाणिक मेडिकल सलाह पर ही भरोसा करना समझदारी है।





