बिहार की राजनीति में अपनी नई राजनीतिक पार्टी 'जन सुराज' के साथ सक्रिय चुनावी पारी शुरू कर चुके चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने बड़ा दांव चला है। जन सुराज ने आगामी बिहार विधान परिषद (एमएलसी) उप-चुनावों के लिए अपने प्रत्याशियों के नामों का औपचारिक ऐलान कर दिया है। उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही प्रशांत किशोर ने युवाओं को साधने के लिए एक बहुत बड़ा चुनावी वादा भी कर दिया। प्रशांत किशोर ने मंच से घोषणा की कि जन सुराज का उम्मीदवार जिस भी निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज करेगा, उस इलाके के कम से कम 10,000 युवाओं को रोजगार मुहैया कराया जाएगा।
प्रशांत किशोर की इस घोषणा को बिहार के आगामी विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है। जन सुराज पार्टी ने अपने गठन के बाद से ही राज्य की मुख्यधारा की राजनीति में बदलाव और युवाओं के पलायन को मुख्य मुद्दा बनाया है। एमएलसी चुनाव में उम्मीदवारों को उतारकर पार्टी अब सीधे तौर पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी महागठबंधन के सामने सीधी चुनौती पेश कर रही है।
रोजगार और पलायन के मुद्दे पर प्रशांत किशोर का बड़ा वादा
प्रेस कॉन्फ्रेंस और जनसंवाद के दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार की बेरोजगारी और युवाओं के पलायन पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि दशकों से बिहार के युवा सिर्फ आश्वासन सुनते आए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें मजदूरी करने के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। जन सुराज केवल सत्ता पाने के लिए नहीं बल्कि राज्य की व्यवस्था बदलने के लिए चुनावी मैदान में उतरी है।
"हम राजनीति में खोखले वादे करने नहीं आए हैं। जहां भी जन सुराज का उम्मीदवार जीतेगा, हम उस क्षेत्र के 10 हजार युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के साधन उपलब्ध कराएंगे। अगर हम अपनी बात पर खरे न उतरें, तो जनता हमें दोबारा कभी मौका न दे।"— प्रशांत किशोर, संस्थापक, जन सुराज
प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि रोजगार का यह मॉडल केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों, स्वरोजगार, कौशल विकास और निवेश के जरिए युवाओं के लिए अवसर सृजित किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि उनकी टीम ने हर जिले और क्षेत्र का आर्थिक खाका तैयार कर लिया है।
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एमएलसी चुनाव में उम्मीदवारों के चयन का पैमाना
जन सुराज द्वारा घोषित उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी का कहना है कि टिकट वितरण में परंपरागत जातिगत समीकरणों के बजाय योग्यता, स्थानीय स्वीकार्यता और बेदाग छवि को प्राथमिकता दी गई है। पार्टी की ओर से शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को चुनावी समर में उतारा गया है।
प्रशांत किशोर ने जोर देकर कहा कि एमएलसी की शिक्षक और स्नातक सीटें पढ़े-लिखे तबके का प्रतिनिधित्व करती हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस सदन में ऐसे लोग पहुंचे जो शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और शिक्षित युवाओं के दर्द को समझ सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि पारंपरिक दलों ने इन सीटों को भी केवल राजनीतिक जोड़-तोड़ का जरिया बना दिया था, जिसे जन सुराज बदलने जा रहा है।
एनडीए और महागठबंधन दोनों पर साधा तीखा निशाना
अपने संबोधन में प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन और तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों में बिहार में केवल लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द सत्ता घूमती रही है, लेकिन राज्य का बुनियादी ढांचा, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था आज भी बदहाल है।
पीके ने कहा कि एक तरफ वह गठबंधन है जो 35 साल से जनता को केवल जाति के नाम पर बांटकर वोट लेता रहा है, और दूसरी तरफ केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टियां हैं जिन्होंने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा या बड़े उद्योग देने के नाम पर सिर्फ छलावा किया है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे अपने बच्चों के भविष्य और रोजगार को ध्यान में रखकर वोट करें न कि जाति और धर्म के आधार पर।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का लिटमस टेस्ट
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एमएलसी उप-चुनाव जन सुराज पार्टी के लिए एक लिटमस टेस्ट साबित होंगे। पिछले दो सालों में राज्यव्यापी पदयात्रा के जरिए प्रशांत किशोर ने बिहार के ग्रामीण इलाकों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। अब इस संगठनात्मक ताकत को चुनावी वोटों में बदलने की वास्तविक परीक्षा शुरू हो चुकी है।
यदि जन सुराज इन एमएलसी सीटों पर मजबूत प्रदर्शन करती है या जीत हासिल करती है, तो इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल कई गुना बढ़ जाएगा और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना और अधिक प्रबल हो जाएगी। फिलहाल, रोजगार के इस बड़े वादे ने बिहार के चुनावी माहौल में एक नई सियासी बहस जरूर छेड़ दी है।



