नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के अलग-अलग राज्यों में शिक्षा व्यवस्था की पोल खुलती नजर आ रही है। पंजाब, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में इन दिनों छात्र सड़कों पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों की मुख्य वजह पेपर लीक होना और स्कूलों में गलत छपी हुई किताबों का पहुंचना है। छात्र लंबे समय से इन मुद्दों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे, लेकिन समाधान न मिलने पर अब उनका गुस्सा फूट पड़ा है।
छात्रों का कहना है कि उनकी पढ़ाई के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। परीक्षा के ठीक पहले पेपर लीक हो जाने से उनकी मेहनत पानी में मिल जाती है। इसके अलावा, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को जो किताबें मिल रही हैं, उनमें छपाई की भारी गलतियां हैं। कई किताबों में पाठ्यक्रम ही गलत छपा हुआ है, जिससे पढ़ाई का पूरा नुकसान हो रहा है। इन गंभीर मुद्दों को लेकर छात्र संगठनों ने शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
शिक्षा व्यवस्था की नाकामी और छात्रों का सड़क पर उतरना
जमीनी हकीकत यह है कि इन तीनों राज्यों में प्रशासनिक लापरवाही साफ दिखाई दे रही है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पंजाब के कई जिलों में छात्र रैलियां निकाल रहे हैं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन थमेगा नहीं। पुलिस प्रशासन ने कई जगहों पर छात्रों को रोकने की कोशिश की, जिससे तनाव का माहौल बन गया।
दूसरी ओर, राजनीतिक गलियारों में भी इस बात को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्ष लगातार इन राज्यों की सरकारों को घेर रहा है और शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग कर रहा है। पंजाब में राजनीतिक दलों का ध्यान आगामी चुनावों पर है, लेकिन छात्र इन तमाम राजनीतिक गतिविधियों से दूर अपनी बुनियादी पढ़ाई और भविष्य की सुरक्षा के लिए लड़ रहे हैं। उनका एकमात्र उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना है।
एआई वीडियो और फर्जी खबरों का बढ़ता दौर
इसी बीच, पंजाब की राजनीति से जुड़ी एक और बड़ी घटना सामने आई है जहाँ मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक वीडियो को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। हालांकि फॉरेंसिक जांच के बाद वीडियो की सच्चाई सामने आ चुकी है, लेकिन सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और खबरों का दौर रुक नहीं रहा है। पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह द्वारा शेयर किए गए एक अन्य वीडियो की भी जब पड़ताल की गई, तो वह भ्रामक निकला जिसे ड्रग्स से जोड़कर दिखाया गया था।
इन तमाम तकनीकी भ्रमों और राजनीतिक बयानों के बीच असली मुद्दा कहीं न कहीं पीछे छूटता जा रहा है। आम जनता और युवा वर्ग अब इन बहकावे वाली बातों में आने से बच रहे हैं। वे सीधे तौर पर रोजगार, बेहतर शिक्षा और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं। छात्रों का यह आंदोलन आने वाले समय में देश की शिक्षा नीति पर गहरा असर डाल सकता है।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
द फ्रीलान्स की टीम ने जब पंजाब और ओडिशा के शिक्षण संस्थानों का दौरा किया, तो वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण मिला। अभिभावक भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर डरे हुए हैं। हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि आखिर कब तक बच्चों की पढ़ाई के साथ ऐसा खिलवाड़ होता रहेगा। जब तक सरकारें सख्त और स्थाई कदम नहीं उठातीं, तब तक इस तरह के छात्र आंदोलन थमने का नाम नहीं लेंगे। हमारी यह विशेष रिपोर्ट जमीनी सच्चाई को बयां करती है।








