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राजस्थान निकाय चुनाव पर मंथन: बीजेपी का दावा- जोधपुर में हमारा मेयर तय, कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद

राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव के परिणामों को लेकर भाजपा प्रदेश मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने दावा किया है कि जोधपुर नगर निगम में भाजपा का ही बोर्ड बनेगा और पार्टी का महापौर चुना जाएगा। वहीं कांग्रेस के हॉर्स ट्रेडिंग और क्रॉस वोटिंग के आरोपों को पार्टी ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।
The Freelance ब्यूरो
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20 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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राजस्थान निकाय चुनाव पर मंथन: बीजेपी का दावा- जोधपुर में हमारा मेयर तय, कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद
📷 राजस्थान निकाय चुनाव पर मंथन: बीजेपी का दावा- जोधपुर में हमारा मेयर तय, कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में संभाग प्रभारियों और चुनाव संचालन समिति की हुई अहम बैठक
  • भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने जोधपुर नगर निगम में पार्टी का मेयर बनने का किया स्पष्ट दावा
  • वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि भजनलाल सरकार के नेतृत्व में 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' के तहत हुए चुनाव में मिली ऐतिहासिक सफलता
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राजस्थान निकाय चुनाव परिणाम: भाजपा मुख्यालय में मंथन और रणनीति

राजस्थान में शहरी निकायों के चुनाव परिणाम सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में सभी संभाग प्रभारियों और चुनाव संचालन समिति के सदस्यों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनावों के परिणामों की गहराई से समीक्षा की गई और जमीनी राजनीतिक स्थिति पर मंथन किया गया। पार्टी नेताओं के अनुसार, इस बैठक में तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट अब हाईकमान को दिल्ली भेजी जाएगी, ताकि आगामी रणनीतियों को अंतिम रूप दिया जा सके।

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि पार्टी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत आपस में बैठकर चुनाव के परिणामों का आकलन किया है। उन्होंने बताया कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनाव के बाद आत्मમंथन करना और आगे की तैयारी करना स्वाभाविक प्रक्रिया है। भाजपा इस दिशा में पूरी तरह सक्रिय है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश के कई निकायों में भाजपा के प्रत्याशी निर्विरोध अध्यक्ष चुने जा चुके हैं, जो पार्टी की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।

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जोधपुर नगर निगम पर टिकी निगाहें, भाजपा का बोर्ड बनने का दावा

जोधपुर नगर निगम के चुनाव परिणामों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी सबसे ज्यादा है। भाजपा पार्षदों द्वारा क्रॉस वोटिंग किए जाने और कांग्रेस के समर्थन की चर्चाओं पर मदन राठौड़ ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कांग्रेस के सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी चाहे जितनी कोशिश कर ले, जोधपुर में परिणाम भाजपा के पक्ष में ही आएंगे। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि जोधपुर नगर निगम में भाजपा का ही बोर्ड बनेगा और महापौर भी भाजपा का ही होगा।

जोधपुर के समीकरणों को समझाते हुए उन्होंने बताया कि वहां भाजपा के 45 और कांग्रेस के 44 पार्षद जीते हैं, जबकि 10 पार्षद निर्दलीय और एक आरएलपी का है। ऐसे में बहुमत के आंकड़े को लेकर भाजपा पूरी तरह आश्वस्त है। पार्टी नेताओं का मानना है कि निर्दलीयों और स्थानीय समीकरणों के सहारे जोधपुर में शहरी सरकार बनाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार: 'हम अपना घर संभाल रहे हैं'

कांग्रेस पार्टी द्वारा भाजपा पर पार्षदों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) और प्रशासनिक दबाव बनाने के लगाए गए गंभीर आरोपों पर मदन राठौड़ ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा किसी के भी कार्यक्षेत्र में दखل नहीं दे रही है और न ही किसी पर किसी तरह का दबाव बनाया जा रहा है। पार्टी केवल अपने परिवार और पार्षदों को एकजुट रख रही है। यदि किसी पार्षद के परिजन अपनी पारिवारिक सहमति से कोई बात कह रहे हैं या शिकायत कर रहे हैं, तो पुलिस नियमानुसार उसका निस्तारण कर रही है।

"कांग्रेस पार्टी अपनी अंदरूनी कलह और हार की बौखलाहट से उबर नहीं पा रही है। वे कभी हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाते हैं तो कभी क्रॉस वोटिंग की बात करते हैं। सच्चाई यह है कि हमारे पार्षद पूरी तरह अनुशासित हैं और कांग्रेस के अपने लोग ही उनका साथ छोड़ रहे हैं।" — मदन राठौड़, प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा राजस्थान

'वन स्टेट, वन इलेक्शन' के फार्मूले पर पहली बार हुए चुनाव

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राजस्थान में पहली बार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' यानी एक राज्य, एक चुनाव की रूपरेखा तैयार कर प्रदेश के 309 निकायों के चुनाव एक साथ संपन्न कराए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अपने संकल्प पत्र के वादों को लेकर जनता के बीच गई थी और जनता ने शहरी विकास के एजेंडे पर मुहर लगाई है। आज राज्य की लगभग 37 प्रतिशत आबादी शहरों में निवास करती है, और शहरी मतदाताओं ने डबल इंजन सरकार की नीतियों पर भरोसा जताया है।

राजेंद्र राठौड़ ने आगे कहा कि इन चुनावों में कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व पूरी तरह नदारद नजर आया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट या प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा में से कोई भी धरातલ पर चुनाव प्रचार करता हुआ दिखाई नहीं दिया। कांग्रेस न तो कोई प्रभावी घोषणा पत्र जारी कर पाई और न ही कोई बड़ी जनसभा आयोजित कर सकी। अपनी अंदरूनी गुटबाजी के कारण कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है।

पार्टी का वोट शेयर और जमीनी हकीकत

दिल्ली से आए भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और निकाय चुनाव के मुख्य प्रभारी हरीश द्विवेदी ने कहा कि राजस्थान के युवाओं और आम जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की नीतियों पर मुहर लगाई है। उन्होंने कहा कि निकाय चुनावों में 40 से 42 प्रतिशत तक का वोट शेयर बेहद शानदार माना जाता है। कई बार स्थानीय स्तर पर टिकट वितरण के दौरान कार्यकर्ताओं की आकांक्षाएं अधिक होती हैं, जिसके चलते कुछ बागी निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरकर जीत दर्ज करते हैं, लेकिन वे भी मूल रूप से भाजपा परिवार का ही हिस्सा होते हैं।

पार्टी नेताओं का मानना है कि निर्विरोध चुने गए पार्षदों को साथ जोड़ लिया जाए तो भाजपा का कुल आंकड़ा प्रदेशभर में 70 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। शहरी इलाकों में स्थानीय निकायों के इन परिणामों से राज्य सरकार की नीतियों के प्रति जनता का सकारात्मक रुख साफ झलकता है।

दल-बदल के इतिहास को लेकर कांग्रेस पर निशाना

कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे दल-बदल और विधायकों या पार्षदों को तोड़ने के आरोपों पर पलटवार करते हुए राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि देश और प्रदेश में दल-बदल की संस्कृति को बढ़ावा देने का इतिहास मुख्य रूप से कांग्रेस का रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार रही, तब-तब जोड़-तोड़ की राजनीति की गई। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायकों के कांग्रेस में विलय का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांके।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा का कोई भी समर्पित पार्षद अपनी पार्टी से बगावत नहीं करेगा, बल्कि इसके उलट कांग्रेस पार्टी के कई जीते-जिताए पार्षद खुद भाजपा के संपर्क में हैं और पार्टी का दरवाजा खटखटा रहे हैं। आने वाले दिनों में स्थानीय निकायों के इन तमाम गतिरोधों के बीच शहरी सरकारों के गठन की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।

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