मुंबई और देश भर के सिनेमाघरों में इस वक्त एक नया कोर्टरूम ड्रामा चर्चा का विषय बना हुआ है। अभिनेता राजकुमार राव की फिल्म 'प्रहार' पर्दे पर आ चुकी है। फिल्म का विषय बहुत संवेदनशील और बड़ा है। यह फिल्म भारत के जाने-माने सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के जीवन पर आधारित है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे उन्होंने मुंबई हमलों के दोषी कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाया।
फिल्म के रिलीज होते ही सोशल मीडिया और क्रिटिक्स की तरफ से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। अधिकांश समीक्षकों का मानना है कि राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम की भूमिका को बहुत ही शानदार तरीके से निभाया है। उनके अभिनय में एक गजब की गहराई और गंभीरता दिखाई देती है। कोर्टरूम के अंदर उनके संवाद बोलने का तरीका और चेहरे के भाव दर्शकों को अपनी तरफ खींचते हैं।
कसाब को फांसी दिलाने की वह ऐतिहासिक कानूनी जंग
साल 2008 के मुंबई आतंकी हमलों का वह काला दिन आज भी देशवासियों के जेहन में ताजा है। इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह उस दौर की याद ताजा करती है। अदालत के अंदर जिस तरह से कानूनी दांव-पेच चले थे, उन्हें पर्दे पर बहुत ही बारीकी से उतारा गया है। वकील उज्ज्वल निकम ने किस तरह से सबूत जुटाए और अदालत में जिरह की, इसे निर्देशक ने गहराई से दिखाने की कोशिश की है।
हालांकि, कुछ दर्शकों और समीक्षकों का यह भी मानना है कि फिल्म में केवल अदालती कार्रवाई पर ज्यादा जोर दिया गया है। 26/11 के हमले के वक्त आम लोगों ने जो भयानक दर्द और पीड़ा झेली थी, उसे फिल्म में थोड़ा कम जगह मिली है। कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी धीमी महसूस होती है। इसके बावजूद फिल्म का कुल प्रभाव काफी मजबूत और गंभीर बना रहता है।
राजकुमार राव का दमदार अभिनय और कोर्टरूम का ड्रामा
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसके मुख्य कलाकार का अभिनय है। राजकुमार राव ने साबित कर दिया है कि वे किसी भी तरह के किरदार में आसानी से ढल सकते हैं। उज्ज्वल निकम के तौर पर उनका रूप, उनका आत्मविश्वास और उनकी आवाज का उतार-चढ़ाव देखने लायक है। अदालत के भीतर जज और विरोधी वकीलों के साथ उनकी बहस दर्शकों को बांधकर रखती है।
फिल्म के निर्देशक ने यह सुनिश्चित किया है कि दृश्य बनावटी न लगें। कोर्टरूम के सेट और वहां की लाइटें असली अदालत जैसा माहौल पैदा करती हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक भी कहानी की गंभीरता को और अधिक बढ़ाता है। जब-जब पर्दे पर कानूनी बहस तेज होती है, दर्शकों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। फिल्म हमें यह याद दिलाती है कि न्याय पाने के लिए कितनी लंबी और कठिन लड़ाई लड़नी पड़ती है.
बॉक्स ऑफिस पर कैसी मिल रही है शुरुआती प्रतिक्रिया
सिनेमाघरों के बाहर फिल्म देखकर निकल रहे दर्शकों की जुबान पर राजकुमार राव की ही चर्चा है। लोग कह रहे हैं कि यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि देश के इतिहास के एक अहम पन्ने से रूबरू कराती है। परिवार के साथ आने वाले दर्शक भी इस गंभीर विषय को पसंद कर रहे हैं। हालांकि यह फिल्म पूरी तरह से एक्शन से भरी मसाला फिल्म नहीं है, बल्कि एक गंभीर राजनीतिक और कानूनी ड्रामा है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म कितनी लंबी पारी खेलती है। माउथ पब्लिसिटी यानी लोगों के मुंह से मिलने वाली तारीफ इस फिल्म के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। जो लोग सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्में देखना पसंद करते हैं, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प बन सकती है।
कानूनी कहानियों के दौर में प्रहार की अलग जगह
बॉलीवुड में इन दिनों सच्ची घटनाओं और वकीलों की कहानियों पर फिल्में बनने का चलन बढ़ गया है। 'प्रहार' इस फेहरिस्त में एक नया नाम और मजबूत कड़ी बनकर जुड़ी है। यह फिल्म हमें दिखाती है कि कैसे एक अकेला वकील सिस्टम की कमियों के बीच भी न्याय की उम्मीद जगाए रखता है। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि फिल्म अपनी विषय वस्तु के साथ पूरी तरह न्याय करती है।
यदि आप एक गंभीर सिनेमा प्रेमी हैं और अदालती बहसों को पर्दे पर देखना पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी। राजकुमार राव की यह मेहनत पर्दे साफ झलकती है और यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इसे लेकर सकारात्मक माहौल बनता जा रहा है।












