मॉस्को/नई दिल्ली — रूस से एक बेहद डरावनी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। यहां एक प्रयोगशाला में काम करने वाली महिला कर्मचारी की मौत के बाद प्लेग फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इस घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में उस महिला के संपर्क में आए लगभग दो सौ लोगों को निगरानी में ले लिया गया है। रूस के स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि संक्रमण को और आगे बढ़ने से रोका जा सके।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह महिला एक ऐसी विशेष प्रयोगशाला में तैनात थी जहां खतरनाक जीवाणुओं और बीमारियों पर शोध किया जाता है। अचानक हुई उसकी मौत ने हर किसी को हैरान कर दिया है। डॉक्टरों ने जब मौत के कारणों की जांच की तो प्लेग जैसी खतरनाक बीमारी का अंदेशा हुआ। इसके बाद से ही पूरे इलाके में सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी पाबंदियां बढ़ा दी गई हैं। जिन दो सौ लोगों को निगरानी में रखा गया है, उनमें लैब के अन्य कर्मचारी और महिला के परिवार के लोग शामिल हैं।
प्रयोगशालाओं की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरी घटना के बाद दुनिया भर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के बीच एक बार फिर बहस छिड़ गई है। आम जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या कोरोना वायरस की तरह ही कोई खतरनाक बीमारी फिर से किसी लैब से बाहर आ गई है। जानकारों का कहना है कि इस तरह की उच्च सुरक्षा वाली प्रयोगशालाओं में सुरक्षा के कड़े नियम होते हैं। इसके बावजूद अगर इस तरह की कोई चूक सामने आती है, तो यह मानवता के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकती है। लोग अब यह जानना चाहते हैं कि क्या लैब के अंदर जरूरी नियमों का पालन ठीक से हो रहा था या नहीं।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों को शांत रहने की सलाह दी है और कहा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। निगरानी में रखे गए सभी लोगों के स्वास्थ्य की रोज जांच की जा रही है। किसी भी व्यक्ति में अभी तक प्लेग के गंभीर लक्षण नहीं मिले हैं, फिर भी एहतियात के तौर पर एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। रूस की सरकार ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर लैब के भीतर ऐसा क्या हुआ जिससे कर्मचारी की जान चली गई।
संक्रमण रोकने के लिए प्रशासन की कड़ी कार्रवाई
प्रशासन ने प्रभावित इलाके में सैनिटाइजेशन का काम तेज कर दिया है। लैब के आसपास के क्षेत्रों में भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना पर नजर रखी जा रही है क्योंकि प्लेग एक ऐसा संक्रामक रोग है जो बहुत तेजी से फैलता है। इतिहास में प्लेग की वजह से करोड़ों लोगों की जान जा चुकी है। यही वजह है कि आज के आधुनिक दौर में भी प्लेग का नाम सुनते ही लोग सहम जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य वैश्विक एजेंसियां भी रूसी प्रशासन के साथ मिलकर इस पूरी स्थिति की रिपोर्ट ले रही हैं।
द फ्रीलान्स की टीम इस मामले की हर एक अपडेट पर अपनी नजर बनाए हुए है। जैसे-जैसे स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट सामने आएगी, हम पाठकों तक सही और सटीक जानकारी पहुंचाते रहेंगे। फिलहाल जरूरी यह है कि किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दिया जाए और केवल आधिकारिक बयानों पर भरोसा किया जाए। रूस की यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि विज्ञान की दुनिया में थोड़ी सी भी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
आगे की स्थिति और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां
आने वाले कुछ दिनों में यह साफ हो पाएगा कि प्रयोगशाला के भीतर असल में क्या तकनीकी खामी या लापरवाही हुई थी। रूसी प्रशासन ने वादा किया है कि जांच पूरी होने के बाद पूरी सच्चाई दुनिया के सामने लाई जाएगी। तब तक सभी संबंधित लोगों को आइसोलेशन और मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा ताकि संक्रमण के फैलने के खतरे को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।





