रूस के साइबेरिया से एक बेहद डरावनी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। यहां एक शोध संस्थान की महिला वैज्ञानिक की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है। इस घटना के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी दहशत फैल गई है। शुरुआती रिपोर्ट्स में इस मौत की वजह प्लेग जैसी खतरनाक बीमारी होने का शक जताया जा रहा था। हालांकि रूसी अधिकारियों ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे एक अज्ञात बीमारी बताया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने साफ किया है कि अमेरिका इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रख रहा है।
इस पूरी घटना के सामने आने के बाद रूस के वैज्ञानिक हलकों में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि एहतियात के तौर पर करीब दो सौ लोगों को तुरंत आइसोलेट कर दिया गया है। ये सभी वे लोग हैं जो मृतक वैज्ञानिक के संपर्क में आए थे या फिर उसी लैब के आसपास काम कर रहे थे। रूसी प्रशासन ने तुरंत कदम उठाते हुए इलाके में सुरक्षा और जांच के कड़े इंतजाम कर दिए हैं। विश्लेषक इस घटना की तुलना कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों से करने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि क्या यह किसी खतरनाक वायरस का नया रूप है।
साइबेरियाई लैब में आखिर क्या हुआ था?
साइबेरिया की जिस लैब में यह घटना हुई है, वहां खतरनाक बीमारियों और संक्रमणों पर शोध किया जाता है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला शोधकर्ता की अचानक तबियत बिगड़ी और कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई। मौत के तुरंत बाद अस्पताल और लैब के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी को भी अंदर जाने या बाहर आने की इजाजत नहीं दी गई। स्वास्थ्य विभाग की टीमें तुरंत हरकत में आईं और उन सभी लोगों की तलाश शुरू की गई जो मृतका के संपर्क में आए थे। प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए दो सौ से ज्यादा लोगों को एकांतवास यानी आइसोलेशन में भेज दिया ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके।
रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुरुआती डर को कम करने के लिए बयान जारी किया है। मंत्रालय का दावा है कि लैब कर्मी की मौत किसी अज्ञात बीमारी की वजह से हुई है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में प्लेग फैलने की बात गलत साबित हुई है। इसके बावजूद लोगों के मन से डर पूरी तरह निकला नहीं है। वुहान लैब जैसी घटनाओं की यादें ताजा होने के कारण दुनिया भर के देश सतर्क हो गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ भी इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है और लगातार रूसी अधिकारियों से रिपोर्ट मांग रहा है।
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अमेरिका और रूस आमने-सामने की सुगबुगाहट
इस पूरी घटना ने कूटनीतिक हलकों में भी हलचल तेज कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में इस बात को स्वीकार किया है कि अमेरिका हालात पर नजर रख रहा है। खबरों के अनुसार ट्रंप इस मामले को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बात कर सकते हैं। दुनिया के दो बड़े देशों के बीच इस तरह की स्वास्थ्य संबंधी चिंता पर चर्चा होना बड़े संकेत देता है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लैब में किसी खतरनाक वायरस पर काम चल रहा था, तो इसकी पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
आम जनता के बीच इस खबर के फैलने के बाद से ही डर का माहौल है। लोग सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट्स तलाश रहे हैं। कई जानकारों का कहना है कि इस तरह की लैब घटनाओं से दुनिया को बड़ा सबक लेना चाहिए। जैविक सुरक्षा के मानकों का पालन करना आज के समय में सबसे बड़ी प्राथमिकता होना चाहिए। रूसी प्रशासन भले ही प्लेग होने से इनकार कर रहा हो, लेकिन दो सौ लोगों का आइसोलेशन इस बात का सबूत है कि स्थिति सामान्य नहीं है।
भविष्य के लिए क्या हैं एहतियाती कदम?
इस घटना के बाद अब अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी रूस से और अधिक जानकारी मांग रही हैं। डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों का कहना है कि जब तक स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। वैज्ञानिक समुदाय मांग कर रहा है कि रूस को अपनी लैब के आंकड़े दुनिया के सामने रखने चाहिए। इससे यह साफ हो सकेगा कि संक्रमण का दायरा कितना बड़ा है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि, जब तक आइसोलेट किए गए लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आती, तब तक राहत की सांस लेना मुश्किल होगा। दुनिया भर की निगाहें अब साइबेरिया की इस गुप्त लैब और वहां होने वाली अगली जांच पर टिकी हैं।



