नई दिल्ली के कूटनीतिक गलियारों में इन दिनों एक सुगबुगाहट तेज हो गई है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठकों और अंतरराष्ट्रीय मंचों की पृष्ठभूमि में पाकिस्तान की कूटनीति ने एक नया मोड़ लिया है। इस्लामाबाद अब खुलकर रूस के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने की बेताबी दिखा रहा है। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड पड़ताल और कूटनीतिक सूत्रों से मिले इनपुट बताते हैं कि पाकिस्तान का यह नया 'रूस प्लान' केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि एक गहरे भू-राजनीतिक खेल का हिस्सा है।
INSTC कॉरिडोर पर पाकिस्तान की नजर: क्या है नया दांव?
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान इंटरनेशनल नॉर्थ-दक्षिण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में शामिल होने के संकेत दे रहा है। यह वही कॉरिडोर है जिसे रूस, ईरान और भारत ने मिलकर मध्य एशिया और यूरोप तक माल ढुलाई आसान बनाने के लिए परिकल्पित किया था। अगर पाकिस्तान इसमें सेंध लगाने में कामयाब होता है, तो क्षेत्रीय व्यापार की तस्वीर बदल सकती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या रूस, जो भारत को अपना 'सदाबहार दोस्त' मानता है, पाकिस्तान को इस प्रोजेक्ट में तवज्जो देकर नई दिल्ली को नाराज करने का जोखिम उठाएगा?
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पुराने घावों को भुलाने की बेताबी में इस्लामाबाद
शीत युद्ध के दौर से लेकर सोवियत-अफगान युद्ध तक, रूस और पाकिस्तान के रिश्ते कभी सहज नहीं रहे। मॉस्को हमेशा से भारत के साथ अपने रक्षा और कूटनीतिक रिश्तों को प्राथमिकता देता आया है। हालांकि, बदलते वक्त के साथ रूस ने भी अपनी यूरेशियन नीति का दायरा बढ़ाया है। इस्लामाबाद इसी बदलाव का फायदा उठाने की फिराक में है। पाकिस्तान के रणनीतिकारों का मानना है कि यदि वे रूस को ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के जरिए साध लेते हैं, तो शायद पुतिन पुराना इतिहास भुलाकर नया समीकरण बनाने को राजी हो जाएं।
भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती या महज़ कूटनीतिक शिगूफा?
भारतीय विदेश मंत्रालय के रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की यह चाल पश्चिमी देशों से अपनी बढ़ती दूरी और आर्थिक बदहाली से ध्यान भटकाने का एक जरिया भी हो सकती है। भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के रिश्ते इतने मजबूत हैं कि उन्हें रातों-रात नहीं बदला जा सकता। इसके बावजूद, मॉस्को की हर गतिविधि पर नई दिल्ली की पैनी नजर है। भारत यह अच्छी तरह समझता है कि यूरेशियाई राजनीति में रूस के अपने हित हैं, लेकिन नई दिल्ली के सामरिक हितों की कीमत पर रूस कोई बड़ा कदम उठाएगा, इसकी संभावना फिलहाल कम ही है।
पुतिन का अगला कदम और भविष्य का भू-राजनीतिक असर
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि SCO के मंच पर रूस और पाकिस्तान के बीच किस स्तर की बातचीत होती है। पुतिन प्रशासन अपनी 'एशियाई नीति' के तहत पाकिस्तान के साथ व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने पर विचार कर सकता है, लेकिन भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को कमजोर करने का जोखिम मॉस्को शायद ही उठाए। 'द फ्रीलान्स' की इस विशेष रिपोर्ट का निष्कर्ष यही है कि पाकिस्तान की यह कोशिश एक बड़ा कूटनीतिक दांव जरूर है, लेकिन भारत-रूस की गहरी दोस्ती के किले को भेदना इस्लामाबाद के लिए आसान नहीं होगा।
- पाकिस्तान INSTC कॉरिडोर के जरिए रूस के साथ व्यापारिक संपर्क साधने की जुगत में है।
- मॉस्को और नई दिल्ली के पारंपरिक और गहरे रक्षा संबंध इस नए समीकरण के रास्ते में बड़ी दीवार हैं।
- SCO शिखर सम्मेलन में यूरेशियाई राजनीति के नए आयाम देखने को मिल सकते हैं।
- भारतीय कूटनीति रूस और पाकिस्तान के बीच हो रही हर हलचल पर बारीकी से नजर रखे हुए है।








