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उत्तराखंड में बड़े प्रशासनिक बदलाव: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों पर लगी मुहर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। राज्य में वन भूमि हस्तांतरण, एयरपोर्ट विस्तारीकरण, और संपत्ति खरीद-फरोख्त में पैन कार्ड सत्यापन जैसे कड़े नियमों को मंजूरी दी गई है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•4 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•31
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उत्तराखंड में बड़े प्रशासनिक बदलाव: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों पर लगी मुहर
📷 उत्तराखंड में बड़े प्रशासनिक बदलाव: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों पर लगी मुहर — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में चंपावत के बनबसा में हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े प्रस्तावों को हरी झंडी मिली।
  • संपत्ति की खरीद-फरोख्त में अब पैन कार्ड का सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे फर्जी पैन के इस्तेमाल पर रोक लगेगी।
  • नैनीताल के लालकुआं और देहरादून के जौनसार-बावर में भूमि के पट्टेदारों और कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने का निर्णय लिया गया है।

चंपावत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में अहम बैठक

पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के समग्र विकास और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक सुगम तथा पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल की एक उच्चस्तरीय बैठक चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी गेस्ट हाउस में संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेशहित से जुड़े कई बहुप्रतीक्षित और दूरगामी परिणामों वाले प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। शासन-प्रशासन के विभिन्न विभागों से जुड़े इन प्रस्तावों का सीधा असर आम नागरिकों की जिंदगी, राज्य के बुनियादी ढांचे और वित्तीय अनुशासन पर पड़ेगा।

मंत्रिमंडल की इस बैठक में भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई नियमों में ढील दी गई है, तो वहीं कुछ मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सख्त प्रावधान भी जोड़े गए हैं। जानकारों का मानना है कि इन फैसलों से न केवल प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी, बल्कि जनता को मिलने वाली सरकारी सेवाओं और भू-स्वामित्व से जुड़े मामलों का भी त्वरित निस्तारण हो सकेगा। आइए जानते हैं इस कैबिनेट बैठक में लिए गए सभी प्रमुख फैसलों के बारे में विस्तार से।

वन भूमि मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष इकाई का गठन

उत्तराखंड जैसे वन-प्रधान राज्य में विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स के लिए वन भूमि का हस्तांतरण एक लंबी और जटिल प्रक्रिया रही है। इस प्रक्रिया को गति देने और तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए मंत्रिमंडल ने एक बड़ा निर्णय लिया है। वन विभाग के अंतर्गत नोडल अधिकारी, वन संरक्षण के कार्यालय में एक समर्पित 'प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट' (PMU) के गठन को मंजूरी दे दी गई है। इस नई इकाई के सुचारू संचालन के लिए छह नए पदों के सृजन पर भी सहमति जताई गई है।

यह परियोजना प्रबंधन इकाई मुख्य रूप से वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े प्रस्तावों के तकनीकी परीक्षण, ऑनलाइन संरेखण और मैपिंग के कार्यों की निगरानी करेगी। अक्सर देखा जाता था कि कागजी औपचारिकताओं और तकनीकी उलझनों के कारण सड़क, बिजली और पेयजल जैसी जनहित की योजनाएं लंबे समय तक लटकी रहती थीं। इस नई व्यवस्था के लागू होने से वन और पर्यावरण से जुड़ी मंजूरियों में लगने वाला समय काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे राज्य में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

जमीन के मालिकाना हक और पट्टेदारों के लिए बड़ी राहत

राज्य के विभिन्न हिस्सों में लंबे समय से जमीन के मालिकाना हक का इंतजार कर रहे नागरिकों के लिए धामी सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। मंत्रिमंडल ने वर्ग-3 और वर्ग-4 की भूमि के पट्टेदारों तथा कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार प्रदान करने संबंधी प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत विशेष रूप से जनपद नैनीताल के नगर पंचायत लालकुआं क्षेत्र और जनपद देहरादून के परगना जौनसार-बावर के पात्र लोगों को बड़ी राहत मिलने जा रही है।

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, इन क्षेत्रों में भूमि के विनियमितीकरण की प्रक्रिया को वर्ष 2004 के सर्किल रेट के आधार पर अगले एक वर्ष के लिए विस्तारित किया गया है। इसके बाद के मामलों में प्रचलित सर्किल रेट के नियमों को लागू किया जाएगा। सरकार के इस कदम से हजारों ऐसे परिवारों को कानूनी तौर पर उनकी जमीन का मालिकाना हक मिल सकेगा, जो दशकों से अपनी ही जमीन पर अनिश्चितता के साए में जीवन बिता रहे थे।

पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण और वित्तीय स्वीकृति पर मुहर

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने और बड़े विमानों के संचालन के लिए पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विस्तारीकरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय लिया है। सरकार ने उत्तराखंड सीड्स एंड तराई डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को उसकी कार्ययोजना के तहत अवशेष राशि के रूप में 66 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि अवमुक्त करने की मंजूरी प्रदान की है।

यह राशि एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के सिलसिले में हस्तांतरित की गई परिसंपत्तियों और कॉरपोरेशन के नवनिर्माण कार्यों पर खर्च की जाएगी। सरकार का यह प्रयास राज्य में हवाई यातायात को मजबूत करने और पर्यटन के साथ-साथ औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। बेहतर कनेक्टिविटी से पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

संपत्ति खरीद-फरोख्त में पैन कार्ड सत्यापन हुआ अनिवार्य

रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता लाने और काले धन पर लगाम कसने के उद्देश्य से स्टाम्प एवं निबंधन विभाग के नियमों में कड़ाई की गई है। अब राज्य में किसी भी अचल संपत्ति की खरीद और बिक्री के दौरान लेन-देन से जुड़े सभी पक्षों (क्रेता और विक्रेता) के लिए पैन कार्ड का सत्यापन (PAN Verification) अनिवार्य कर दिया गया है।

"संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया में पैन कार्ड के अनिवार्य सत्यापन से फर्जी दस्तावेजों के जरिए होने वाले लेन-देन पर प्रभावी रोक लगेगी। इससे न केवल राजस्व चोरी रुकेगी, बल्कि आयकर विभाग को भेजी जाने वाली रिपोर्टिंग में भी पूर्ण पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित होगी।"— प्रशासनिक सूत्र, उत्तराखंड सरकार

यह व्यवस्था लागू होने से फर्जी पैन नंबरों का इस्तेमाल करके बेनामी संपत्तियों के सौदे करने वाले भू-माफियाओं और भ्रष्ट तत्वों पर शिकंजा कसना आसान हो जाएगा। आम और ईमानदार नागरिकों के लिए यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी माध्यम साबित होगी।

वित्तीय अनुशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े अन्य अहम निर्णय

राज्य की आर्थिक सेहत को दुरुस्त रखने के लिए मंत्रिमंडल ने 'उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी अपनी मंजूरी दी है। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक राजकोषीय घाटे की सीमा को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 3 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। साथ ही, कुल संचयी ऋण की अधिकतम सीमा भी 30 प्रतिशत तय की गई है, हालांकि प्राकृतिक आपदा या विशेष सुरक्षा संकट के समय नियमों के तहत छूट का प्रावधान भी रखा गया है।

इसके अलावा, वन विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभागाध्यक्ष की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब कुमा गढ़वाल के मुख्य वन संरक्षकों को सीधे तौर पर अपने क्षेत्रों में विभागाध्यक्ष की शक्तियां प्राप्त होंगी, जिससे वनाग्नि, बाढ़ नियंत्रण और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी आपात स्थितियों में त्वरित फैसले लिए जा सकेंगे। छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों को भी आगामी विधानसभा सत्र के पटल पर रखने की मंजूरी दे दी गई है।

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