उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में इन दिनों कुदरत का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। लगातार बढ़ रहे गोमती नदी के जलस्तर ने शहर के लोगों की नींद उड़ा दी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि शहर का ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल सीताकुंड घाट पूरी तरह से पानी में डूब चुका है। नदी का पानी अब घाट की सीढ़ियों को पार कर ऊपर की तरफ बह रहा है। इस डरावनी स्थिति को देखकर इलाके के पुराने बाशिंदों को साल-दर-साल आने वाली पुरानी भयानक बाढ़ की यादें ताजा हो गईं। लोग डरे हुए हैं कि अगर पानी का यह बहाव ऐसा ही रहा, तो खतरा और बढ़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पिछले कुछ सालों में ऐसा जलस्तर कभी नहीं देखा था। गोमती नदी का पानी जिस तेजी से ऊपर आ रहा है, उससे निचली बस्तियों के लोगों में हड़कंप मच गया है। कई घरों के आस-पास पानी जमा होना शुरू हो गया है, जिससे रोजमर्रा का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लोग अपनी गाड़ियां और जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने लगे हैं। प्रशासन की तरफ से भी नदी के किनारे रहने वाले लोगों को लगातार चेतावनी दी जा रही है कि वे पानी के ज्यादा नजदीक न जाएं और सुरक्षित जगहों की ओर रुख करें।
सीताकुंड घाट पर डूबी आस्था और बढ़ गई मुश्किलें
सुल्तानपुर का सीताकुंड घाट हिंदू आस्था का एक बड़ा केंद्र है। यहां रोज सैकड़ों लोग स्नान और पूजा-पाठ के लिए आते हैं। लेकिन नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद पूरा मंदिर परिसर और घाट का निचला हिस्सा जलमग्न हो गया है। हालात यह हैं कि अब वहां पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। पुजारियों और दुकानदारों का कहना है कि पानी भरने से उनका कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। घाट के पास मौजूद छोटी दुकानें और पूजा सामग्री बेचने वाले लोग अपनी दुकानें समेटकर सुरक्षित ठिकानों पर जाने को मजबूर हो गए हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से घाट पर लोगों के जाने पर रोक लगा दी है।
बाढ़ जैसी इस अचानक आई स्थिति ने स्थानीय नगर पालिका और जिला प्रशासन के दावों की भी पोल खोल दी है। लोगों का आरोप है कि नदी के किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। जब पानी बढ़ना शुरू हुआ, तब जाकर अधिकारियों की नींद खुली। हालांकि, जिला प्रशासन के अधिकारियों का दावा है कि स्थिति अभी पूरी तरह नियंत्रण में है। एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमों को बाढ़ संभावित इलाकों में तैनात कर दिया गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए नावों और गोताखोरों की व्यवस्था भी कर दी गई है ताकि समय रहते लोगों को बचाया जा सके।
पुरानी बाढ़ की डरावनी यादों से सहमे लोग
गोमती के बढ़ते जलस्तर को देखकर बुजुर्ग लोगों को पिछली बड़ी बाढ़ का वह भयानक मंजर याद आ रहा है। उस वक्त पूरा शहर पानी में डूब गया था और लोगों को महीनों तक भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। खाने-पीने की चीजों के लाले पड़ गए थे और बिजली-पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई थी। इस बार भी जब पानी उसी रफ्तार से बढ़ रहा है, तो लोगों के मन में डर बैठ गया है कि कहीं इतिहास खुद को न दोहरा दे। लोग अपने घरों की छतों और ऊंचे स्थानों पर जाने की तैयारी पहले से ही करने लगे हैं ताकि अचानक आने वाले खतरे से बचा जा सके।
मौसम विभाग और केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, ऊपरी इलाकों में हो रही लगातार भारी बारिश की वजह से गोमती नदी में पानी का यह सैलाब आया है। जब तक ऊपरी इलाकों में बारिश नहीं रुकेगी, तब तक जलस्तर कम होने की कोई उम्मीद नहीं है। इस बीच, स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधि भी प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं और लोगों को हर संभव मदद का भरोसा दे रहे हैं। लेकिन कागजी आश्वासनों से अलग जमीन पर लोगों की धड़कनें तेज हैं, क्योंकि हर गुजरते घंटे के साथ गोमती का बढ़ता पानी तबाही की नई इबारत लिख रहा है।
प्रशासन की मुस्तैदी और आगे की बड़ी चुनौतियां
इस संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने राहत शिविरों की तैयारी शुरू कर दी है। जिन इलाकों में पानी भरने का सबसे ज्यादा खतरा है, वहां के लोगों को लगातार मुनादी कराकर सतर्क किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि बाढ़ के पानी से फैलने वाली बीमारियों जैसे डायरिया और मलेरिया से समय रहते निपटा जा सके। पशुपालकों के सामने अपने मवेशियों को बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, क्योंकि चारे और सुरक्षित स्थान की कमी खलने लगी है। 'द फ्रीलान्स' की टीम लगातार इस जमीनी हालात पर नजर बनाए हुए है और पल-पल की अपडेट आप तक पहुंचा रही है।






