चेन्नई/नई दिल्ली: 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय राजनीतिक गलियारों में इस वक्त भूचाल सा आया हुआ है। तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता विजय की पार्टी 'तमिझगा वेत्री कड़गम' (TVK) के इंडी गठबंधन में शामिल होने की खबर ने सियासी समीकरणों को पूरी तरह उलट कर रख दिया है। एक तरफ जहां दक्षिण के इस नए राजनीतिक मोर्चे ने अपनी रणनीति तेज कर दी है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली से लेकर मुंबई तक चुनाव आयोग (CEC) और मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया पर तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं।
तमिलनाडु की बदलती पटकथा और TVK की एंट्री
पिछले कुछ महीनों से तमिलनाडु की राजनीति में लगातार उठापटक जारी है। एक तरफ जहां भाजपा के भीतर अंदरूनी कलह और के. अन्नामलाई की चुप्पी व अमित शाह से मुलाकात की खबरें सुर्खियों में हैं, वहीं दूसरी तरफ विजय की TVK ने अपने तेवर स्पष्ट कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TVK का इंडी गठबंधन के साथ आना आगामी विधानसभा चुनावों में द्रमुक और अन्नाद्रमुक के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। हमारी ज़मीनी पड़ताल बताती है कि युवा वर्ग में विजय की लोकप्रियता का फायदा अब विपक्षी गठबंधन अपने पाले में खींचने की जुगत में है।
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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) पर विपक्ष का सीधा हमला
इस बीच, राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने आक्रामक रुख अपना लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कड़े शब्दों में आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारी सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं। विपक्ष अब CEC के खिलाफ महाभियोग या सामूहिक इस्तीफे की मांग को लेकर संसद से सड़क तक साझा रणनीति बनाने की तैयारी कर रहा है। यह टकराव देश की संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
SIR प्रक्रिया और न्यायपालिका की सख्त टिप्पणी
विवाद केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक मोर्चे पर भी चुनाव आयोग घिरता नजर आ रहा है। दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने बेला एस्टेट का उदाहरण दिया, जहां कथित तौर पर 728 में से 727 नाम सूची से काट दिए जाने का सनसनीखेज दावा किया गया है। इसके साथ ही, बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर तंज कसते हुए कहा कि 'कानून को भूल जाओ और सिर्फ सॉफ्टवेयर के पीछे भागो'। यह टिप्पणी चुनावी तंत्र में तकनीकी खामियों और प्रशासनिक मनमानी पर बड़ा प्रहार है।
अन्नामलाई की चुप्पी और भाजपा की आंतरिक राजनीति
तमिलनाडु के मोर्चे पर भाजपा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रदेश भाजपा नेता के. अन्नामलाई के इस्तीफे की अफवाहों और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनकी गुप्त मुलाकात के बाद राज्य में अटकलों का बाजार गर्म है। हालांकि उन्होंने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उनकी यह 'चुप्पी' राज्य के राजनीतिक गलियारों में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है।
निष्कर्ष: क्या देश एक नए बड़े राजनीतिक संघर्ष की ओर बढ़ रहा है?
हमारी फील्ड इन्वेस्टिगेशन यह साफ दर्शाती है कि आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के फेरबदल और क्षेत्रीय क्षत्रपों के गठबंधन भारतीय राजनीति की दिशा तय करेंगे। टीवीके की एंट्री से तमिलनाडु का रण अब त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय संघर्ष में बदल चुका है, और राष्ट्रीय विपक्ष इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता।








