नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय रेलवे नेटवर्क में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब आम यात्रियों को लंबी दूरी के सफर के लिए राजधानी एक्सप्रेस से भी बेहतर और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। रेलवे प्रशासन ने 24 डिब्बों वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलाने की पूरी तैयारी कर ली है। इस नई ट्रेन में कुल 1224 सीटें होंगी। ट्रेन के भीतर यात्रियों की सुविधा के लिए फुल एसी पैंट्री कार और ऑटोमैटिक दरवाजे लगाए गए हैं, जो सफर को पूरी तरह से सुरक्षित और आरामदायक बनाएंगे।
इस प्रोजेक्ट के तहत हाल ही में रेलवे ने नए कोचों का कड़ा परीक्षण किया है। हाल ही में हुए एक बड़े ट्रायल में 16 कोच वाली नई वंदे भारत ट्रेन ने 180 किलोमीटर प्रति घंटे की फुल स्पीड से दौड़ लगाई। इस सफल ट्रायल ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय पटरियां अब अत्यधिक उच्च गति वाली आधुनिक ट्रेनों के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इन नई बोगियों में सफर करने वाले यात्रियों को झटके महसूस नहीं होंगे और ट्रेन बेहद कम समय में लंबी दूरी तय करेगी।
धनबाद होकर गुजरेगी हावड़ा-नई दिल्ली स्लीपर ट्रेन
रेलवे की नई योजनाओं के तहत हावड़ा से नई दिल्ली के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के रूट को हरी झंडी मिल चुकी है। यह महत्वपूर्ण ट्रेन झारखंड के धनबाद जंक्शन से होकर गुजरेगी। इस रूट के तय होने से झारखंड और आसपास के इलाकों के यात्रियों को राजधानी दिल्ली पहुंचने के लिए एक नया और तेज विकल्प मिल जाएगा। स्थानीय लोगों और व्यापारियों में इस ट्रेन को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि इससे समय की बड़ी बचत होगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन नई स्लीपर ट्रेनों के आने से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को काफी राहत मिलेगी। इसमें आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ट्रेन के अंदर 360 डिग्री घूमने वाली सीटें लगाई गई हैं, जिससे यात्रियों को बैठने में पूरी आसानी होगी। इसके अलावा, कोच का तापमान भी मौसम के हिसाब से ऑटोमैटिक तरीके से बदलेगा, जिससे एसी की ठंडक का पूरा और आरामदायक अहसास मिलेगा।
उदयपुर-सूरत रूट पर पहले से मिल रहा शानदार रिस्पॉन्स
वंदे भारत ट्रेनों की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के दूसरे रूटों पर इन्हें यात्रियों का भारी समर्थन मिल रहा है। हाल ही में शुरू की गई उदयपुर-सूरत वंदे भारत ट्रेन को यात्रियों ने हाथों-हाथ लिया है। इस ट्रेन में नब्बे प्रतिशत से ज्यादा यात्रीभार दर्ज किया गया है। यानी सीटें लगभग हर दिन फुल चल रही हैं। इसी सफलता को देखते हुए रेलवे अब स्लीपर वर्जन को देश के बाकी व्यस्त मार्गों पर उतारने की रणनीति बना रहा है।
जमीनी स्तर पर यात्रियों से बात करने पर पता चलता है कि लोग अब पुरानी और धीमी ट्रेनों की बजाय इन आधुनिक गाड़ियों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। हालांकि, इन ट्रेनों का किराया सामान्य एक्सप्रेस गाड़ियों से थोड़ा ज्यादा है, लेकिन मिलने वाली सुविधाएं और सुरक्षा यात्रियों को आकर्षित कर रही हैं। रेलवे का लक्ष्य आने वाले महीनों में देश के सभी प्रमुख महानगरों को वंदे भारत स्लीपर नेटवर्क से जोड़ना है।
आम जनता के लिए कब से शुरू होगी यह सेवा
रेलवे बोर्ड के सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा और तकनीकी ट्रायल के अंतिम चरण पूरे होने के बाद इन ट्रेनों को आधिकारिक तौर पर पटरियों पर उतार दिया जाएगा। धनबाद और अन्य प्रमुख स्टेशनों पर इसके स्वागत के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। रेलवे सुरक्षा और समय की पाबंदी को लेकर कोई ढील नहीं बरतना चाहता है, इसलिए हर एक चरण की बारीकी से निगरानी की जा रही है।




