नई दिल्ली/वृंदावन — सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इन दिनों एक चौंकाने वाला दावा तेजी से वायरल हो रहा है। फलाहारी बाबा नाम के एक व्यक्ति ने बयान दिया है कि भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के दर्शन कराने और आश्रम बुलाने के एवज में पांच करोड़ रुपये दिए गए थे। इस दावे के सामने आने के बाद से ही खेल जगत और धार्मिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है। लोग यह जानने के लिए बेचैन हैं कि आखिर इस दावे में कितनी सच्चाई है और क्या सचमुच किसी खिलाड़ी को दर्शन के लिए पैसे दिए जाते हैं।
जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया के जरिए विराट कोहली तक पहुंची, उन्होंने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ी और कड़ा रुख अपनाया। विराट कोहली के करीबी सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खिलाड़ी ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। कोहली का साफ कहना है कि किसी भी संत या महात्मा के पास जाना पूरी तरह से व्यक्तिगत आस्था का मामला है। इसे पैसों या लेन-देन से जोड़ना सरासर गलत और अपमानजनक है। उन्होंने इस तरह की अफवाहें फैलाने वालों को कड़ी चेतावनी भी दी है कि वे इस तरह की झूठी बातें फैलाना तुरंत बंद करें।
फलाहारी बाबा के वायरल दावों की जमीनी हकीकत
द फ्रीलान्स की टीम ने इस वायरल दावे की तह तक जाने के लिए वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम के आसपास के लोगों और स्थानीय जानकारों से बातचीत की। पड़ताल में सामने आया कि प्रेमानंद महाराज के दरबार में आने वाले हर आम और खास व्यक्ति के लिए नियम एक जैसे हैं। वहां किसी भी प्रकार के वीआईपी कल्चर या पैसों के बल पर दर्शन कराने का कोई प्रावधान नहीं है। महाराज जी खुद साफ कह चुके हैं कि भगवान और संतों के दर्शन केवल भाव और प्रेम से होते हैं, पैसों से नहीं। ऐसे में फलाहारी बाबा द्वारा पांच करोड़ रुपये देने का दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत और सनसनी फैलाने वाला साबित हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए ऐसे अजीबोगरीब दावे करते रहते हैं। विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा पहले भी कई बार वृंदावन आकर प्रेमानंद महाराज के दर्शन कर चुके हैं। उनकी यह यात्राएं पूरी तरह से गोपनीय और निजी होती हैं, जिनकी जानकारी वे खुद बहुत बाद में साझा करते हैं। ऐसे में पैसों के लेन-देन की बात करना न केवल बेतुका है बल्कि भक्तों की भावनाओं को ठेس पहुंचाने वाला भी है। आश्रम प्रशासन ने भी इस तरह के बयानों से दूरी बना ली है और इसे केवल पब्लिसिटी स्टंट करार दिया है।
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सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों का सच
आज के दौर में सोशल मीडिया पर किसी भी सनसनीखेज खबर को वायरल होने में जरा भी वक्त नहीं लगता। फलाहारी बाबा का यह बयान भी बिना किसी ठोस सबूत के इंटरनेट पर शेयर किया जाने लगा। प्रभात खबर, अमर उजाला और एनडीटीवी जैसे बड़े मीडिया घरानों ने भी जब इस मामले की पड़ताल की, तो उन्हें भी इस दावे के पक्ष में एक भी पुख्ता सुराग नहीं मिला। यह स्पष्ट हो गया कि कुछ लोग टीआरपी या लाइक्स पाने के लिए नामचीन हस्तियों का नाम घसीट रहे हैं ताकि लोग उनकी बातों पर आसानी से विश्वास कर लें।
आम जनता और क्रिकेट प्रेमियों के बीच भी इस झूठे दावे को लेकर काफी गुस्सा देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि आस्था जैसी पवित्र चीजों पर इस तरह के झूठे आरोप लगाना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आना चाहिए। विराट कोहली के फैंस ने सोशल मीडिया पर फलाहारी बाबा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है। उनका कहना है कि देश के सम्मानित खिलाड़ियों और संतों को विवादों में घसीटने वालों के खिलाफ कानूनी कदम उठाया जाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी अफवाह फैलाने की हिम्मत न करे।
आस्था और धन के बीच भ्रम फैलाने वालों पर प्रशासन की नजर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर भी ऐसे तत्वों पर नजर रखी जा रही है जो धर्म और मशहूर हस्तियों का नाम इस्तेमाल करके समाज में भ्रम फैलाते हैं। पुलिस और साइबर सेल की टीमें उन सोशल मीडिया हैंडल की जांच कर रही हैं जिन्होंने सबसे पहले इस फर्जी खबर को हवा दी थी। साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंटरनेट पर बिना जांचे-परखे किसी भी दावे को शेयर करना न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि इससे समाज में नफरत और गलतफहमी भी फैलती है।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड रिपोर्ट से यह बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि विराट कोहली और प्रेमानंद महाराज के बीच के रिश्ते को लेकर फलाहारी बाबा ने जो भी कहा, वह पूरी तरह झूठ है। संतों का दरबार हमेशा से सभी के लिए खुला रहा है और वहां पैसे या रसूख की कोई जगह नहीं है। पाठकों और आम जनता से अपील है कि वे ऐसी किसी भी भ्रामक खबर पर भरोसा न करें और सोशल मीडिया पर मिलने वाली हर जानकारी को आंख मूंदकर आगे बढ़ाने से बचें। सच्चाई हमेशा जांच-पड़ताल के बाद ही सामने आती है।



