जिला मुख्यालय पर बुधवार से दिगंबर जैन समाज के सबसे बड़े पर्वों में शुमार दशलक्षण (पर्यूषण) महापर्व का आध्यात्मिक और उत्साहपूर्ण माहौल में आगाज हो गया है। शहर के ऐतिहासिक श्री शांतिनाथ मंदिर में अगले दस दिनों तक विशेष पूजा-विधान और धार्मिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी। इस दौरान समाज के लोग अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिए जप, तप, त्याग, संयम और साधना की राह पर चलेंगे। महापर्व के पहले दिन को समाजजनों ने 'उत्तम क्षमा दिवस' के रूप में बहुत ही श्रद्धा के साथ मनाया।
सुबह से ही शांतिनाथ मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
पर्व के पहले दिन सुबह से ही शहर के श्री शांतिनाथ मंदिर में जैन समाज के लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। पारंपरिक और सात्विक वेशभूषा में पहुंचे श्रद्धालुओं के चेहरे पर पर्व को लेकर गजब का उत्साह साफ नजर आ रहा था। जैन शास्त्रकार संस्थान सांगानेर से विशेष रूप से पधारे पंडित आयुष जैन के मार्गदर्शन में तमाम पूजन-विधान शुरू हुए। दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष कमल कुमार जैन और समाज के अन्य वरिष्ठजनों की मौजूदगी में विधि-विधान के साथ मंत्रोच्चार किए गए।
मंदिर परिसर में मंत्रों की गूंज के बीच प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा, ध्वजारोहण और कलश स्थापना की रस्में पूरी की गईं। इस दौरान मौजूद हर शख्स भक्ति भाव से सराबोर दिखाई दिया। महिलाओं और युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर इन धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लिया और अपनी आस्था का इजहार किया।
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विभिन्न परिवारों को मिला धार्मिक अनुष्ठानों का लाभ
समाज के महामंत्री सुनील जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि महापर्व के पहले दिन अभिषेक एवं प्रथम शांतिधारा का धर्मलाभ महावीर प्रसाद और कमल कुमार जैन को प्राप्त हुआ। इसके साथ ही द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य राजेंद्र कुमार, सुनील व अनिल जैन को मिला। वहीं तृतीय शांतिधारा में राजकुमार, मंजू, दीपक व नीलू जैन तथा चतुर्थ शांतिधारा में पारस जैन, टीना, वैभव व जिया ने धर्मलाभ लिया।
मंदिर में मुख्य कलश स्थापना और चित्र अनावरण का सौभाग्य भी महावीर प्रसाद व कमल जैन को ही प्राप्त हुआ। इसके अलावा, मंदिर में प्रज्ज्वलित होने वाली अखंड ज्योत का पुण्य लाभ राजेंद्र कुमार, सुनील और अनिल जैन परिवार ने उठाया। इन सभी धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पूरा मंदिर परिसर जैन भजनों और जयकारों से गूंज उठा।
पंडित आयुष जैन ने बताए पर्युषण पर्व के दस धर्म
विशेष प्रवचन देते हुए पंडित आयुष जैन ने कहा कि पर्युषण पर्व किसी बाहरी दिखावे का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मजागृति और आत्मशुद्धि का महापर्व है। उन्होंने विस्तार से बताया कि इन दस दिनों में उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य इन दस धर्मों का चिंतन और मनन किया जाता है। इन दस लक्षणों को अपने जीवन में उतारने से ही मनुष्य का कल्याण संभव है।
"दशलक्षण महापर्व हमें क्रोध, अहंकार और माया को छोड़कर क्षमा और संयम के मार्ग पर चलना सिखाता है। यह दस दिन आत्मा को मैल से मुक्त करने और भीतर झांकने का सबसे बड़ा अवसर हैं।" — पं. आयुष जैन, जैन शास्त्रकार संस्थान, सांगानेर
शाम के समय मंदिर में भगवान की महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। आरती के बाद सभी ने एक-दूसरे से क्षमा मांगते हुए 'उत्तम क्षमा' की भावना को आत्मसात किया। आयोजकों ने बताया कि गुरुवार को महापर्व के दूसरे दिन 'उत्तम मार्दव दिवस' पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
