शारदीय नवरात्र का पावन पर्व चल रहा है. मां दुर्गा को समर्पित इस पर्व में सात्विकता का बड़ा ख्याल रखा जाता है. इस दौरान लोग लहसुन, प्याज और तामसिक चीजों का सख्ती से परहेज करते हैं. मंदिरों में देवी को भोग भी सात्विक चीजों का ही लगाया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में कुछ शक्तिपीठों और धार्मिक स्थलों पर मांसाहारी भोग चढ़ाने की भी परंपरा है. आइए आज आपको देवी के कुछ ऐसे ही पवित्र स्थलों के बारे में विस्तार से बताते हैं.
1. विमला मंदिर (पुरी, ओडिशा)
ओडिशा के पुरी में स्थित विमला मंदिर जगन्नाथ मंदिर परिसर के भीतर एक प्रमुख शक्तिपीठ है. यहां दुर्गा पूजा के दौरान एक विशेष परंपरा निभाई जाती है. इस अनुष्ठान में सुबह होने से पहले बकरे की बलि दी जाती है. इसके साथ ही पवित्र मार्कंडेय सरोवर की मछली पकाकर देवी विमला को अर्पित की जाती है. इस अनुष्ठान को विमला पुरुसा कहा जाता है. यहां पूजा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को भी मांस का प्रसाद बांटा जाता है.
2. तरकुलहा देवी मंदिर (गोरखपुर)
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित तरकुलहा देवी मंदिर में भी देवी को मांसाहारी भोग चढ़ाने की परंपरा है. यहां नवरात्र के दौरान खासकर चैत्र और शारदीय नवरात्र के अवसरों पर देवी को प्रसन्न करने के लिए बकरे की बलि देने की प्रथा निभाई जाती है. बलि के बाद बकरे के मांस को पकाकर प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं के बीच बांटा जाता है.
3. कामाख्या मंदिर (असम)
असम के कामाख्या मंदिर को देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मंदिर में शाकाहारी भोग के साथ-साथ मांस का भोग भी चढ़ाया जाता है. यह मंदिर शक्ति उपासना और तांत्रिक परंपराओं का प्रमुख धाम माना जाता है. कामाख्या मंदिर में बकरे और मछली के मांस का भोग चढ़ाने की परंपरा बताई जाती है. हालांकि, इस परंपरा से जुड़े नियमों का पूरी निष्ठा के साथ पालन किया जाता है.
4. तारापीठ और कालीघाट मंदिर (पश्चिम बंगाल)
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित तारापीठ मां तारा का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है. इस मंदिर में भी मटन और मछली का भोग लगाने की परंपरा है. यह तांत्रिक साधना और शक्ति उपासना से जुड़ी परंपराओं के लिए जाना जाता है. यहां मां तारा को चढ़ाए जाने वाले भोग में बकरे का मांस और शोल मछली का विशेष तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा, पश्चिम बंगाल स्थित कालीघाट मंदिर में भी देवी को मांस का भोग लगाने की परंपरा है जहां श्रद्धालु मन्नत पूरी होने के बाद अनुष्ठान करते हैं.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित इस रिपोर्ट में दी गई जानकारियां पौराणिक परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित हैं. 'The Freelance' इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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