पाकिस्तान की सियासत में नया मोड़, क्या देश छोड़ देंगे इमरान खान?
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर बेहद दिलचस्प और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। जेल की सलाखों के पीछे दिन काट रहे पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के भविष्य को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। देश की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता और 'पख्तूनख्वा मिली अवामी पार्टी' (PKMAP) के प्रमुख महमूद खान अचकजई ने एक सनसनीखेज दावा किया है। उनका कहना है कि मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन इमरान खान पर एक बड़े राजनीतिक समझौते के तहत देश छोड़कर जाने का दबाव बना रहा है।
अचकजई ने यह बयान पेशावर हाई कोर्ट में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया। उनके इस दावे ने पाकिस्तानी सियासत में खलबली मचा दी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या पाकिस्तान के इतिहास का वही पुराना फॉर्मूला एक बार फिर दोहराया जाने वाला है, जिसके तहत अतीत में कई दिग्गज नेताओं को अपनी राजनीतिक जमीन छोड़कर विदेश में शरण लेनी पड़ी थी।
नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो के दौर की दिलाई याद
अपने दावे के समर्थन में वरिष्ठ विपक्षी नेता महमूद खान अचकजई ने पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास के उन पन्नों को पलटा, जब देश के शीर्ष नेतृत्व को दबाव में आकर निर्वासन का रास्ता अपनाना पड़ा था। उन्होंने साल 2000 के उस दौर का जिक्र किया जब तत्कालीन सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के तख्तापलट के बाद जेल में बंद नवाज शरीफ को विदेशी मध्यस्थता के बाद सऊदी अरब भेज दिया गया था।
ठीक इसी तरह, 1990 के दशक के अंत में राजनीतिक उठापटक और भ्रष्टाचार के मामलों के बीच पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो को भी लंबे समय तक लंदन और दुबई में स्वेच्छा से निर्वासन का जीवन बिताना पड़ा था। अचकजई का स्पष्ट मानना है कि पाकिस्तान की वर्तमान व्यवस्था इमरान खान के साथ भी बिल्कुल वैसा ही खेल खेलना चाहती है, ताकि उन्हें मुख्यधारा की राजनीति से पूरी तरह दूर किया जा सके।
अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं इमरान खान
क्रिकेटर से राजनेता बने 73 वर्षीय इमरान खान पिछले साल यानी अगस्त 2023 से सलाखों के पीछे हैं। उन्हें सबसे पहले 5 अगस्त 2023 को तोशाखाना मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद से उन पर कानूनी शिकंजा लगातार कसता ही चला गया।
आज स्थिति यह है कि इमरान खान पर सिफर मामला, अल-कादिर ट्रस्ट केस और इद्दत निकाह समेत लगभग 200 से अधिक आपराधिक और राजनीतिक मामले दर्ज हैं। इन तमाम मामलों के चलते उनकी कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनके समर्थकों का आरोप है कि ये सभी मामले राजनीति से प्रेरित हैं और उन्हें जेल में प्रताड़ित किया जा रहा है।
कानूनी पाबंदियों और मानवाधिकारों पर उठे गंभीर सवाल
विपक्षी नेता अचकजई ने सिर्फ देश छोड़ने के दबाव पर ही बात नहीं की, बल्कि उन्होंने जेल में बंद राजनीतिक कैदियों के साथ हो रहे अमानवीय बर्ताव की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में ऐसा नहीं होता कि किसी पूर्व प्रधानमंत्री या राजनीतिक कैदी को बुनियादी कानूनी सलाह लेने से रोका जाए।
उन्होंने यह भी बताया कि इमरान खान और उनके पार्टी के अन्य नेताओं से उनके परिवार के सदस्यों और वकीलों की मुलाकात पर अघोषित पाबंदियां लगी हुई हैं। अचकजई के मुताबिक, मौजूदा राजनीतिक गतिरोध को खत्म करने के लिए संसद को उसकी वास्तविक ताकत लौटानी होगी और देश में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए एक स्वतंत्र आयोग का गठन करना बेहद जरूरी हो गया है।
"मौजूदा सत्तारूढ़ गठबंधन इमरान खान के साथ भी वही पुराना राजनीतिक फॉर्मूला दोहराने की कोशिश कर रहा है, जो अतीत में नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो के साथ अपनाया गया था। उन पर लगातार समझौते का दबाव बनाया जा रहा है।" — महमूद खान अचकजई, विपक्षी नेता एवं पीकेएमएपी प्रमुख
क्या समझौता स्वीकार करेंगे इमरान खान?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इमरान खान अपने पूर्ववर्तियों की तरह देश छोड़कर जाने का कोई समझौता स्वीकार करेंगे? हालांकि अचकजई ने यह साफ नहीं किया है कि इमरान खान की तरफ से इस तरह के किसी भी प्रस्ताव पर कोई रजामंदी दी गई है या नहीं, लेकिन इतना तय है कि पीटीआई संस्थापक अपनी जिद और आक्रामक तेवरों के लिए जाने जाते हैं।
दूसरी तरफ, पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार और शक्तिशाली सैन्य तंत्र के सामने देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था और बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की बड़ी चुनौती है। ऐसे में इमरान खान की पार्टी को मैनेज करना और उनके राजनीतिक वजूद को कमजोर करना सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है। आने वाले दिनों में पाकिस्तानी अदालतें और राजनीतिक दल क्या रुख अपनाते हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।












